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तराई में कहर ढा रहा सर्दी का सितम
अमर उजाला ब्यूरो,लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 10 Jan 2018 06:06 PM IST
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भीषण शीत लहर का प्रकोप बुधवार को भी जारी रहा। नए साल के पहले दिन से शुरू हुआ सर्दी का सितम अब कहर ढाने लगा है। जिले में अब तक ठंड से चार लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि जिला प्रशासन ठंड से हुई इन मौतों का कारण बीमारी मान रहा है। पारे में लगातार गिरावट जारी है। तेज रफ्तार से चल रही बर्फीली हवाओं ने गलन और बढ़ा दी है। बुधवार को दिन भर धूप न निकलने से लोग परेशान रहे।
बुधवार को अधिकतम तापमान 17.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 4.3 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। यह तापमान मंगलवार के तापमान से कम है। सुबह पूरा जिला कोहरे की चादर में लिपटा दिखाई दिया। दिन भर धुंध छाई रही। इसके चलते सूरज के दर्शन नहीं हुए। बर्फीली हवाओं से गलन इतनी ज्यादा बढ़ गई कि हाथ पैर सुन्न होने की स्थिति आ गई है। रात में पाला गिरने से भी ठंड भी और बढ़ गई।
भीषण शीत लहर उनके लिए मुसीबत बन गई है, जो बाढ़ और कटान में अपने घर गंवाने के बाद सड़क और तटबंध के किनारे पॉलिथीन तानकर खानाबदोशों की तरह रहने को मजबूर हैं। दूर दराज से काम की तलाश में आने वाले मजदूरों, पल्लेदारों, रिक्शा चालकों, फील्ड वर्क करने वाले लोगों और यात्रियों को बेहद दिक्कतें हो रही हैं।
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बुधवार को अधिकतम तापमान 17.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 4.3 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। यह तापमान मंगलवार के तापमान से कम है। सुबह पूरा जिला कोहरे की चादर में लिपटा दिखाई दिया। दिन भर धुंध छाई रही। इसके चलते सूरज के दर्शन नहीं हुए। बर्फीली हवाओं से गलन इतनी ज्यादा बढ़ गई कि हाथ पैर सुन्न होने की स्थिति आ गई है। रात में पाला गिरने से भी ठंड भी और बढ़ गई।
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भीषण शीत लहर उनके लिए मुसीबत बन गई है, जो बाढ़ और कटान में अपने घर गंवाने के बाद सड़क और तटबंध के किनारे पॉलिथीन तानकर खानाबदोशों की तरह रहने को मजबूर हैं। दूर दराज से काम की तलाश में आने वाले मजदूरों, पल्लेदारों, रिक्शा चालकों, फील्ड वर्क करने वाले लोगों और यात्रियों को बेहद दिक्कतें हो रही हैं।
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