{"_id":"5df5257c8ebc3e87eb43c89b","slug":"civic-amenities-lakhimpur-news-bly3879926120","type":"story","status":"publish","title_hn":"ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से फसलों को भारी नुकसान का अनुमान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से फसलों को भारी नुकसान का अनुमान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखीमपुर खीरी। शुक्रवार को दिन भर हुई ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है। ओलावृष्टि से सरसों/लाही, शाक-भाजी समेत दलहनी फसलों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। गेहूं की बुवाई का समय चल रहा है, जिससे खेतों में पानी भर जाने से बुवाई लेट होगी। वहीं जो गेहूं जमा नहीं है, उन खेतों में पानी भरने से जमाव नहीं होगा। इससे दोबारा बुवाई करने में किसानों को दोहरी लागत से जूझना होगा। लेखपालों की हड़ताल के चलते नुकसान का सही आकलन करना मुश्किल होगा। हालांकि सरकार द्वारा एस्मा लागू कर लेखपालों की हड़ताल को निषिद्ध कर दिया गया है। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने सभी एसडीएम को निर्देश जारी कर राजस्व निरीक्षकों से फसलों को हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार कराने के निर्देश दिए हैं। इससे एक-दो दिन में तहसीलों से रिपोर्ट मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
जनपद में बृहस्पतिवार की रात ढाई बजे से बारिश शुरू हुई, जो दूसरे दिन शुक्रवार को दिन भर तेज हवाओं के साथ जारी रही। इसके बाद शुक्रवार की रात में भी कई बार रुक-रुक कर बारिश हुई। इस दौरान कई स्थानों पर ओलावृष्टि भी हुई। एडीएम अरुण कुमार सिंह के मुताबिक 24 घंटे के दौरान जनपद में कुल 60.19 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई है। मितौली, मोहम्मदी, गोला और पलिया क्षेत्र में सबसे ज्यादा ओलावृष्टि होने की सूचना है। फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए सभी एसडीएम और तहसीलदारों को निर्देश दिए गए हैं। एडीएम ने बताया कि 33 प्रतिशत तक या इससे अधिक फसलों को नुकसान होने पर किसानों को दैवी आपदा राहत कोष से अनुदान दिया जाएगा। इसके अलावा जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है, उन्हें बीमा कंपनी से क्लेम दिलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि ठंड से बचाव के लिए 168 जगहों पर अलाव जलवाए गए हैं और 700 कंबल वितरित किए गए हैं।
टमाटर की फसल को नुकसान
मैगलगंज। क्षेत्र में ओलावृष्टि से टमाटर की फसल को काफी नुकसान हुआ है। हैरमखेड़ा निवासी किसान सुनील कुमार ने टमाटर की खेती की है, जिनका कहना है कि ओला गिरने से टमाटर की फसल खराब हो गई है। कच्चे टमाटर टूटकर खेत में बिखर गए। इससे करीब 40 हजार रुपये का नुकसान हुआ है।
विज्ञापन
गन्ने की फसल गिरी
बारिश के साथ तेज हवा चली, जिससे गन्ने की फसल गिर गई है। इससे फसल को भारी नुकसान हुआ है। गन्ना समिति से पर्चियां यदि जल्द मिले, तो नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सकती है।
-आशाराम, किसान
गन्ने की फसल गिरने से किसानों की कमर ही टूट गई है। अब इसे बांधकर भी सही नहीं किया जा सकता है। सरकार से मुआवजा मिलना चाहिए, जिससे किसान अपनी फसल को हुए नुकसान की भरपाई कर सकें।
-हरिवंश, किसान
ओलावृष्टि और जलभराव से शाक-भाजी और तिलहनी फसलों को नुकसान
बांकेगंज। बारिश से गेहूं और गन्ने की फसलों को फायदा पहुंचा है, लेकिन वहीं शाक-भाजी, दलहनी और तिलहनी फसल उत्पादक किसानों के लिए बारिश आफत बन गई। जल निकास समस्या के चलते किसानों की जलभराव होने से 40 फीसदी फसल में नुकसान की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलभराव के निकास का इंतजाम न होने के स्थिति में इसका असर फसल उत्पादन पर पड़ सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक पीके बिसेन ने बताया कि शुक्रवार दोपहर तक हुई बारिश जहां गेहूं, गन्ना समेत शाक-भाजी, दलहनी और तिलहनी फसलों के लिए संजीवनी साबित हुई, वहीं दोपहर बाद से देर रात तक हुई मूसलाधार बारिश से आलू, मटर, टमाटर, लाही, सरसों और मसूर फसल के लिए नुकसानदेह साबित हुई। उन्होंने बताया कि दोपहर बाद हुई बारिश से शाक-भाजी, दलहनी और तिलहनी फसलों के खेतों में जल निकास की समस्या के चलते पानी का जलभराव होने से संबंधित फसलों पर खतरा मंडराने लगा है। फसलों में जलभराव निकासी का इंतजाम न होने से खेत में लगातार नमी बनी रहने के कारण फसल की पत्तियां पीली पड़ने और जड़ें कमजोर होने से इसका विपरीत असर उत्पादन पर पड़ सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि किसानों को तत्काल खेतों में भरे बारिश के पानी निकासी इंतजाम करना चाहिए। ऐसा न करने की स्थिति में फसल में झुलसा रोग लग सकता है। कहा कि मौसम साफ होने और खेतों में भरा पानी निकलने के बाद संबधित फसलों में एनपीके खाद का स्प्रे करने से फसल नुकसान का बचाव किया जा सकता है। इसके अलावा अमीरनगर क्षेत्र में नुकसान हुआ है।
