{"_id":"5f3928368ebc3e3ca603ff2e","slug":"civic-amenities-lakhimpur-news-bly416336041","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपने ही हाथों उजाड़े आशियाने, पांच घर और नदी में समाए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अपने ही हाथों उजाड़े आशियाने, पांच घर और नदी में समाए
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखीमपुर खीरी। जीवनदायिनी शारदा और घाघरा नदियां बारिश सीजन में गांजर क्षेत्र कहे जाने वाले पलिया, निघासन, धौरहरा और लखीमपुर तहसील क्षेत्रों के लिए अभिशाप बन जाती है। बारिश के दौरान इन नदियों का उग्र रूप हो जाता है और देखते ही देखते सैकड़ों एकड़ लहलहाती फसलों सहित किसानों की जमीनों के साथ उनके घर भी बहा ले जाती हैं। कुछ लोग कटान को देख अपने हाथों से ही आशियाने उजाड़कर पलायन करने को विवश हो जाते हैं। ऐसा ही दृश्य धौरहरा क्षेत्र के रैनी गांव में देखने को मिला, जहां पांच घर नदी में कटकर समा गए हैं। अब तक 29 घर नदी में समा चुके हैं। गांव चारों ओर बाढ़ के पानी से घिरा होने के कारण आवागमन के सभी रास्ते बंद है, सिर्फ नाव के सहारे ही मदद पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
धौरहरा। शारदा नदी का पानी रैनी, समदहा, सरगड़ा, हरदी महराजनगर, भौव्वापुर सहित दर्जनों गांवों में पानी भरा हुआ है, जबकि रैनी गांव में जलस्तर घटने के साथ ही कटान तेजी से हो रहा है। बीते 24 घंटे में नदी में ज्ञाना देवी, दिनेश कुमार, उमाशंकर, लक्ष्मी नारायण वर्मा और हरिकिशन के घर नदी में समा गए हैं। अब तक इस गांव में कुल 29 घर नदी में बह चुके हैं, जबकि करीब 40 घर नदी की जद में आ गए हैं। अपने घरों की तरफ बढ़ती शारदा नदी को देखकर लोग अपने हाथों से ही अपने आशियाने उजाड़ रहे हैं। शारदा नदी का कटान ऐसे ही चलता रहा, तो जल्द ही पूरा रैनी गांव नदी में समा जाएगा। बाढ़ खंड विभाग ने अब तक यहां कोई बचाव कार्य शुरू नहीं किया है, जबकि गांव को पहुंचने वाले सभी संपर्क मार्ग कट चुके हैं। तहसील प्रशासन मूकदर्शक बना गांव को नदी में समाते देख रहा है। एसडीएम एस सुधाकरन ने बताया कि पांच घर नदी में समा जाने की सूचना मिली है। पीड़ितों को शासन से स्वीकृत गृह अनुदान दिया जाएगा। नदी का बहाव तेज होने से बचाव कार्य नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा क्षेत्र की प्रमुख घाघरा नदी ने ईसानगर क्षेत्र के बंशीबेली, बनटुकरा, संतरामपुरवा, कैरातीपुरवा, चकदहा, जंगल मटेरा, मिलिक गौढ़ी, ओझापुरवा सहित दर्जनों गांवों में तबाही मचा रखी है। नदी का पानी लोगों के घरों में भर गया है, जिससे दर्जनों कच्चे मकान पानी में बह गए हैं। वहीं इस नदी ने रमियाबेहड़ के बगहा, गोडियनपुरवा और गुलरिया तालुके अमेरिकी की करीब 300 बीघा लहलहाती फसलों सहित जमीन नदी में समा चुकी है।
एसडीएम मोटरबोट से पहुंचे बाढ़ प्रभावित गांव
एसडीएम एस सुधाकरन मोटरबोट से तहसीलदार अनिल यादव और राजस्व टीम के साथ ईसानगर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव बंशीबेली, बनटुकरा, संतरामपुरवा कैरातीपुरवा, चकदहा, मिलिक गौढ़ी और ओझापुरवा पहुंचे। उन्होंने लोगों से उनका हाल जाना, साथ ही 500 परिवारों को राहत किट दी। स्वास्थ्य टीम ने 450 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। एसडीएम ने बताया कि बाढग़्रस्त इलाके का दौरा करके 500 परिवारों को राशन किट बंटवाई हैं। बाढ़ चौकी हसनपुर कटौली में बाढ़ प्रभावित लोगों को और राहत किट बांटने के लिए राजस्व टीम काम कर रही है।
