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समितियों पर खाद का वितरण नहीं, किसान मायूस
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मोहम्मदी की साधन सहकारी समिति गुलौली जहां चार वर्षों से नहीं हो रहा खाद का वितरण। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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मोहम्मदी। क्षेत्र की समितियों पर कई सालों से खाद का वितरण नहीं हो रहा है। इससे किसान परेशान हैं और प्राइवेट दुकानों पर महंगी खाद खरीदने के लिए मजबूूर हैं।
क्षेत्र की गुलौली साधन समिति पर चार वर्षों से अधिक समय से किसानों को खाद नसीब नहीं हुई है। अतिरिक्त चार्ज पर नियुक्त हुए समिति सचिव लियाकत अली ने बताया कि पूर्व सचिवों की लापरवाही के कारण किसानों को खाद नहीं मिली है। इस समिति पर पहले खाद का लाइसेंस रिन्यूवल नहीं था। आज भी जीएसटी नंबर नहीं है। इस वजह से समिति पर खाद उपलब्ध नहीं हो रही है। समिति में लगभग 12 सौ किसान पंजीकृत हैं, जो खाद से वंचित रह कर प्राइवेट दुकानों पर महंगे दामों पर खाद खरीद रहे हैं। प्रशासक सुनील सिंह ने बताया कि किसानों को शीघ्र खाद उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। यही हाल गन्ना सहकारी समिति दिलावरपुर का भी है, जहां एक वर्ष से अधिक समय से खाद नहीं आई है। यहां तो खाद वितरण का कोई चार्ज तक लेने को तैयार नहीं है। चार्ज संभाले सचिव गजेंद्र कटियार का कहना है कि गन्ना समिति के घोटाले की जांच सीतापुर समिति कर रही है। जांच पूरी होने पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित हो जायेगी।
किसानों ने कहा...
अद्वैत सिंह ने कहा कि जांच के नाम पर खाना पूर्ति हो रही है। किसान परेशान होकर महंगी खाद खरीद रहा है। प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी मौन है।
विमल सिंह ने बताया कि समिति भ्रष्टाचार में डूबी है। कोई सुनने वाला नहीं है। समिति पर उधार खाद मिल जाती थी, जिसका भुगतान चीनी मिल चलने पर किसान के खाते से कट जाता था।
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क्षेत्र की गुलौली साधन समिति पर चार वर्षों से अधिक समय से किसानों को खाद नसीब नहीं हुई है। अतिरिक्त चार्ज पर नियुक्त हुए समिति सचिव लियाकत अली ने बताया कि पूर्व सचिवों की लापरवाही के कारण किसानों को खाद नहीं मिली है। इस समिति पर पहले खाद का लाइसेंस रिन्यूवल नहीं था। आज भी जीएसटी नंबर नहीं है। इस वजह से समिति पर खाद उपलब्ध नहीं हो रही है। समिति में लगभग 12 सौ किसान पंजीकृत हैं, जो खाद से वंचित रह कर प्राइवेट दुकानों पर महंगे दामों पर खाद खरीद रहे हैं। प्रशासक सुनील सिंह ने बताया कि किसानों को शीघ्र खाद उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। यही हाल गन्ना सहकारी समिति दिलावरपुर का भी है, जहां एक वर्ष से अधिक समय से खाद नहीं आई है। यहां तो खाद वितरण का कोई चार्ज तक लेने को तैयार नहीं है। चार्ज संभाले सचिव गजेंद्र कटियार का कहना है कि गन्ना समिति के घोटाले की जांच सीतापुर समिति कर रही है। जांच पूरी होने पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित हो जायेगी।
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किसानों ने कहा...
अद्वैत सिंह ने कहा कि जांच के नाम पर खाना पूर्ति हो रही है। किसान परेशान होकर महंगी खाद खरीद रहा है। प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी मौन है।
विमल सिंह ने बताया कि समिति भ्रष्टाचार में डूबी है। कोई सुनने वाला नहीं है। समिति पर उधार खाद मिल जाती थी, जिसका भुगतान चीनी मिल चलने पर किसान के खाते से कट जाता था।
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