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कोरोना ने रोकी गरीब परिवारों के बच्चों की रोशनी
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लखीमपुर खीरी। कोरोना की वजह से जिले में गरीब परिवारों के बच्चों को सोलर स्टडी लैंप बांटने का काम रुक गया है। अभी तक सिर्फ तीन ब्लॉकों पलिया, निघासन और लखीमपुर के 1,27,411 बच्चों को सोलर स्टडी लैंप वितरित की जा चुकी हैं, जबकि शेष ब्लॉकों में सोलर स्टडी लैंप के वितरण की योजना अभी खटाई में पड़ी है। इस कार्य में लगे महिला समूह भी पसोपेश में पड़े हैं, क्योंकि विभागीय अधिकारी भी इस योजना के चालू होने के बारे में कोई सही जानकारी नहीं दे पा रहे हैं। हालांकि पांच ब्लॉकों में सोलर स्टडी लैंप वितरण कराने के लिए फाइल निदेशालय को भेजी जा चुकी है, जिस पर महीनों बीतने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) द्वारा गरीब परिवारों के बच्चों को सोलर स्टडी लैंप लागत मूल्य पर यानी 100 रुपये में देने की शुरुआत 2016-17 में हुई थी। इसमें महिला समूहों को सोलर लैंप की असेंबलिंग कर बेचने का काम सौंपा गया था। पहले वर्ष पलिया में 27,255 और निघासन में 59,703 बच्चों को सोलर लैंप दी गई। वर्ष 2018-19 में लखीमपुर ब्लॉक में 40,453 बच्चों को सोलर स्टडी लैंप बांटी गई। इन तीनों ब्लॉकों में सोलर लैंप की रिपेयरिंग के लिए दुकानें भी खोली गई हैं। सोलर लैंप असेंबलिंग करने में 119 महिला सदस्यों को रोजगार मिला था। 2019-20 में पांच ब्लॉकों मितौली, बेहजम, नकहा, फूलबेहड़ आदि में सोलर स्टडी लैंप वितरण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया, लेकिन अब तक मामला फाइलों में दबा है।
बनाने पर 12 रुपये और बेचने पर 17 रुपये की आमदनी
सोलर स्टडी लैंप बनाने (असेंबल) की जिम्मेदारी महिला समूहों को मिला था, जिससे प्रत्येक लैंप को बनाने में 12 रुपये और बेचने पर 17 रुपये कमीशन मिल रहा था। इससे समूहों को अच्छी आय हो रही थी। वहीं गरीब परिवारों के बच्चों को लागत मूल्य 100 रुपये में सोलर लैंप दी जा रही थी। मिशन प्रबंधक वरुण गुप्ता ने बताया कि स्टडी लैंप के अलावा एलईडी बल्व, सोलर लालटेन, टार्च आदि बनाने के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। सोलर लाइट से संबंधित सामान का यही निर्माण करने के लिए फैक्टरी लगाने पर भी विचार शासन स्तर पर चल रहा है।
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सोलर स्टडी लैंप वितरण की योजना के संबंध में शासन स्तर से निर्णय लिया जाना है। कोरोना काल में फैक्ट्रियों में काम बंद होने से मैटेरियल की समस्या आ रही है। इससे सोलर स्टडी लैंप वितरण का काम अभी बंद है। - अजय प्रताप सिंह, उपायुक्त, एनआरएलएम
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) द्वारा गरीब परिवारों के बच्चों को सोलर स्टडी लैंप लागत मूल्य पर यानी 100 रुपये में देने की शुरुआत 2016-17 में हुई थी। इसमें महिला समूहों को सोलर लैंप की असेंबलिंग कर बेचने का काम सौंपा गया था। पहले वर्ष पलिया में 27,255 और निघासन में 59,703 बच्चों को सोलर लैंप दी गई। वर्ष 2018-19 में लखीमपुर ब्लॉक में 40,453 बच्चों को सोलर स्टडी लैंप बांटी गई। इन तीनों ब्लॉकों में सोलर लैंप की रिपेयरिंग के लिए दुकानें भी खोली गई हैं। सोलर लैंप असेंबलिंग करने में 119 महिला सदस्यों को रोजगार मिला था। 2019-20 में पांच ब्लॉकों मितौली, बेहजम, नकहा, फूलबेहड़ आदि में सोलर स्टडी लैंप वितरण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया, लेकिन अब तक मामला फाइलों में दबा है।
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बनाने पर 12 रुपये और बेचने पर 17 रुपये की आमदनी
सोलर स्टडी लैंप बनाने (असेंबल) की जिम्मेदारी महिला समूहों को मिला था, जिससे प्रत्येक लैंप को बनाने में 12 रुपये और बेचने पर 17 रुपये कमीशन मिल रहा था। इससे समूहों को अच्छी आय हो रही थी। वहीं गरीब परिवारों के बच्चों को लागत मूल्य 100 रुपये में सोलर लैंप दी जा रही थी। मिशन प्रबंधक वरुण गुप्ता ने बताया कि स्टडी लैंप के अलावा एलईडी बल्व, सोलर लालटेन, टार्च आदि बनाने के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। सोलर लाइट से संबंधित सामान का यही निर्माण करने के लिए फैक्टरी लगाने पर भी विचार शासन स्तर पर चल रहा है।
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सोलर स्टडी लैंप वितरण की योजना के संबंध में शासन स्तर से निर्णय लिया जाना है। कोरोना काल में फैक्ट्रियों में काम बंद होने से मैटेरियल की समस्या आ रही है। इससे सोलर स्टडी लैंप वितरण का काम अभी बंद है। - अजय प्रताप सिंह, उपायुक्त, एनआरएलएम