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लॉकडाउन: जहां साधन मिला बैठ लिए नहीं तो पैदल ही चलते रहे
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लखीमपुर खीरी/ मैगलगंज । कोरोना संकट के बीच बंदी के चलते दिल्ली और अन्य प्रदेशों में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले हजारों लोग पैदल ही अपने अपने घरों की ओर रवाना हो गए हैं। इस कारण दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे पर भीड़ लगातार बढ़ रही है। इन लोगों का कहना है कि जहां कोई साधन मिलता है वे लोग उसका सहारा ले लेते हैं वरना पैदल ही सफर कर रहे हैं।
दिल्ली, हरिद्वार, गाजियाबाद, राजस्थान में मजदूर फैक्ट्रियों में काम करते थे, अचानक लॉकडाउन से मजदूर जहां थे, वहीं फंस गए। मजदूरों ने एक दो दिन किसी तरह गुजर बसर की। अब पैसा व खाद्य सामग्री के अभाव में वह घरों को पैदल ही लौटने लगे हैं। मजदूरों की हालत खराब है। इनमें बिहार के हुगली, फैजाबाद, गोंडा, बाराबंकी सहित कई अन्य जिलों के लोग अधिक हैं। शनिवार को इनके खाने-पीने की व्यवस्था एक समाजसेवी ने निर्माणाधीन टोल प्लाजा पर कराई। लंच पैकेट मिलने के बाद उनके चेहरे पर रौनक दिखी।
मैगलगंज में दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे पर दोपहर पहुंचे एसडीएम मितौली दिग्विजय सिंह ने भी मजदूरों को लंच पैकेट, पानी की बोतल दीं, उनके हाथ सैनिटाइजर से धुलवाए। सावधानी बरतने की अपील की।
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पलियाकलां में संपूर्णानगर थाना क्षेत्र के गोविंदनगर गांव में एक शादी समारोह में आए लगभग 50 लोग लॉकडाउन के चलते यहीं फंस के रह गए। ऐसे में विधायक रोमी साहनी ने डीएम शैलेंद्र सिंह से वार्ता कर बस से सभी को सकुशल देवरिया के लिए रवाना किया। इस पर सभी लोगों ने विधायक के प्रति आभार जताया।
दिल्ली से पैदल चलकर आए करीब 12 लोग यहां पहुंचे थे। उनको यहां से बहराइच जाना था। जिसके बाद सीओ राकेश कुमार नायक व पुलिस बल ने उनके लिए खाने का इंतजाम करने के साथ ही उनको यहां से शुक्रवार की देर रात जाने के लिए पिकअप का इंतजाम किया। जिसके बाद वह सभी अपने गंतव्य को रवाना हो सके।
मैलानी में कुकरा क्षेत्र के लैलून नगर के रहने वाले मजदूर रुद्रपुर में मजदूरी करते थे। लॉकडाउन के कारण ये लोग वहां से पैदल ही अपने घरों को रवाना हुए और शुक्रवार की शाम यहां पहुंचे और यहां से जलपान करने के बाद फिर अपने गांव को रवाना हो गए।
गोला मेंशनिवार को रोडवेज डिपो परिसर, चौराहा, तिराहा पर थके, हारे, भूखे, प्यासे मुसाफिरों को समाजसेवी विजय माहेश्वरी, अनिल जलोटा आदि समाजसेवियों ने भोजन कराया।
‘दो दिन से नहीं मिला खाना’
ममरी में लॉकडाउन के चलते गाजियाबाद से मजदूरी कर वापस आए गोला कोतवाली क्षेत्र के गांव वनभल्लिया निवासी नितिन सिद्धार्थ, अन्नू, कपरहा के मेराज, अलीगंज निवासी सलमान अली, शमसाद आदि मजदूरों ने अपना दर्द बयां कर बताया कि उन्हें दो दिन से खाना नहीं मिला है। गाजियाबाद से कुछ दूर पैदल चलने के बाद उन्हें शाहजहांपुर तक निजी बस मिली और जैसे-तैसे मोहम्मदी से पैदल घर जा रहे हैं। वहीं अजबापुर फैक्टरी से पैदल घर जा रहे संपूर्णानगर निवासी विजय कुमार, मनोज, अजीत ने बताया कि लॉकडाउन के चलते मैनेजर ने उन्हें फैक्टरी से भगा दिया है। घर तक पहुंचने के लिए साधन न मिलने से वह पैदल ही संपूर्णानगर वापस जा रहे हैं।
सोनीपत में फंसे मजदूरों ने वीडियो वायरल कर मांगी मदद
ईसानगर थाना क्षेत्र के अलग-अलग गांव से मजदूरी करने हरियाणा के सोनीपत गए दिहाड़ी मजदूर लॉकडाउन के चलते वहां फंस गए हैं। ऐसे में मजदूरों ने सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल कर मदद की गुहार लगाई है।
करीब बीस दिन पहले ईसानगर क्षेत्र के गांव सेमरिया, कटौली सहित कई गांवों से 80 मजदूर हरियाणा के सोनीपत की एक कैमिकल फैक्ट्री में काम करने गए थे लेकिन लॉकडाउन होने के कारण सारे मजदूर वहां फंस गए। शनिवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में मजदूर अपने घरों पर आने की गुहार लगा रहे हैं। उनका कहना है कि न तो उनके पास पैसा है और न राशन। जिसके चलते वह संक्रमण से पहले भूख से ही मर जाएंगे।
