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एनपीआर को बुद्धिजीवी वर्ग ने देश हित में बताया
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लखीमपुर खीरी। राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को लेकर बुद्धिजीवी वर्ग का कहना है कि यह देश हित में है।
नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर में नाम शामिल कराने के लिए परिवार के मुखिया को अपनी पहचान तय करने के लिए आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन एवं वोटर आईडी कार्ड सहित 21 तरह की जानकारी देनी होंगी। जबकि 2010 के एनपीआर में 16 सूचनाएं मांगी गईं थीं। एनपीआर को लेकर भले ही कुछ लोगों में असमंजस बना हुआ हो मगर, इसको लेकर जो डेटाबेस तैयार किया जाएगा उसको लेकर बुद्धिजीवी वर्ग का कहना है कि इससे देश की आबादी के बारे में जानकारी हो जाएगी तो रोजगार आदि की स्थिति भी पता लग जाएगी। इससे सरकार को लोगों के लिए योजनाएं शुरू करने में काफी सुविधा मिलेगी।
एनपीआर का उद्देश्य
देश के हर नागरिक की पूरी पहचान के साथ उसके बारे में विभिन्न जानकारियों का डेटाबेस तैयार करना, क्योंकि केंद्र सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं में धोखाधड़ी रोकने और हर परिवार तक उसका लाभ पहुंचाने के लिए इसका इस्तेमाल करती है।
क्या है एनपीआर
नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों के तहत स्थानीय, उप जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है। एनपीआर में अपना नाम दर्ज करवाने के लिए नागरिकों को अपनी डिटेल्स देनी होंगी।
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यह ब्यौरा होगा दर्ज
व्यक्ति का नाम, परिवार के मुखिया के नाम, माता एवं पिता का नाम, पति एवं पत्नी का नाम, लिंग, जन्मतिथि, वैवाहिक स्थिति, जन्मस्थान, नागरिकता, वर्तमान पता, पते पर रहने की अवधि, स्थायी पता, व्यवसाय, शैक्षणिक स्थिति आदि।
लोगों का नजरिया
राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर देश में रहने वालों की गणना के लिए है। इससे देश की जनसंख्या और रोजगार की स्थिति की जानकारी हो जाएगी। इससे सरकार को जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू करने में आसानी रहेगी। कुछ लोगों में जो असमंजस की स्थिति है उसको लेकर सरकार लोगों को जागरूक करे, जिससे लोगों के मन की शंका दूर हो सके।
- मोहम्मद आसिफ
हर दस साल पर जनगणना होती आई है। वह इस बार भी हो रही है। जो एक प्रक्रिया है। इससे देश की आबादी और रोजगार की स्थिति की जानकारी हो सकेगी। जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
-बलविंदर सिंह, नई बस्ती
एनपीआर देश हित में हैं। इससे देश की आबादी के बारे में जानकारी होगी, जिससे सरकार को देशवासियों की खातिर जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू करने में सुविधा मिलेगी।
-मनीष गुप्ता, निवासी मेन रोड
एनपीआर जनसंख्या के आंकड़े इकठ्ठा करने के लिए है। इससे देश सामाजिक और आर्थिक स्थिति स्पष्ट होगी। इससे प्राप्त आंकड़ों के आधार पर देशवासियों के लिए जनकल्याणकारी योजनाएं बनाई जा सकेंगी।
-डॉ. सुभाष चंद्रा, चीफ प्रॉक्टर, युवराज दत्त महाविद्यालय
जनगणना तो हर दस साल पर होती आई है। वही इस बार भी हो रही है। ये बेहद जरूरी भी है, क्योंकि योजनाओं के लिए देश की जनसंख्या के बारे में जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। इसका विरोध करना उचित नहीं है।
-डॉ. जेएन सिंह, प्रोफेसर, युवराजदत्त महाविद्यालय
एनपीआर कोई नया नहीं है। जैसे पिछले वर्षों में हर दस साल पर जनगणना होती रही है। उसी तरह से इस भी शुरू हो रही है। इससे वास्तविक जनसंख्या की जानकारी हो जाएगी, जिससे योजनाओं शुरू करने में सरकार को आसानी रहेगी।
-डॉ.सुरचना त्रिवेदी, प्राचार्य, भगवान दीन आर्यकन्या डिग्री कॉलेज
देशवासियों के लिए जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू करने के लिए जनसंख्या की जानकारी होना बेहद जरूरी है। इसके लिए एनपीआर रजिस्टर तैयार किया जा रहा है। जो पहले भी तैयार होता रहा है।
