फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   Civic Amenities

पशुओं के लिए वरदान साबित होगी नेपियर घास

Sun, 31 May 2020 11:15 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 31 May 2020 11:15 PM IST
विज्ञापन
Civic Amenities
गोला गोकर्णनाथ। पशुओं को हरे चारे की समस्या से राहत देने के लिए नगर की श्री धर्मादा समिति गोशाला में हाइब्रिड नेपियर ग्रास की बुआई की गई है। उप पशु चिकित्साधिकारी मोहम्मद फारूक ने चारा बोने और काटने की विधि बताते हुए कहा कि नेपियर घास गोशालाओं में रखे गए पशुओं को हरा चारा उपलब्ध कराने का बेहतर विकल्प है।
विज्ञापन

श्री धर्मादा समिति गोशाला में उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी मोहम्मद फारूक ने बताया कि हाइब्रिड नेपियर घास खेतों की मेड़ पर, बाग में या कम स्पेस में आसानी से बोई जा सकती है। इसकी पौध गन्ने की तरह बाट बनाकर एक से दो फुट की दूरी पर रोपी जाती है। जिसकी पहली कटाई 70 दिन पर करने के बाद डेढ़ माह के अंतराल पर नियमित कटाई कर सकते हैं। एक बार बोने पर नेपियर घास से पांच वर्षों तक पशुओं को हरा चारा उपलब्ध कराया जा सकता है। चारे की कटाई जड़ से छह इंच की ऊंचाई से करनी चाहिए। धर्मादा समिति गोशाला में दो बीघे भूखंड पर यह हरा चारा तैयार किया गया है। जो गौशाला के 76 गोवंश के लिए पर्याप्त है। उप पशु चिकित्साधिकारी ने पशु पालक श्यामसिंह कुशवाहा और गजराज को विधि समझाते हुए कहा कि गोशालाओं में यह घास उगाई जानी चाहिए। प्रयास किया जा रहा है कि अन्य गोशालाओं में इस तरह हरा चारा तैयार किया जाए।
विज्ञापन

इस मौके पर विजय शुक्ल रिंकू, मनोज सक्सेना, अरुण अवस्थी, श्याम राजपूत, अवधेश मिश्र, अविनाश गुप्त, रविंद्र कटियार, विजय मिश्र, धीरज बाजपेयी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस तरह तैयार होती है पौध
उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. फारूक ने बताया कि चारे की कटाई के बाद जब जड़ से निकले किल्लों को अन्य स्थान पर रोपित कर चारे के क्षेत्र को बढ़ाया जा सकता है।

चारे के लिए गोवंश को नहीं पड़ेगा भटकना
गुरुकुल पशु सेवा उप समिति अध्यक्ष मनोज सक्सेना का कहना है कि शासन के तमाम प्रयासों के बावजूद चारे के अभाव में गोवंश विचरण करते हुए पॉलिथीन, अन्य हानिकारक पदार्थ खाकर पेट भरता दिखता है। ऐसे में यदि नेपियर घास को अन्य गोशालाओं, पशुपालक खेतों, खाली पड़े भूखंडों पर उगाएं तो पशुओं को बेसहारा भटकना नहीं पड़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed