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नाम में ही नहीं काम में भी हमेशा आगे रहा आगा परिवार

Sun, 14 Nov 2021 12:30 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 14 Nov 2021 12:30 AM IST
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Civic Amenities
लखीमपुर खीरी में सरस्वती भवन, आगा साहब की कोठी। - फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। शहर में कुछ ऐसे पुराने परिवार हैं जिनका शहर के विकास में अहम योगदान रहा है। इनमें से आगा साहब के परिवार की प्रतिष्ठा दूर-दूर तक है। इस परिवार की चार पीढ़ियां समाज सेवा में लगी रही हैं। एक तरफ जिले के शैक्षिक विकास में अपना योगदान दिया तो शहर को सजाने संवारने में बड़ी भूमिका निभाई है।
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शहर के मोहल्ला महराजनगर में स्थित आगा साहब की कोठी की चमक आज भी बरकरार है। आजादी के पहले लखीमपुर नगर पालिका के अध्यक्ष रहे राय बहादुर सरस्वती प्रसाद सक्सेना क्षेत्र के जाने माने अधिवक्ता थे। सरकार ने उन्हें गवर्नमेंट प्लीडर नियुक्त किया था। उन्होंने काफी लंबे अरसे तक इस पद पर रहकर अपनी सेवाएं दीं। वह जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष भी रहे। विलोबी मेमोरियल हाल की स्थापना में भी उनका बड़ा योगदान रहा।
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राय बहादुर सरस्वती प्रसाद सक्सेना के पुत्र लक्ष्मी नरायन सक्सेना ने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया। बहुमुखी प्रतिभा के धनी लक्ष्मी नरायन सक्सेना आगा साहब के नाम से प्रसिद्ध हुए। आजादी के बाद वर्ष 1951 में हुए नगर पालिका के चुनाव में वह पहली बार नगर पालिका अध्यक्ष चुने गए। इसके बाद वह अपने जीवन काल में पांच बार नगर पालिका अध्यक्ष बने। नगर पालिका अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने जिस गुणवत्ता के साथ हीरालाल धर्मशाला चौराहे से हमदर्द दवाखाना चौराहे तक मेन रोड का निर्माण कराया, उसकी तारीफ आज तक होती है। करीब 70 साल पहले बनी यह सड़क आज भी मजबूती से टिकी हुई है। आगा साहब अपने समय के सबसे प्रतिष्ठित और काबिल क्रिमनल लॉयर माने जाते थे। वह वाईडी कॉलेज प्रबंध समिति के आजीवन सचिव रहे। इसके अलावा सिंगाही स्टेट के तीनों कॉलेजों के प्रबंधक भी रहे। उनका निधन 21 मई 1988 को हुआ।
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लक्ष्मी नरायन आगा के पुत्र वीरेंद्र कुमार सक्सेना भी अपने समय के जाने माने अधिवक्ता थे। राजनीति से दूर रहकर वीरेंद्र कुमार सक्सेना उर्फ बीरू बाबू लंबे अरसे तक डीजीसी क्रिमिनल रहे। युवराज दत्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय प्रबंध समिति के सदस्य और सिंगाही स्टेट के तीनों कॉलेजों के प्रबंधक रहते हुए शैक्षिक विकास में योगदान दिया। आगा परिवार की मौजूदा पीढ़ी में डॉ. अजय कुमार आगा भी कई सामाजिक संगठनों से जुड़कर समाज सेवा का कार्य कर रहे हैं। पेशे से शिक्षक डॉ. अजय कुमार आगा युवराजदत्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय में जंतु विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष हैं। वह पं. दीनदयाल उपाध्याय सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज (यूपी बोर्ड) के कोषाध्यक्ष और इसी कॉलेज के सीबीएसई से संबद्ध कॉलेज में शिक्षाविद के रूप में कार्यकारिणी सदस्य हैं। डॉ. आगा रोटरी इंटरनेशनल के गवर्नर और विलोबी स्मारक ट्रस्ट के सचिव हैं।
बेमिसाल है आगा साहब की कोठी सरस्वती भवन की शान
आगा परिवार का पुश्तैनी घर आगा साहब की कोठी के नाम से विख्यात है। इसका निर्माण राय बहादुर सरस्वती प्रसाद सक्सेना ने कराया था। दो मंजिला इस भवन का असल नाम सरस्वती भवन है। दीवारों और स्तंभों की खूबसूरती, कमरों में लगे कीमती झाड़ फानूस, वुड वर्क सब कुछ बेहद शानदार है। इस भवन में 40 बड़े-बड़े कमरे हैं। जिनमें रखा फर्नीचर भी बेहद कलात्मक है। भवन के सामने सुंदर पौधों से सजा लॉन है। भवन की शुरुआत पोर्टिको से होती है। बड़े-बड़े कमरों वाले इस भव्य भवन में जान बची लाखों पाए फिल्म की शूटिंग भी हो चुकी है।

रायबहादुर सरस्वती प्रसाद सिंह की चौथी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने वाले परिवार के उत्तराधिकारी डॉ. अजय कुमार आगा ने बताया कि उनके परदादा सरस्वती प्रसाद सिंह से लेकर पिता वीरेंद्र कुमार सक्सेना तक जिले के जाने माने अधिवक्ता रहे हैं। उनके परिवार की दो पीढ़ियों ने नगर पालिका अध्यक्ष के रूप में शहर को सजाया संवारा। पिता ने सामाजिक कार्यों और शैक्षणिक संस्थाओं में रहकर शैक्षिक विकास के प्रयास किए हैं। उनका कहना है कि हमारा परिवार कभी राजनीतिक नहीं रहा। नगर पालिका चुनाव भी व्यक्तिगत रूप से जीते।
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