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खीरी में टांगिया के माथे से हटेगा अतिक्रमणकारी का दाग

Fri, 15 Nov 2019 01:07 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 15 Nov 2019 01:07 AM IST
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cm khiri tangiya
बिजुआ। गोला और भीरा वन रेंज के टांगिया के जिन मजदूरों का दर्द अमर उजाला ने उकेरा था उन्हें अब दशकों बाद आजादी मिलेगी। गुरुवार को गोला आए सीएम योगी ने जब मंच से इन बस्तियों की बात की तो सामने भीड़ में खड़े कुछ अंजान चेहरे चमक उठे। सीएम के फरमान के बाद अब जंगलात के अब तक के अतिक्रमणकारी माने जाने वाले इन टांगियां बस्ती तक सड़क, आंगनबाड़ी केंद्र, स्कूल, शौचालय समेत सभी आम नागरिकों की तरह अधिकार देने की कवायद होगी।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोला के जमुनाबाद फार्म से बड़ी घोषणाएं कीं तो एक छोटी सी घोषणा इस गांव के लिए भी थी। सीएम ने मंच से ही डीएम खीरी समेत विधायक अरविंद गिरि सांसद अजय मिश्र टेनी की ओर इशारा कर कहा कि खीरी जिले के गोला एवं भीरा रेंज के वन टांगिया अतिक्रमणकारी नहीं हैं, इनके गांव के लिए वह सारी योजनाएं दी जाएं जो आम गांवों को दी जाती हैं। अमर उजाला ने इन लोगों की दास्तां को एक दशक से प्रमुख रूप से प्रकाशित कर इनकी पहचान को दुनिया को रूबरू कराया था।
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छह दशक पहले लाए वन मजदूरों को जंगल महकमा अब मानता था अतिक्रमणकारी
खीरी जिले में अंग्रेजों के जमाने में काटे जा चुके साल और सागौन के जंगलों को फिर से रोपने के 1962 में गोरखपुर जिले से करीब 50 मजदूरों को लाया गया था। इन पौधे को रोपने के सिस्टम को टांगिया एवं इन्हें टांगिया मजदूर कहते हैं। लाखों पौधे रोपवाने के बाद जब 1987 में वाइल्ड लाइफ एक्ट लागू हुआ तो इस सिस्टम खत्म कर दिया गया। लेकिन तब तक दोगुने हो चुके टांगिया मजदूूरों के परिवार को तब के अधिकारियों ने बिना लिखा-पढ़ी के रहने की अनुमति दे दी और अफसरों को सूचना भेज दी कि खीरी जंगल में कोई भी जंगल में बाहरी लोग नही रहते हैं। बाद में यही परिवार जंगल के अतिक्रमणकारी बन गए। भीरा रेंज के पल्हनापुर गांव से नजदीक एवं गोला में जमैय्यतपुर के नजदीक करीब 150 परिवार रह रहे हैं। भीरा में इन पर जंगल से बाहर जाने के लिए रास्ता बनाने पर भी केस दर्ज हो चुका है, इसके अलावा पहले से आवंटित भूमि पर तालाब खोदने को लेकर 2004 में विवाद में मुकदमा दर्ज हो चुका है, जिसकी लड़ाई ये लोग हाईकोर्ट तक लड़ चुके हैं।
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