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लेखपालों के कार्य बहिष्कार में उलझ गया जरूरतमंदों का काम
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लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के प्रांतीय आह्वान पर लंबित मांगों को लेकर लेखपालों का तहसीलों पर तीन दिवसीय कार्य बहिष्कार 12 दिसंबर तक चलेगा, जिसके बाद जिला और प्रदेश स्तर पर 27 दिसंबर तक कार्य बहिष्कार रहेगा। इससे तहसीलों में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। जिले की सात तहसीलों में सदर, गोला, मोहम्मदी, निघासन, पलिया, धौरहरा, मितौली के करीब 450 लेखपालों कार्य बहिष्कार से युवाओं को नौकरी के लिए जरूरत आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र बनाने का काम बाधित हो गया है। वहीं जमीनों की पैमाइश, वरासत, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, दैवी आपदा संबंधी कार्य समेत प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। तहसील आने वाले ग्रामीण और किसानों को बैरंग होना पड़ा है।
सदर तहसील मुख्यालय के अध्यक्ष रामकृष्ण मिश्रा और मंत्री अनुराग शुक्ला के नेतृत्व में एक ओर लेखपाल अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद करते रहे। इधर, लेखपालों के तेवर से किसानों की शिकायतों की निस्तारण कराने में अधिकारियों को दिक्कत आएंगी, जिसमें संपूर्ण समाधान दिवस और थाना दिवस में आने वाली शिकायतों के निस्तारण नहीं हो सकेंगे। कई विभागीय और प्रशासनिक कार्यों की जांच आदि कार्य प्रभावित हुए हैं। जिस तरह लेखपालों की हड़ताल आगे बढ़ेगी, उसी तरह समस्याएं बढ़ती जाएंगी। क्योंकि 13 दिसंबर से सभी तहसीलों के लेखपाल जिला मुख्यालय पर आकर धरना प्रदर्शन करेंगे, जो 26 दिसंबर तक चलेगा। इसके बाद 27 दिसंबर को लखनऊ में लेखपाल विधानसभा का घेराव कर आगे की रणनीति बनाएंगे। लेखपालों की लंबी तैयारी को देखते हुए जिला प्रशासन में खलबली मची है, लेकिन प्रदेश स्तरीय हड़ताल के चलते अधिकारियों ने खामोशी साध रखी है और शासन स्तर से मिलने वाले निर्देशों के अनुसार ही कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं।
लेखपाल की रिपोर्ट न लगने से फाइल अटकी
उजारगूम निवासी दरबारी लाल के बेटे की सड़क हादसे में मौत हो गई थी, जिसके बाद से वह मुआवजा पाने के लिए भटक रहे हैं। लेखपाल की रिपोर्ट लगवाने के लिए दौड़ रहे हैं। बुधवार को तहसील आए, तो पता चला कि लेखपाल हड़ताल पर हैं। इससे इनकी फाइल तहसीलदार की टेबल पर ही अटकी है।
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मुआवजे के लिए भटक रही रूबी सदर तहसील के गांव उजारगूूम लालपुर निवासी अनिल कुमार की 28 अक्तूबर 2019 को सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इसके बाद से वह कृषक दुर्घटना बीमा का पैसा हासिल करने के लिए तहसील दौड़ रहीं हैं। बुधवार को उनके कागजों पर लेखपाल की रिपोर्ट नहीं लग सकी।
बुढनापुर गांव निवासी भगवानदीन ने बताया कि उनकी जमीन को फर्जी तरीके से कुछ लोगों ने बेच दिया है। इसका मुकदमा किया है, लेकिन बुधवार को लेखपालों की हड़ताल के चलते सुनवाई नहीं हुई।
गांव के लोगों ने दूसरे को बेच दी जमीन
बुढनापुर गांव निवासी चंद्रिका भी जमीन के मुकदमे के सिलसिले में बुधवार को तहसील आए। यहां आने पर पता चला कि हड़ताल के चलते उनके केस में आगे की तारीख लगा दी गई है। डेढ़ साल से मुकदमा लड़ रहे हैं। इनकी जमीन के फर्जी कागजात बनाकर दूसरे व्यक्तियों ने किसी तीसरे व्यक्ति के हाथ बेच दिया है।
