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लखीमपुर खीरी: तिकुनिया कांड में 14वें आरोपी बनाए गए केंद्रीय मंत्री टेनी के साले को कोर्ट ने दी जमानत  

Mon, 10 Jan 2022 05:44 PM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, लखीमपुर खीरी
अमर उजाला ब्यूरो, लखीमपुर खीरी Published by: सुशील कुमार Updated Mon, 10 Jan 2022 05:44 PM IST
सार

अदालत ने सभी आरोपियों को चार्जशीट की नकल देने का जांच टीम को आदेश दिया है। अभियोजन ने नकल न देने के लिये अदालत में अर्जी लगाई थी, जिस पर सोमवार को सुनवाई हुई।

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Court granted bail to brother-in-law of Union Minister Teni who was made 14th accused in Tikuniya case
लखीमपुर खेरी हिंसा - फोटो : पीटीआई

विस्तार

लखीमपुर के तिकुनिया कांड में 14वें आरोपी बनाए गए केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के साले वीरेंद्र शुक्ला को सीजेएम कोर्ट से जमानत मिल गई है। तीन जनवरी को मामले में एसआईटी अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। उधर, सोमवार को सुनवाई के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को चार्जशीट की नकल देने का जांच टीम को आदेश दिया है। अभियोजन ने नकल न देने के लिये अदालत में अर्जी लगाई थी, जिस पर सोमवार को सुनवाई हुई।

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इस मामले में शुक्रवार को भी हुई सुनवाई
वहीं, पिछले दो दिनों से स्थगित हो रही जमानत अर्जी शुक्रवार को आपत्तियों के निस्तारण के बाद सुनी गई। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामाषीश मिश्र और शैलेंद्र सिंह ग़ौड़ ने बदली गई धाराओं में दाखिल जमानत अर्जी पर बहस की। बताया कि जमानत अर्जी देने वाले आरोपियों की कोई अन्य जमानत अर्जी किसी भी अदालत में लंबित नहीं है। जब सीजेएम ने ध्यान दिलाया यह जमानत प्रार्थना पत्र प्रथम है या द्वितीय तब आरोपियों की ओर से बताया गया कि इससे पूर्व की धाराओं में जमानत प्रार्थना पत्र खारिज हुआ था। बदली गई धाराओं में पहली अर्जी है, लेकिन वह इस जमानत प्रार्थना पत्र को प्रथम जमानत अर्जी नही लिख सकते हैं। यह कहते हुए जमानत अर्जी में द्वितीय जमानत आवेदन का उल्लेख किया साथ ही अभियुक्तों के पैरोकार की ओर से इसी बात का शपथ पत्र भी दाखिल किया और बताया कि एसआईटी की ओर से बिना सम्यक जांच किए ही उन्हें आरोपी बताया गया, जबकि वह निर्दोष हैं।
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पांच आरोपियों के लिए दूसरे अधिवक्ता को भी दी गई नकल
तिकुनिया हिंसा में अदालती आदेश के बाद आखिरकार एसआईटी की ओर से केस डायरी से जुडे़ एक हजार पेज की नकल अंकित दास, सत्यम त्रिपाठी, नंदन सिंह बिश्ट, लतीफ उर्फ काले और शेखर भारती के अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह गौड़ को प्राप्त कराई गई। इतनी लंबी चार्जशीट से जुडे़ हजारों पेज की नकल प्राप्त करने के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह गौड़ ने बताया कि विस्तृत अध्ययन के बाद ही कुछ कहा जा सकता है कि एसआईटी ने कौन से महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नहीं दिया। बताते हैं कि पूरी केस डायरी में कुल पांच हजार पेज नहीं हैं बल्कि इससे कम हैं। लेकिन अभियोजन की ओर से अंदाज से पांच हजार पेज की केस डायरी होने का कथन किया जा रहा है, जो स्वयं अभियोजन की कार्यशैली को बता रहा है।

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