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Lakhimpur Kheri News: घाघरा नदी की कटान से उजड़े परिवार पर फिर संकट के बादल
Sun, 01 Mar 2026 12:18 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 01 Mar 2026 12:18 AM IST
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हसनपुर कटौली में विवादित स्थल पर बने कटान पीड़ितों के घर। संवाद
धौरहरा। वर्ष 2000 में घाघरा नदी की कटान से उजड़कर हसनपुर कटौली में बसे करीब 15 परिवारों पर एक बार फिर बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है। अदालत के आदेश के बाद ब्रजेश सिंह के मकान को गिराने की कार्रवाई तय होने से पूरे गांव में चिंता का माहौल है।
ईसानगर क्षेत्र के मकसूदपुर मजरा सधुवापुर से विस्थापित होकर यहां बसे परिवारों में ब्रजेश सिंह, बेचेलाल, खड़ेपाल, श्रीपाल, लाला गुप्ता, सुरेश गुप्ता, पंकज शुक्ल, बब्लू शुक्ल, श्यामलाल, बच्चू, नीरज उर्फ बराती, छेदालाल शुक्ला, ज्ञानपाल सिंह, विक्रांत सिंह और दीपक सिंह शामिल हैं। इन परिवारों के करीब 100 सदस्य पिछले दो दशक से अधिक समय से यहीं रह रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने जमीन राजा अभिनाश सिंह से खरीदी थी, लेकिन रजिस्ट्री नहीं हो सकी। वर्ष 2015 में जमीन शिवशंकर सेठ के नाम बैनामा होने के बाद मुकदमा दायर हुआ। लंबी सुनवाई के बाद 22 जनवरी, 2026 को अदालत ने ब्रजेश सिंह के मकान को गिराने का आदेश दे दिया। जिस परिवार का घर गिराया जाना है, उसमें पत्नी सहित चार बेटियां और एक बेटा है। ग्रामीणों का कहना है कि परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है और कार्रवाई होने पर खुले आसमान के नीचे आ जाएगा।
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कोर्ट के आदेश पर पुलिस-प्रशासन की टीम बुलडोजर के साथ पहुंची, लेकिन महिलाओं, बच्चों और किसान यूनियन के विरोध के चलते टीम को लौटना पड़ा। प्रशासन ने जमीन खाली करने की चेतावनी दी है।
कटान पीड़ित बोले— बसने को खरीदी थी जमीन
ग्रामीणों के अनुसार जिस जमीन पर वे वर्ष 2000 से रह रहे हैं, वह पहले जगदंबा पुत्र राजनारायण के नाम दर्ज थी। वर्ष 2011 में वसीयत के आधार पर यह जमीन राजा अभिनाश सिंह और इरा सिंह के नाम दर्ज हो गई। उनका दावा है कि उन्होंने राजा अभिनाश सिंह से जमीन खरीदी थी, लेकिन रजिस्ट्री नहीं हो सकी। बाद में शेष जमीन शिवशंकर सेठ को बेच दी गई और 12 अगस्त 2015 को बैनामा कर दिया गया। आरोप है कि बैनामे में चौहद्दी गलत दर्ज कराई गई। इसके बाद 2015 में ही मुकदमा दायर हुआ, जिसकी सुनवाई के बाद अब ध्वस्तीकरण का आदेश जारी हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की पुनः जांच और मानवीय आधार पर राहत देने की मांग की है।
-- -- -- -- -- -- -- मैंने जो जमीन खरीदी थी, उस पर अवैध कब्जा है। सिविल कोर्ट और हाईकोर्ट से आदेश मेरे पक्ष में है। प्रशासन जब कब्जा दिलाने जाता है, तो लोग मारपीट पर अमादा हो जाते हैं। मुझे कोर्ट और प्रशासन पर पूरा भरोसा है, मुझे न्याय मिलेगा।
-विकास सेठ पुत्र शिवशंकर सेठ, लखीमपुर
वर्जन-
न्यायालय के आदेश पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होनी है, विरोध और फिर निवेदन के चलते कुछ समय दिया गया है। जल्द न्यायालय के आदेश का पालन कराया जाएगा।
-निर्मल तिवारी एसएसओ, ईसानगर
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ईसानगर क्षेत्र के मकसूदपुर मजरा सधुवापुर से विस्थापित होकर यहां बसे परिवारों में ब्रजेश सिंह, बेचेलाल, खड़ेपाल, श्रीपाल, लाला गुप्ता, सुरेश गुप्ता, पंकज शुक्ल, बब्लू शुक्ल, श्यामलाल, बच्चू, नीरज उर्फ बराती, छेदालाल शुक्ला, ज्ञानपाल सिंह, विक्रांत सिंह और दीपक सिंह शामिल हैं। इन परिवारों के करीब 100 सदस्य पिछले दो दशक से अधिक समय से यहीं रह रहे हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने जमीन राजा अभिनाश सिंह से खरीदी थी, लेकिन रजिस्ट्री नहीं हो सकी। वर्ष 2015 में जमीन शिवशंकर सेठ के नाम बैनामा होने के बाद मुकदमा दायर हुआ। लंबी सुनवाई के बाद 22 जनवरी, 2026 को अदालत ने ब्रजेश सिंह के मकान को गिराने का आदेश दे दिया। जिस परिवार का घर गिराया जाना है, उसमें पत्नी सहित चार बेटियां और एक बेटा है। ग्रामीणों का कहना है कि परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है और कार्रवाई होने पर खुले आसमान के नीचे आ जाएगा।
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कोर्ट के आदेश पर पुलिस-प्रशासन की टीम बुलडोजर के साथ पहुंची, लेकिन महिलाओं, बच्चों और किसान यूनियन के विरोध के चलते टीम को लौटना पड़ा। प्रशासन ने जमीन खाली करने की चेतावनी दी है।
कटान पीड़ित बोले— बसने को खरीदी थी जमीन
ग्रामीणों के अनुसार जिस जमीन पर वे वर्ष 2000 से रह रहे हैं, वह पहले जगदंबा पुत्र राजनारायण के नाम दर्ज थी। वर्ष 2011 में वसीयत के आधार पर यह जमीन राजा अभिनाश सिंह और इरा सिंह के नाम दर्ज हो गई। उनका दावा है कि उन्होंने राजा अभिनाश सिंह से जमीन खरीदी थी, लेकिन रजिस्ट्री नहीं हो सकी। बाद में शेष जमीन शिवशंकर सेठ को बेच दी गई और 12 अगस्त 2015 को बैनामा कर दिया गया। आरोप है कि बैनामे में चौहद्दी गलत दर्ज कराई गई। इसके बाद 2015 में ही मुकदमा दायर हुआ, जिसकी सुनवाई के बाद अब ध्वस्तीकरण का आदेश जारी हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की पुनः जांच और मानवीय आधार पर राहत देने की मांग की है।
-विकास सेठ पुत्र शिवशंकर सेठ, लखीमपुर
वर्जन-
न्यायालय के आदेश पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होनी है, विरोध और फिर निवेदन के चलते कुछ समय दिया गया है। जल्द न्यायालय के आदेश का पालन कराया जाएगा।
-निर्मल तिवारी एसएसओ, ईसानगर