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फसल अवशेष जलाए तो सुविधाओं का लाभ नहीं
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जनपद स्तरीय फसल अवशेष प्रबंधन जागरूकता गोष्ठी का डीएम-एसपी की अध्यक्षता में हुआ कार्यक्रम। संवा
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। प्रमोशन आफ एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन फॉर इन सीटू मैनेजमेंट आफ क्रॉप रेजिड्यू योजना के तहत जनपद स्तरीय फसल अवशेष प्रबंधन जागरूकता गोष्ठी हुई, जिसमें किसानों को फसल अवशेष न जलाने एवं उनका प्रबंधन करने के बारे में जानकारी दी गई।
डीएम डॉ अरविंद कुमार चौरसिया ने कहा कि यदि कोई किसान फसल अवशेष जलाता है, तो उसे सरकार की जनकल्याणकारी सुविधाओं व योजनाओं से वंचित रखा जाएगा। उन्होंने किसानो से अपील करते हुए बताया कि पराली जलाने पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण एवं सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुपालन में कानूनी कार्रवाई की विधिक बाध्यता होगी। कार्यक्रम में पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए किसानों को फसल अवशेष को जलाने से होने वाले दुष्प्रभाव को बताने वाले वीडियो दिखाए गए। उपनिदेशक कृषि डॉ योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि फसल अवशेषों से कम्पोस्ट या वर्मी कम्पोस्ट खाद बना कर प्रयोग करने से खेत की उर्वरता में वृद्धि होती है। फसल अवशेषों के जलाने से किसानों की नजदीकी फसलों में और आबादी में आग लगने की आशंका बनी रहती है। वायु प्रदूषण से अनेक बीमारियां तथा धुंध के कारण घटनाएं हो सकती है। कृषि वैज्ञानिक डॉ विसेन, डॉ सोहेल, डॉ विश्वकर्मा ने किसानों को फसल अवशेष सड़ाने के लिए विकसित की गई डिकंपोजर तकनीक अपनाने सलाह दी।
कार्यक्रम में सहायक आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता सूर्य नारायण मिश्र, जिला कृषि अधिकारी अरविंद कुमार चौधरी, जिला कृषि रक्षा अधिकारी सत्येंद्र सिंह, भूमि संरक्षण अधिकारी जिला योजना एवं गोमती सहित थानाध्यक्ष व उनके प्रतिनिधि मौजूद रहे। संवाद
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डीएम डॉ अरविंद कुमार चौरसिया ने कहा कि यदि कोई किसान फसल अवशेष जलाता है, तो उसे सरकार की जनकल्याणकारी सुविधाओं व योजनाओं से वंचित रखा जाएगा। उन्होंने किसानो से अपील करते हुए बताया कि पराली जलाने पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण एवं सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुपालन में कानूनी कार्रवाई की विधिक बाध्यता होगी। कार्यक्रम में पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए किसानों को फसल अवशेष को जलाने से होने वाले दुष्प्रभाव को बताने वाले वीडियो दिखाए गए। उपनिदेशक कृषि डॉ योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि फसल अवशेषों से कम्पोस्ट या वर्मी कम्पोस्ट खाद बना कर प्रयोग करने से खेत की उर्वरता में वृद्धि होती है। फसल अवशेषों के जलाने से किसानों की नजदीकी फसलों में और आबादी में आग लगने की आशंका बनी रहती है। वायु प्रदूषण से अनेक बीमारियां तथा धुंध के कारण घटनाएं हो सकती है। कृषि वैज्ञानिक डॉ विसेन, डॉ सोहेल, डॉ विश्वकर्मा ने किसानों को फसल अवशेष सड़ाने के लिए विकसित की गई डिकंपोजर तकनीक अपनाने सलाह दी।
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कार्यक्रम में सहायक आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता सूर्य नारायण मिश्र, जिला कृषि अधिकारी अरविंद कुमार चौधरी, जिला कृषि रक्षा अधिकारी सत्येंद्र सिंह, भूमि संरक्षण अधिकारी जिला योजना एवं गोमती सहित थानाध्यक्ष व उनके प्रतिनिधि मौजूद रहे। संवाद
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