एसडीएम धौरहरा एस सुधाकरन का कहना है कि उन्होंने वीडियो देखा है कि कौन कांट्रेक्टर इन मजदूरों को सोनीपत ले गया था। उसका पता कराया जा रहा है। यह मजदूर अभी वही रहेंगे। इनके भोजन के प्रबंध के लिए जिलाधिकारी सोनीपत और कंपनी को पत्र जारी किया गया है।
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दिल्ली, हरिद्वार, गाजियाबाद, राजस्थान में मजदूर फैक्ट्रियों में काम करते थे, अचानक लॉकडाउन से मजदूर जहां थे, वहीं फंस गए। मजदूरों ने एक दो दिन किसी तरह गुजर बसर की। अब पैसा व खाद्य सामग्री के अभाव में वह घरों को पैदल ही लौटने लगे हैं। मजदूरों की हालत खराब है। इनमें बिहार के हुगली, फैजाबाद, गोंडा, बाराबंकी सहित कई अन्य जिलों के लोग अधिक हैं। शनिवार को इनके खाने-पीने की व्यवस्था एक समाजसेवी ने निर्माणाधीन टोल प्लाजा पर कराई। लंच पैकेट मिलने के बाद उनके चेहरे पर रौनक दिखी।
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मैगलगंज में दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे पर दोपहर पहुंचे एसडीएम मितौली दिग्विजय सिंह ने भी मजदूरों को लंच पैकेट, पानी की बोतल दीं, उनके हाथ सैनिटाइजर से धुलवाए। सावधानी बरतने की अपील की।
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पलियाकलां में संपूर्णानगर थाना क्षेत्र के गोविंदनगर गांव में एक शादी समारोह में आए लगभग 50 लोग लॉकडाउन के चलते यहीं फंस के रह गए। ऐसे में विधायक रोमी साहनी ने डीएम शैलेंद्र सिंह से वार्ता कर बस से सभी को सकुशल देवरिया के लिए रवाना किया। इस पर सभी लोगों ने विधायक के प्रति आभार जताया।
दिल्ली से पैदल चलकर आए करीब 12 लोग यहां पहुंचे थे। उनको यहां से बहराइच जाना था। जिसके बाद सीओ राकेश कुमार नायक व पुलिस बल ने उनके लिए खाने का इंतजाम करने के साथ ही उनको यहां से शुक्रवार की देर रात जाने के लिए पिकअप का इंतजाम किया। जिसके बाद वह सभी अपने गंतव्य को रवाना हो सके।
मैलानी में कुकरा क्षेत्र के लैलून नगर के रहने वाले मजदूर रुद्रपुर में मजदूरी करते थे। लॉकडाउन के कारण ये लोग वहां से पैदल ही अपने घरों को रवाना हुए और शुक्रवार की शाम यहां पहुंचे और यहां से जलपान करने के बाद फिर अपने गांव को रवाना हो गए।
गोला मेंशनिवार को रोडवेज डिपो परिसर, चौराहा, तिराहा पर थके, हारे, भूखे, प्यासे मुसाफिरों को समाजसेवी विजय माहेश्वरी, अनिल जलोटा आदि समाजसेवियों ने भोजन कराया।
‘दो दिन से नहीं मिला खाना’
ममरी में लॉकडाउन के चलते गाजियाबाद से मजदूरी कर वापस आए गोला कोतवाली क्षेत्र के गांव वनभल्लिया निवासी नितिन सिद्धार्थ, अन्नू, कपरहा के मेराज, अलीगंज निवासी सलमान अली, शमसाद आदि मजदूरों ने अपना दर्द बयां कर बताया कि उन्हें दो दिन से खाना नहीं मिला है। गाजियाबाद से कुछ दूर पैदल चलने के बाद उन्हें शाहजहांपुर तक निजी बस मिली और जैसे-तैसे मोहम्मदी से पैदल घर जा रहे हैं। वहीं अजबापुर फैक्टरी से पैदल घर जा रहे संपूर्णानगर निवासी विजय कुमार, मनोज, अजीत ने बताया कि लॉकडाउन के चलते मैनेजर ने उन्हें फैक्टरी से भगा दिया है। घर तक पहुंचने के लिए साधन न मिलने से वह पैदल ही संपूर्णानगर वापस जा रहे हैं।
सोनीपत में फंसे मजदूरों ने वीडियो वायरल कर मांगी मदद
ईसानगर थाना क्षेत्र के अलग-अलग गांव से मजदूरी करने हरियाणा के सोनीपत गए दिहाड़ी मजदूर लॉकडाउन के चलते वहां फंस गए हैं। ऐसे में मजदूरों ने सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल कर मदद की गुहार लगाई है।
करीब बीस दिन पहले ईसानगर क्षेत्र के गांव सेमरिया, कटौली सहित कई गांवों से 80 मजदूर हरियाणा के सोनीपत की एक कैमिकल फैक्ट्री में काम करने गए थे लेकिन लॉकडाउन होने के कारण सारे मजदूर वहां फंस गए। शनिवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में मजदूर अपने घरों पर आने की गुहार लगा रहे हैं। उनका कहना है कि न तो उनके पास पैसा है और न राशन। जिसके चलते वह संक्रमण से पहले भूख से ही मर जाएंगे।
एसडीएम धौरहरा एस सुधाकरन का कहना है कि उन्होंने वीडियो देखा है कि कौन कांट्रेक्टर इन मजदूरों को सोनीपत ले गया था। उसका पता कराया जा रहा है। यह मजदूर अभी वही रहेंगे। इनके भोजन के प्रबंध के लिए जिलाधिकारी सोनीपत और कंपनी को पत्र जारी किया गया है।