-रिचा गुप्ता, आवास विकास कॉलोनी
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नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर में नाम शामिल कराने के लिए परिवार के मुखिया को अपनी पहचान तय करने के लिए आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन एवं वोटर आईडी कार्ड सहित 21 तरह की जानकारी देनी होंगी। जबकि 2010 के एनपीआर में 16 सूचनाएं मांगी गईं थीं। एनपीआर को लेकर भले ही कुछ लोगों में असमंजस बना हुआ हो मगर, इसको लेकर जो डेटाबेस तैयार किया जाएगा उसको लेकर बुद्धिजीवी वर्ग का कहना है कि इससे देश की आबादी के बारे में जानकारी हो जाएगी तो रोजगार आदि की स्थिति भी पता लग जाएगी। इससे सरकार को लोगों के लिए योजनाएं शुरू करने में काफी सुविधा मिलेगी।
एनपीआर का उद्देश्य
देश के हर नागरिक की पूरी पहचान के साथ उसके बारे में विभिन्न जानकारियों का डेटाबेस तैयार करना, क्योंकि केंद्र सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं में धोखाधड़ी रोकने और हर परिवार तक उसका लाभ पहुंचाने के लिए इसका इस्तेमाल करती है।
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क्या है एनपीआर
नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों के तहत स्थानीय, उप जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है। एनपीआर में अपना नाम दर्ज करवाने के लिए नागरिकों को अपनी डिटेल्स देनी होंगी।
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यह ब्यौरा होगा दर्ज
व्यक्ति का नाम, परिवार के मुखिया के नाम, माता एवं पिता का नाम, पति एवं पत्नी का नाम, लिंग, जन्मतिथि, वैवाहिक स्थिति, जन्मस्थान, नागरिकता, वर्तमान पता, पते पर रहने की अवधि, स्थायी पता, व्यवसाय, शैक्षणिक स्थिति आदि।
लोगों का नजरिया
राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर देश में रहने वालों की गणना के लिए है। इससे देश की जनसंख्या और रोजगार की स्थिति की जानकारी हो जाएगी। इससे सरकार को जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू करने में आसानी रहेगी। कुछ लोगों में जो असमंजस की स्थिति है उसको लेकर सरकार लोगों को जागरूक करे, जिससे लोगों के मन की शंका दूर हो सके।
- मोहम्मद आसिफ
हर दस साल पर जनगणना होती आई है। वह इस बार भी हो रही है। जो एक प्रक्रिया है। इससे देश की आबादी और रोजगार की स्थिति की जानकारी हो सकेगी। जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
-बलविंदर सिंह, नई बस्ती
एनपीआर देश हित में हैं। इससे देश की आबादी के बारे में जानकारी होगी, जिससे सरकार को देशवासियों की खातिर जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू करने में सुविधा मिलेगी।
-मनीष गुप्ता, निवासी मेन रोड
एनपीआर जनसंख्या के आंकड़े इकठ्ठा करने के लिए है। इससे देश सामाजिक और आर्थिक स्थिति स्पष्ट होगी। इससे प्राप्त आंकड़ों के आधार पर देशवासियों के लिए जनकल्याणकारी योजनाएं बनाई जा सकेंगी।
-डॉ. सुभाष चंद्रा, चीफ प्रॉक्टर, युवराज दत्त महाविद्यालय
जनगणना तो हर दस साल पर होती आई है। वही इस बार भी हो रही है। ये बेहद जरूरी भी है, क्योंकि योजनाओं के लिए देश की जनसंख्या के बारे में जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। इसका विरोध करना उचित नहीं है।
-डॉ. जेएन सिंह, प्रोफेसर, युवराजदत्त महाविद्यालय
एनपीआर कोई नया नहीं है। जैसे पिछले वर्षों में हर दस साल पर जनगणना होती रही है। उसी तरह से इस भी शुरू हो रही है। इससे वास्तविक जनसंख्या की जानकारी हो जाएगी, जिससे योजनाओं शुरू करने में सरकार को आसानी रहेगी।
-डॉ.सुरचना त्रिवेदी, प्राचार्य, भगवान दीन आर्यकन्या डिग्री कॉलेज
देशवासियों के लिए जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू करने के लिए जनसंख्या की जानकारी होना बेहद जरूरी है। इसके लिए एनपीआर रजिस्टर तैयार किया जा रहा है। जो पहले भी तैयार होता रहा है।
-रिचा गुप्ता, आवास विकास कॉलोनी