विज्ञापन
तटबंध के अंदर बसे गांवों से ग्रामीणों ने शुरू किया पलायन
सुंदरवल फूलबेहड़ क्षेत्र में शारदा नदी का जलस्तर थोड़ा कम तो हुआ है, लेकिन तटबंध के अंदर बसे गांवों में पानी अभी भी भरा है। नाव के सहारे ही ग्रामीणों का आवागमन हो पा रहा है। बाढ़ प्रभावित गांवों में एंबुलेंस या कोई अन्य साधन नहीं पहुंचने से बीमार व्यक्तियों को घंटों का सफर नाव से करना पड़ रहा है। रविवार को मेहंदी गांव के बफाउल्ला को इलाज के लिए लखीमपुर ले जाना था, जिसे तीन किलोमीटर का सफर नाव से कर खमरिया तक पहुंचाया गया। इसके बाद वाहन से अस्पताल ले जा सके। ऐसे ही खगईपुरवा, रंडउहा, बाबापुरवा, लंगड़ीपुर जैसे निचले हिस्से में बसे गांवों के लोग तटबंध पर अपना बसेरा बनाए हुए हैं। ईट के चूल्हे पर खाना बनाना, त्रिपाल के नीचे रहना, रुखा-सूखा खाना खाकर लोग जीवन बसर कर रहे हैं। तटबंध पर यदि किसी अधिकारी का वाहन रुक जाए, तो इन मजबूरों को लगता है कि कोई उनकी मदद को आया है। लेकिन अभी तक इन बाढ़ प्रभावित परिवारों को कुछ खास मदद नहीं मिल सकी है।
रपटा पुल भी बाढ़ की चपेट में आया
फूलबेहड़ क्षेत्र में शारदा नदी का कहर लगातार जारी है। आपदा से लोग कराह रहे हैं। वहीं खमरिया से मेहंदी मार्ग पर तटबंध के किनारे बने रपटा पुल के पास पानी की तेज धार से पुल के करीब जमीन के अंदर से मिट्टी का कटान हो रहा है। शनिवार सुबह अचानक पुल के पास की मिट्टी कट गई। गनीमत रही कि कोई राहगीर निकल नहीं रहा था, वरना हादसा हो सकता था। खमरिया से मेहंदी, बहालीपुरवा आदि गांव का सीधा रास्ता है। इस समय बाढ़ होने से लोग तीन किलोमीटर का रास्ता सिर्फ नाव से ही तय करते हैं।
बाढ़ प्रभावित गांवों में तहसील प्रशासन द्वारा राहत सामग्री बांटी जा रही है। रैनी गांव में घरों के कटान की सूचना मिली है। पीड़ितों तक हरसंभव मदद पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। एक प्लाटून फ्लड पीएसी बाढ़-राहत कार्यों में लगी है।
- अरुण कुमार सिंह, एडीएम
विज्ञापन
धौरहरा। शारदा नदी का पानी रैनी, समदहा, सरगड़ा, हरदी महराजनगर, भौव्वापुर सहित दर्जनों गांवों में पानी भरा हुआ है, जबकि रैनी गांव में जलस्तर घटने के साथ ही कटान तेजी से हो रहा है। बीते 24 घंटे में नदी में ज्ञाना देवी, दिनेश कुमार, उमाशंकर, लक्ष्मी नारायण वर्मा और हरिकिशन के घर नदी में समा गए हैं। अब तक इस गांव में कुल 29 घर नदी में बह चुके हैं, जबकि करीब 40 घर नदी की जद में आ गए हैं। अपने घरों की तरफ बढ़ती शारदा नदी को देखकर लोग अपने हाथों से ही अपने आशियाने उजाड़ रहे हैं। शारदा नदी का कटान ऐसे ही चलता रहा, तो जल्द ही पूरा रैनी गांव नदी में समा जाएगा। बाढ़ खंड विभाग ने अब तक यहां कोई बचाव कार्य शुरू नहीं किया है, जबकि गांव को पहुंचने वाले सभी संपर्क मार्ग कट चुके हैं। तहसील प्रशासन मूकदर्शक बना गांव को नदी में समाते देख रहा है। एसडीएम एस सुधाकरन ने बताया कि पांच घर नदी में समा जाने की सूचना मिली है। पीड़ितों को शासन से स्वीकृत गृह अनुदान दिया जाएगा। नदी