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लखीमपुर : जांच में पुष्टि... पसगवां ब्लॉक में हुई लाखों की घपलेबाजी
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लखीमपुर खीरी। पसगवां ब्लॉक में विकास कार्यों के नाम पर हुए घपलों की शिकायतों के बीच मनरेगा में लाखों का घोटाला सामने आया है। शिकायत पर उपायुक्त मनरेगा की जांच में घपले के आरोपों की पुष्टि हुई है। उपायुक्त पीपी त्रिपाठी ने सीडीओ को रिपोर्ट सौंपते हुए उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। अब पीडी केके पांडेय की अगुवाई में डीडीओ अरविंद कुमार और एई डीआरडीए की तीन सदस्यीय कमेटी जांच करेगी। कमेटी को 13 अप्रैल को स्थलीय जांच कर रिपोर्ट सीडीओ को सौंपनी है। वहीं बीडीओ लगातार आरोपों को निराधार बता रहे हैं।
कोरोना काल में श्रमिकों और प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने के लिए मनरेगा से बड़े पैमाने पर कार्ययोजना बनाई गईं थी। वर्ष 2021-22 में मनरेगा से 72,27,078 मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित था, इसके सापेक्ष 94,05,310 मानव दिवस सृजित किए गए। यह आंकड़ा वार्षिक लक्ष्य के सापेक्ष 130.14 प्रतिशत है। विभागीय रिकार्ड में कुल 6,27,223 जॉबकार्ड धारक हैं। 3,91,846 जॉबकार्ड धारक सक्रिय है और शेष 2,35,377 जॉबकार्ड धारक निष्क्रिय हैं। वर्ष 2021-22 में कुल दो अरब 27 करोड़ 52 लाख 27 हजार रुपये व्यय किए गए हैं।
इसमें कुछ ब्लॉक के अफसरों ने सेंध लगाते हुए लाखों रुपये का घपला कर डाला। इसमें पसगवां ब्लॉक का नाम सामने आया है। मनरेगा से बगैर कार्य कराए फर्जी मस्टर रोल बनाकर सरकारी धनराशि हड़पने की शिकायत ग्रामीणों द्वारा किए जाने पर उपायुक्त मनरेगा प्रेम प्रकाश त्रिपाठी ने प्रकरण की जांच की। जांच में पाया कि ब्लॉक मुख्यालय पर मस्टर रोल बनाए गए लेकिन उन्हें ग्राम पंचायतों में नहीं भेजा गया। इसके बाद ब्लॉक मुख्यालय से ही चिह्नित जॉबकार्ड धारकों के खातों भुगतान भेज दिया गया और मनरेगा एक्ट के प्रावधान का खुलेआम उल्लंघन किया गया।
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इस तरह निकाली गई धनराशि लाखों में है। उपायुक्त ने मामले की रिपोर्ट सीडीओ को देते हुए उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। इस पर सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने पीडी केके पांडेय की अगुवाई में तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है। तकनीकी जांच के लिए डीआरडीए के एई और डीडीओ अरविंद कुमार को शामिल किया है। यह टीम 13 अप्रैल 2022 को स्थलीय जांच करने के लिए पसगवां जाएगी और रिपोर्ट सीडीओ को देगी।
बीडीओ की तैनाती से जांच होगी प्रभावित - पसगवां ब्लॉक में मनरेगा योजना में घोटाले का आरोप प्रमुख रूप से बीडीओ पर है, जबकि वह आरोपों को निराधार बता रहे हैं। मौजूदा समय में इनकी तैनाती उसी ब्लॉक में हैं। ऐसे में उनके पद पर रहते आरोपों की निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है। इस बात को लेकर अधिकारियों के बीच सुगबुगाहट तेज है।
‘पसगवां ब्लॉक में मनरेगा से कराए गए कार्यों में घपला किए जाने का आरोप है। उपायुक्त मनरेगा द्वारा की गई जांच में आरोपों की पुष्टि हुई है। उच्चस्तरीय जांच के लिए पीडी की अगुवाई में तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई है। कमेटी की रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।’
- अनिल कुमार सिंह, सीडीओ
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कोरोना काल में श्रमिकों और प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने के लिए मनरेगा से बड़े पैमाने पर कार्ययोजना बनाई गईं थी। वर्ष 2021-22 में मनरेगा से 72,27,078 मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित था, इसके सापेक्ष 94,05,310 मानव दिवस सृजित किए गए। यह आंकड़ा वार्षिक लक्ष्य के सापेक्ष 130.14 प्रतिशत है। विभागीय रिकार्ड में कुल 6,27,223 जॉबकार्ड धारक हैं। 3,91,846 जॉबकार्ड धारक सक्रिय है और शेष 2,35,377 जॉबकार्ड धारक निष्क्रिय हैं। वर्ष 2021-22 में कुल दो अरब 27 करोड़ 52 लाख 27 हजार रुपये व्यय किए गए हैं।
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इसमें कुछ ब्लॉक के अफसरों ने सेंध लगाते हुए लाखों रुपये का घपला कर डाला। इसमें पसगवां ब्लॉक का नाम सामने आया है। मनरेगा से बगैर कार्य कराए फर्जी मस्टर रोल बनाकर सरकारी धनराशि हड़पने की शिकायत ग्रामीणों द्वारा किए जाने पर उपायुक्त मनरेगा प्रेम प्रकाश त्रिपाठी ने प्रकरण की जांच की। जांच में पाया कि ब्लॉक मुख्यालय पर मस्टर रोल बनाए गए लेकिन उन्हें ग्राम पंचायतों में नहीं भेजा गया। इसके बाद ब्लॉक मुख्यालय से ही चिह्नित जॉबकार्ड धारकों के खातों भुगतान भेज दिया गया और मनरेगा एक्ट के प्रावधान का खुलेआम उल्लंघन किया गया।
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इस तरह निकाली गई धनराशि लाखों में है। उपायुक्त ने मामले की रिपोर्ट सीडीओ को देते हुए उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। इस पर सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने पीडी केके पांडेय की अगुवाई में तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है। तकनीकी जांच के लिए डीआरडीए के एई और डीडीओ अरविंद कुमार को शामिल किया है। यह टीम 13 अप्रैल 2022 को स्थलीय जांच करने के लिए पसगवां जाएगी और रिपोर्ट सीडीओ को देगी।
बीडीओ की तैनाती से जांच होगी प्रभावित - पसगवां ब्लॉक में मनरेगा योजना में घोटाले का आरोप प्रमुख रूप से बीडीओ पर है, जबकि वह आरोपों को निराधार बता रहे हैं। मौजूदा समय में इनकी तैनाती उसी ब्लॉक में हैं। ऐसे में उनके पद पर रहते आरोपों की निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है। इस बात को लेकर अधिकारियों के बीच सुगबुगाहट तेज है।
‘पसगवां ब्लॉक में मनरेगा से कराए गए कार्यों में घपला किए जाने का आरोप है। उपायुक्त मनरेगा द्वारा की गई जांच में आरोपों की पुष्टि हुई है। उच्चस्तरीय जांच के लिए पीडी की अगुवाई में तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई है। कमेटी की रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।’
- अनिल कुमार सिंह, सीडीओ