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विश्व में अपनी रचनाओं का लोहा मनवा रहा धौरहरा का लाल
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धौरहरा (लखीमपुर खीरी)। मोहल्ला शुक्ला वार्ड निवासी वरिष्ठ साहित्यकार संजीव जायसवाल संजय की चित्र पुस्तक ‘वह हंस दिया’ का अब इंडोनेशिया भाषा में अनुवाद हुआ है। इस तरह उनकी पुस्तक का अब तक विश्व की 100 भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।
संजीव अनुसंधान अविकल्प एवं मानक संगठन रेलवे (आरडीएसओ) के निदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए, साहित्य में रुचि ने उन्हें बुलंदी पर पहुंचा दिया। रविवार को उनकी पुस्तक ‘वह हंस दिया’ का इंडोनेशिया भाषा में अनुवाद हुआ। अब तक इस पुस्तक का सौ भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। संजीव बताते हैं की उन्होंने यह पुस्तक तीन से चार वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए लिखी है। इसमें सिर्फ सकारात्मक बातें हैं। इस पुस्तक का जनजातियों और कबीलों द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं में भी अनुवाद हो रहा है। पुस्तक की उपयोगिता देखते हुए बिहार सरकार इसकी 75000 प्रतियां खरीद कर सभी स्कूलों में भेजी हैं। इससे पहले पर्यावरण पर आधारित उनके उपन्यास होगी ‘जीत हमारी’ को भारत सरकार 15 भाषाओं में प्रकाशित करा चुकी है। संजीव को दिसंबर 2019 में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने बाल साहित्य भारती सम्मान प्रदान किया था। इससे पहले उन्हें अमृत लाल नागर कथा सम्मान, सूर पुरस्कार और सोहन लाल द्विवेदी सम्मान प्रदान मिल चुका है। भारत सरकार का प्रतिष्ठित भारतेंदु हरिश्चंद्र सम्मान भी दो बार मिला हैै। लाकडाउन के दौरान भी वह सोशल मीडिया पर सक्रिय रहे। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में संजीव की अब तक 1050 कहानियां और 55 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
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संजीव अनुसंधान अविकल्प एवं मानक संगठन रेलवे (आरडीएसओ) के निदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए, साहित्य में रुचि ने उन्हें बुलंदी पर पहुंचा दिया। रविवार को उनकी पुस्तक ‘वह हंस दिया’ का इंडोनेशिया भाषा में अनुवाद हुआ। अब तक इस पुस्तक का सौ भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। संजीव बताते हैं की उन्होंने यह पुस्तक तीन से चार वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए लिखी है। इसमें सिर्फ सकारात्मक बातें हैं। इस पुस्तक का जनजातियों और कबीलों द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं में भी अनुवाद हो रहा है। पुस्तक की उपयोगिता देखते हुए बिहार सरकार इसकी 75000 प्रतियां खरीद कर सभी स्कूलों में भेजी हैं। इससे पहले पर्यावरण पर आधारित उनके उपन्यास होगी ‘जीत हमारी’ को भारत सरकार 15 भाषाओं में प्रकाशित करा चुकी है। संजीव को दिसंबर 2019 में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने बाल साहित्य भारती सम्मान प्रदान किया था। इससे पहले उन्हें अमृत लाल नागर कथा सम्मान, सूर पुरस्कार और सोहन लाल द्विवेदी सम्मान प्रदान मिल चुका है। भारत सरकार का प्रतिष्ठित भारतेंदु हरिश्चंद्र सम्मान भी दो बार मिला हैै। लाकडाउन के दौरान भी वह सोशल मीडिया पर सक्रिय रहे। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में संजीव की अब तक 1050 कहानियां और 55 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
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