का बहाव तेज होने से बचाव कार्य नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा क्षेत्र की प्रमुख घाघरा नदी ने ईसानगर क्षेत्र के बंशीबेली, बनटुकरा, संतरामपुरवा, कैरातीपुरवा, चकदहा, जंगल मटेरा, मिलिक गौढ़ी, ओझापुरवा सहित दर्जनों गांवों में तबाही मचा रखी है। नदी का पानी लोगों के घरों में भर गया है, जिससे दर्जनों कच्चे मकान पानी में बह गए हैं। वहीं इस नदी ने रमियाबेहड़ के बगहा, गोडियनपुरवा और गुलरिया तालुके अमेरिकी की करीब 300 बीघा लहलहाती फसलों सहित जमीन नदी में समा चुकी है।
विज्ञापन
एसडीएम मोटरबोट से पहुंचे बाढ़ प्रभावित गांव
एसडीएम एस सुधाकरन मोटरबोट से तहसीलदार अनिल यादव और राजस्व टीम के साथ ईसानगर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव बंशीबेली, बनटुकरा, संतरामपुरवा कैरातीपुरवा, चकदहा, मिलिक गौढ़ी और ओझापुरवा पहुंचे। उन्होंने लोगों से उनका हाल जाना, साथ ही 500 परिवारों को राहत किट दी। स्वास्थ्य टीम ने 450 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। एसडीएम ने बताया कि बाढग़्रस्त इलाके का दौरा करके 500 परिवारों को राशन किट बंटवाई हैं। बाढ़ चौकी हसनपुर कटौली में बाढ़ प्रभावित लोगों को और राहत किट बांटने के लिए राजस्व टीम काम कर रही है।
विज्ञापन
तटबंध के अंदर बसे गांवों से ग्रामीणों ने शुरू किया पलायन
सुंदरवल फूलबेहड़ क्षेत्र में शारदा नदी का जलस्तर थोड़ा कम तो हुआ है, लेकिन तटबंध के अंदर बसे गांवों में पानी अभी भी भरा है। नाव के सहारे ही ग्रामीणों का आवागमन हो पा रहा है। बाढ़ प्रभावित गांवों में एंबुलेंस या कोई अन्य साधन नहीं पहुंचने से बीमार व्यक्तियों को घंटों का सफर नाव से करना पड़ रहा है। रविवार को मेहंदी गांव के बफाउल्ला को इलाज के लिए लखीमपुर ले जाना था, जिसे तीन किलोमीटर का सफर नाव से कर खमरिया तक पहुंचाया गया। इसके बाद वाहन से अस्पताल ले जा सके। ऐसे ही खगईपुरवा, रंडउहा, बाबापुरवा, लंगड़ीपुर जैसे निचले हिस्से में बसे गांवों के लोग तटबंध पर अपना बसेरा बनाए हुए हैं। ईट के चूल्हे पर खाना बनाना, त्रिपाल के नीचे रहना, रुखा-सूखा खाना खाकर लोग जीवन बसर कर रहे हैं। तटबंध पर यदि किसी अधिकारी का वाहन रुक जाए, तो इन मजबूरों को लगता है कि कोई उनकी मदद को आया है। लेकिन अभी तक इन बाढ़ प्रभावित परिवारों को कुछ खास मदद नहीं मिल सकी है।
रपटा पुल भी बाढ़ की चपेट में आया
फूलबेहड़ क्षेत्र में शारदा नदी का कहर लगातार जारी है। आपदा से लोग कराह रहे हैं। वहीं खमरिया से मेहंदी मार्ग पर तटबंध के किनारे बने रपटा पुल के पास पानी की तेज धार से पुल के करीब जमीन के अंदर से मिट्टी का कटान हो रहा है। शनिवार सुबह अचानक पुल के पास की मिट्टी कट गई। गनीमत रही कि कोई राहगीर निकल नहीं रहा था, वरना हादसा हो सकता था। खमरिया से मेहंदी, बहालीपुरवा आदि गांव का सीधा रास्ता है। इस समय बाढ़ होने से लोग तीन किलोमीटर का रास्ता सिर्फ नाव से ही तय करते हैं।
बाढ़ प्रभावित गांवों में तहसील प्रशासन द्वारा राहत सामग्री बांटी जा रही है। रैनी गांव में घरों के कटान की सूचना मिली है। पीड़ितों तक हरसंभव मदद पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। एक प्लाटून फ्लड पीएसी बाढ़-राहत कार्यों में लगी है।
- अरुण कुमार सिंह, एडीएम