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ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर सिस्टम की नजर नहीं

Wed, 04 Nov 2020 12:29 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 04 Nov 2020 12:29 AM IST
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Civic Amenities
यातायात माह का बना मजाक, मैजिक में लटक कर जाती सवारियां। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। एक नवंबर से यातायात माह मनाया जा रहा है, जिसमें लोगों को ट्रैफिक नियम का पालन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, तो वहीं दूसरी ओर सड़कों पर ट्रैफिक रूल की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ट्रैफिक पुलिस समेत पूरा सिस्टम इससे बेखबर बना हुआ है। शहर के अंदर राजापुर रोड पर टैक्सियों/ मैजिक संचालक ज्यादा कमाई के चक्कर में सवारियां को लटकाकर हादसों को आमंत्रण दे रहे हैं, तो वहीं सवारियों की जान पर आफत बनी है।
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यातायात सप्ताह/ माह के नाम पर सरकार हर साल लाखों रुपये खर्च करती है। कभी परिवहन विभाग तो कभी पुलिस विभाग द्वारा यातायात नियमों का पालन कराने के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है, जिसके लिए जगह-जगह कार्यक्रम कराए जाते हैं। पुलिस विभाग ने एक नवंबर 2020 से यातायात माह की शुरुआत करते हुए पुलिस लाइंस से जागरूकता रैली भी निकाली थी। कुछ दिन बाद अभियान खत्म हो जाएगा, जिसके बाद फिर से ढाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ होगी। दुर्घटनाओं के पीछे अक्सर लापरवाही और ट्रैफिक रूल का पालन न करने की प्रमुख वजहें होती हैं। सड़क दुर्घटनाओं में शिकार होने परिवार तबाह हो रहे हैं। जनपद में सबसे ज्यादा मौतें सड़क दुर्घटनाओं में होती है। इसके बावजूद जानलेवा दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। ट्रैफिक रूल को तोड़कर लोग बेधड़क सिस्टम को ठेंगा दिखा रहे हैं। ट्रैक्टर में दो ट्रालियां जोड़कर चलाया जा रहा है, तो वहीं तेज रफ्तार से फर्राटा भरते वाहन चालक दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ा रहे हैं। सड़क-चौराहों पर लोग यातायात के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, जिनके खिलाफ कोई कार्रवाई तो दूर उन्हें अभयदान मिल रहा है।
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सेफ ड्राइविंग से कम होंगी दुर्घटनाएं
सेफ ड्राइविंग को लेकर कड़े कदम उठाए जाने की जरूरत है, लेकिन अब तक चौराहों पर या प्रमुख मार्गों पर फटाफट अंदाज में अभियान चलाकर वाहनों के चालान कर दिए जाते हैं। इससे राजस्व वसूली तो हो रही है, लेकिन दुर्घटनाओं में कमी नहीं आ रही है। सड़क पर ट्रिपल राइडिंग कर फर्राटे भरते लोग दिखते हैं। वहीं ई-रिक्शा और ऑटो चालक भी ट्रैफिक नियमों की शहर में ही धज्जियां उड़ाते हैं और लोगों की जिंदगियां भी खतरे में डाल रहे हैं। कई बाइक चालक भी खतरनाक तरीके से ओवरटेक करके स्वयं और दूसरों के लिए खतरा पैदा कर देते हैं, जिससे कई बार ऐसे हादसों में लोगों की जान चली जाती है। एआरटीओ प्रशासन बीके सिंह के मुताबिक वाहन चालकों को सेफ ड्राइविंग के बारे में जागरूक होना पड़ेगा। सड़क पर ड्राइविंग के दौरान जरूरी बातों का हर समय ध्यान रखना जरूरी होता है, क्योंकि कई बार अचानक खतरा सामने महसूस होता है। ऐसे में तुरंत ही हादसे का शिकार बनने से पहले उपाय करना होता है।
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गति पर नहीं लगा पा रहे नियंत्रण
सड़क हादसों के पीछे वाहन की गति का रोल सबसे अहम माना जाता है। ज्यादा तेज रफ्तार में वाहन चलाने वालों को बेहद सावधान होना पड़ेगा। जानकार बताते हैं कि पशुओं के सड़क पर अचानक आने से कई बार भीषण हादसे हो जाते हैं। वहीं ओवरटेक करने के दौरान लोग गति कम नहीं करते और सामने से आ रहे वाहन की गति का अनुमान नहीं करने से भी हादसे की संभावना बढ़ जाती है। केंद्र सरकार वाहनों की गति को नियंत्रित करने और आदेश का अनुपालन कराने के आदेश जारी कर चुकी है, जिसके बाद यहां भी एआरटीओ प्रशासन ने सभी वाहन चालकों को स्पीड के बारे में एडवाइजरी जारी की थी। अब तक इसका अनुपालन नहीं कराया जा रहा है।

नियमों का पालन करना आवश्यक
वाहन चालकों को यातायात के नियमों का पालन हर हाल में करना चाहिए। इससे स्वयं के साथ ही दूसरे को दुर्घटना से बचा सकेंगे। वाहनों की गति को नियंत्रण की सीमा से अधिक नहीं होना चाहिए। अवैध तरीके से दो ट्रालियॉ जोड़कर चलने वाले चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-बीके सिंह, एआरटीओ, प्रशासन
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पांच वर्षों के दौरान हुए हादसे
वर्ष मृतक घायल
2015 291 158
2016 328 219
2017 364 242
2018 358 265
2019 347 291
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