लेखपालों की पूरे प्रदेश के सभी जिलों में हड़ताल चल रही है। इससे यहां भी कामकाज प्रभावित हुआ है। शासन स्तर से निर्देश प्राप्त होने पर उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। यदि हड़ताल अवैध है, तो लेखपालों के विरुद्ध कार्रवाई भी हो सकती है।
-अरुण कुमार सिंह, एडीएम
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सदर तहसील मुख्यालय के अध्यक्ष रामकृष्ण मिश्रा और मंत्री अनुराग शुक्ला के नेतृत्व में एक ओर लेखपाल अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद करते रहे। इधर, लेखपालों के तेवर से किसानों की शिकायतों की निस्तारण कराने में अधिकारियों को दिक्कत आएंगी, जिसमें संपूर्ण समाधान दिवस और थाना दिवस में आने वाली शिकायतों के निस्तारण नहीं हो सकेंगे। कई विभागीय और प्रशासनिक कार्यों की जांच आदि कार्य प्रभावित हुए हैं। जिस तरह लेखपालों की हड़ताल आगे बढ़ेगी, उसी तरह समस्याएं बढ़ती जाएंगी। क्योंकि 13 दिसंबर से सभी तहसीलों के लेखपाल जिला मुख्यालय पर आकर धरना प्रदर्शन करेंगे, जो 26 दिसंबर तक चलेगा। इसके बाद 27 दिसंबर को लखनऊ में लेखपाल विधानसभा का घेराव कर आगे की रणनीति बनाएंगे। लेखपालों की लंबी तैयारी को देखते हुए जिला प्रशासन में खलबली मची है, लेकिन प्रदेश स्तरीय हड़ताल के चलते अधिकारियों ने खामोशी साध रखी है और शासन स्तर से मिलने वाले निर्देशों के अनुसार ही कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं।
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लेखपाल की रिपोर्ट न लगने से फाइल अटकी
उजारगूम निवासी दरबारी लाल के बेटे की सड़क हादसे में मौत हो गई थी, जिसके बाद से वह मुआवजा पाने के लिए भटक रहे हैं। लेखपाल की रिपोर्ट लगवाने के लिए दौड़ रहे हैं। बुधवार को तहसील आए, तो पता चला कि लेखपाल हड़ताल पर हैं। इससे इनकी फाइल तहसीलदार की टेबल पर ही अटकी है।
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मुआवजे के लिए भटक रही रूबी सदर तहसील के गांव उजारगूूम लालपुर निवासी अनिल कुमार की 28 अक्तूबर 2019 को सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इसके बाद से वह कृषक दुर्घटना बीमा का पैसा हासिल करने के लिए तहसील दौड़ रहीं हैं। बुधवार को उनके कागजों पर लेखपाल की रिपोर्ट नहीं लग सकी।
बुढनापुर गांव निवासी भगवानदीन ने बताया कि उनकी जमीन को फर्जी तरीके से कुछ लोगों ने बेच दिया है। इसका मुकदमा किया है, लेकिन बुधवार को लेखपालों की हड़ताल के चलते सुनवाई नहीं हुई।
गांव के लोगों ने दूसरे को बेच दी जमीन
बुढनापुर गांव निवासी चंद्रिका भी जमीन के मुकदमे के सिलसिले में बुधवार को तहसील आए। यहां आने पर पता चला कि हड़ताल के चलते उनके केस में आगे की तारीख लगा दी गई है। डेढ़ साल से मुकदमा लड़ रहे हैं। इनकी जमीन के फर्जी कागजात बनाकर दूसरे व्यक्तियों ने किसी तीसरे व्यक्ति के हाथ बेच दिया है।
लेखपालों की पूरे प्रदेश के सभी जिलों में हड़ताल चल रही है। इससे यहां भी कामकाज प्रभावित हुआ है। शासन स्तर से निर्देश प्राप्त होने पर उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। यदि हड़ताल अवैध है, तो लेखपालों के विरुद्ध कार्रवाई भी हो सकती है।
-अरुण कुमार सिंह, एडीएम