तिकुनिया। नेपाल बॉर्डर क्षेत्र में हुई बारिश के चलते किसानों की सैकड़ों एकड़ गेहूं, गन्ने, लाही, मसूर की फसल बरबाद हो गई है। किसानों ने प्रशासन से फसलों को हुए नुकसान की जांच कराकर मुआवजा दिलाए जाने की मांग की है। किसान कश्मीर सिंह, राजवीर सिंह, जसवंत सिंह, बाबा राम ने बताया कि बारिश से गेहूं के खेत में लबालब पानी भर गया है। तेज हवाओं के चलने से गन्ना गिर गया है, जिससे गन्ने को भारी नुकसान हुआ है।
विज्ञापन
जनपद में बृहस्पतिवार की रात ढाई बजे से बारिश शुरू हुई, जो दूसरे दिन शुक्रवार को दिन भर तेज हवाओं के साथ जारी रही। इसके बाद शुक्रवार की रात में भी कई बार रुक-रुक कर बारिश हुई। इस दौरान कई स्थानों पर ओलावृष्टि भी हुई। एडीएम अरुण कुमार सिंह के मुताबिक 24 घंटे के दौरान जनपद में कुल 60.19 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई है। मितौली, मोहम्मदी, गोला और पलिया क्षेत्र में सबसे ज्यादा ओलावृष्टि होने की सूचना है। फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए सभी एसडीएम और तहसीलदारों को निर्देश दिए गए हैं। एडीएम ने बताया कि 33 प्रतिशत तक या इससे अधिक फसलों को नुकसान होने पर किसानों को दैवी आपदा राहत कोष से अनुदान दिया जाएगा। इसके अलावा जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है, उन्हें बीमा कंपनी से क्लेम दिलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि ठंड से बचाव के लिए 168 जगहों पर अलाव जलवाए गए हैं और 700 कंबल वितरित किए गए हैं।
विज्ञापन
टमाटर की फसल को नुकसान
मैगलगंज। क्षेत्र में ओलावृष्टि से टमाटर की फसल को काफी नुकसान हुआ है। हैरमखेड़ा निवासी किसान सुनील कुमार ने टमाटर की खेती की है, जिनका कहना है कि ओला गिरने से टमाटर की फसल खराब हो गई है। कच्चे टमाटर टूटकर खेत में बिखर गए। इससे करीब 40 हजार रुपये का नुकसान हुआ है।
विज्ञापन
गन्ने की फसल गिरी
बारिश के साथ तेज हवा चली, जिससे गन्ने की फसल गिर गई है। इससे फसल को भारी नुकसान हुआ है। गन्ना समिति से पर्चियां यदि जल्द मिले, तो नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सकती है।
-आशाराम, किसान
गन्ने की फसल गिरने से किसानों की कमर ही टूट गई है। अब इसे बांधकर भी सही नहीं किया जा सकता है। सरकार से मुआवजा मिलना चाहिए, जिससे किसान अपनी फसल को हुए नुकसान की भरपाई कर सकें।
-हरिवंश, किसान
ओलावृष्टि और जलभराव से शाक-भाजी और तिलहनी फसलों को नुकसान
बांकेगंज। बारिश से गेहूं और गन्ने की फसलों को फायदा पहुंचा है, लेकिन वहीं शाक-भाजी, दलहनी और तिलहनी फसल उत्पादक किसानों के लिए बारिश आफत बन गई। जल निकास समस्या के चलते किसानों की जलभराव होने से 40 फीसदी फसल में नुकसान की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलभराव के निकास का इंतजाम न होने के स्थिति में इसका असर फसल उत्पादन पर पड़ सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक पीके बिसेन ने बताया कि शुक्रवार दोपहर तक हुई बारिश जहां गेहूं, गन्ना समेत शाक-भाजी, दलहनी और तिलहनी फसलों के लिए संजीवनी साबित हुई, वहीं दोपहर बाद से देर रात तक हुई मूसलाधार बारिश से आलू, मटर, टमाटर, लाही, सरसों और मसूर फसल के लिए नुकसानदेह साबित हुई। उन्होंने बताया कि दोपहर बाद हुई बारिश से शाक-भाजी, दलहनी और तिलहनी फसलों के खेतों में जल निकास की समस्या के चलते पानी का जलभराव होने से संबंधित फसलों पर खतरा मंडराने लगा है। फसलों में जलभराव निकासी का इंतजाम न होने से खेत में लगातार नमी बनी रहने के कारण फसल की पत्तियां पीली पड़ने और जड़ें कमजोर होने से इसका विपरीत असर उत्पादन पर पड़ सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि किसानों को तत्काल खेतों में भरे बारिश के पानी निकासी इंतजाम करना चाहिए। ऐसा न करने की स्थिति में फसल में झुलसा रोग लग सकता है। कहा कि मौसम साफ होने और खेतों में भरा पानी निकलने के बाद संबधित फसलों में एनपीके खाद का स्प्रे करने से फसल नुकसान का बचाव किया जा सकता है। इसके अलावा अमीरनगर क्षेत्र में नुकसान हुआ है।
तिकुनिया। नेपाल बॉर्डर क्षेत्र में हुई बारिश के चलते किसानों की सैकड़ों एकड़ गेहूं, गन्ने, लाही, मसूर की फसल बरबाद हो गई है। किसानों ने प्रशासन से फसलों को हुए नुकसान की जांच कराकर मुआवजा दिलाए जाने की मांग की है। किसान कश्मीर सिंह, राजवीर सिंह, जसवंत सिंह, बाबा राम ने बताया कि बारिश से गेहूं के खेत में लबालब पानी भर गया है। तेज हवाओं के चलने से गन्ना गिर गया है, जिससे गन्ने को भारी नुकसान हुआ है।