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पंजाब से साइकिल से घर लौटे दो मजदूर
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मोहम्मदी। पंजाब एक फैक्टरी में काम करने राजवीर एवं उनका मित्र राधेश्याम मजदूरी करने के लिए होली के समय से गए हुए थे। लॉकडाउन के बाद काम न मिल सका वापसी करने के लिए कोई भी साधन प्रशासन से नहीं मिल सका और न ही कोई सहयोग मिला। ऐसी स्थिति में दोनों साथियों ने चार हजार की दो पुरानी साइकिलें खरीदी और पांच मई को मौका पाकर अपने घर के लिए निकल पड़े।
लगातार रात दिन साइकिल चलाकर देर रात मोहम्मदी पहुंचे राजवीर और राधेश्याम थक कर चूर हो गए तो रोडवेज के पास ही बैठ गए।
उन्होंने वहां मौजूद लोगों को अपनी कहानी बताई और भूखे होने की बात कही। स्थानीय लोगों ने जानकी रसोई संचालक शिवम राठौर को सूचित किया। सूचना मिलते ही दोनों राहगीरों को भोजन बनाकर खिलाया। ठहरने के लिए बिस्तर पंखे की व्यवस्था कराई। रविवार सुबह चार बजे अपने घर ईसानगर के लिए निकल गए। राजवीर ने बताया कि हम लोग नौकरी की तलाश में पंजाब गए हुए थे। लेकिन ऐसी मुसीबत में फंस गए कि घर मिलना दूर हो गया। उन्होंने बताया कि जान जोखिम में डालकर साइकिल से आने का निर्णय लिया। बहरहाल अपने घर आकर वह दोनों खुश हैं।
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लगातार रात दिन साइकिल चलाकर देर रात मोहम्मदी पहुंचे राजवीर और राधेश्याम थक कर चूर हो गए तो रोडवेज के पास ही बैठ गए।
उन्होंने वहां मौजूद लोगों को अपनी कहानी बताई और भूखे होने की बात कही। स्थानीय लोगों ने जानकी रसोई संचालक शिवम राठौर को सूचित किया। सूचना मिलते ही दोनों राहगीरों को भोजन बनाकर खिलाया। ठहरने के लिए बिस्तर पंखे की व्यवस्था कराई। रविवार सुबह चार बजे अपने घर ईसानगर के लिए निकल गए। राजवीर ने बताया कि हम लोग नौकरी की तलाश में पंजाब गए हुए थे। लेकिन ऐसी मुसीबत में फंस गए कि घर मिलना दूर हो गया। उन्होंने बताया कि जान जोखिम में डालकर साइकिल से आने का निर्णय लिया। बहरहाल अपने घर आकर वह दोनों खुश हैं।
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