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पांच साल से बिछड़े अंकुश को पिता से मिलवाया
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लखीमपुर खीरी। एक मां-बाप ने सोच लिया था कि उनका बिछड़ा हुआ कलेजे का टुकड़ा अब नहीं मिलेगा, लेकिन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की प्रभारी सचिव/सिविल जज सीमा सिंह के प्रयास से पांच साल से बिछड़ा अंकुश अपने मां-बाप के पास पहुंच गया।
प्रभारी सचिव/सिविल जज सीमा सिंह की मुलाकात बालगृह के निरीक्षण के समय अंकुश से हुई। जिसके बारे में जानकारी करने पर पता चला कि यह बच्चा 26 मई 2015 से अपने परिवार से बिछड़ा हुआ है। जो पलिया रेलवे स्टेशन पर चाइल्ड लाइन को मिला था। इसे बाल कल्याण समिति के आदेश पर शिशु गृह भेज दिया गया और आठ माह पूर्व ही इसे शिशु गृह से बालगृह में शिफ्ट किया गया था। प्रभारी सचिव सीमा सिंह ने बच्चे से पूूछताछ की, तो उसने बताया कि उसके पिता का नाम विनोद शर्मा है, जो जाति से बढ़ई हैं। वह चार भाई और दो बहन हैं। उसके पिता पलिया में बस कंडक्टर हैं। उनका घर पलिया में पीली टंकी के पास हनुमान मंदिर वाली गली में है। संयोगवश दो दिसंबर 2019 को पलिया बस आपरेटर आदि बनाम अमरीक सिंह के मुकदमे की सुनवाई की पत्रावली उनके सामने आई, तो उन्होंनेे उत्सुकतावश पलिया बस आपरेटर की ओर से पैरवी करने आए व्यक्ति से अंकुश के पिता के बारे में जानकारी ली। उन्हें व्यक्तिगत रूप से इस बारे में जानकारी के लिए अपने विश्राम कक्ष में मिलने को कहा और संबंधित पैरोकार कौशल किशोर शुक्ला को अंकुश द्वारा दिया गया विवरण नोट करवाया। बालगृह के केस वर्कर को फोन करके अंकुश से कौशल किशोर शुक्ल की बात कराई। अंकुश द्वारा बातचीत में किसी बंटी का नाम लेने पर पैरोकार कौशल किशोर शुक्ल ने अंकुश से पूछा क्या वह बंटी है जो कंडक्टर हैं। तो अंकुश ने हां में उत्तर दिया। इस पर पैरोकार ने बताया कि बंटी का पड़ोसी विनोद शर्मा है, जो हेल्पर का कार्य करता है और उसी हनुमान मंदिर वाली गली में रहता है। अंकुश के बारे में इतनी जानकारी मिलने पर प्रभारी सचिव/सिविल जज ने अगले दिन पैरोकार के साथ विनोद शर्मा को बुलाया और अंकुश को मुलाकात के लिए अपने विश्राम कक्ष में बुलाया। विनोद शर्मा को देखते ही अंकुश उनसे लिपटकर रोने लगा। पिता-पुत्र दोनों ने एक दूसरे को पहचान लिया और यह तथ्य स्पष्ट हो गया कि विनोद शर्मा ही पांच वर्ष से अपने परिवार से बिछड़े अंकुश के पिता हैं। सभी प्रकार से सुनिश्चित करने के बाद प्रभारी सचिव सीमा सिंह ने बाल गृह के केस वर्कर रोहित को निर्देश दिया कि अंकुश को उसके पिता को नियमानुसार सुपुर्दगी की कार्यवाही के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश कराएं। बाल कल्याण समिति के समक्ष औपचारिकता पूर्ण करने के बाद नौ दिसंबर 2019 को अंकुश को जिला जज शिव शंकर प्रसाद एवं प्रभारी सचिव सिविल जज सीमा सिंह की उपस्थिति में उसके पिता के सुपुर्द कर दिया गया।
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प्रभारी सचिव/सिविल जज सीमा सिंह की मुलाकात बालगृह के निरीक्षण के समय अंकुश से हुई। जिसके बारे में जानकारी करने पर पता चला कि यह बच्चा 26 मई 2015 से अपने परिवार से बिछड़ा हुआ है। जो पलिया रेलवे स्टेशन पर चाइल्ड लाइन को मिला था। इसे बाल कल्याण समिति के आदेश पर शिशु गृह भेज दिया गया और आठ माह पूर्व ही इसे शिशु गृह से बालगृह में शिफ्ट किया गया था। प्रभारी सचिव सीमा सिंह ने बच्चे से पूूछताछ की, तो उसने बताया कि उसके पिता का नाम विनोद शर्मा है, जो जाति से बढ़ई हैं। वह चार भाई और दो बहन हैं। उसके पिता पलिया में बस कंडक्टर हैं। उनका घर पलिया में पीली टंकी के पास हनुमान मंदिर वाली गली में है। संयोगवश दो दिसंबर 2019 को पलिया बस आपरेटर आदि बनाम अमरीक सिंह के मुकदमे की सुनवाई की पत्रावली उनके सामने आई, तो उन्होंनेे उत्सुकतावश पलिया बस आपरेटर की ओर से पैरवी करने आए व्यक्ति से अंकुश के पिता के बारे में जानकारी ली। उन्हें व्यक्तिगत रूप से इस बारे में जानकारी के लिए अपने विश्राम कक्ष में मिलने को कहा और संबंधित पैरोकार कौशल किशोर शुक्ला को अंकुश द्वारा दिया गया विवरण नोट करवाया। बालगृह के केस वर्कर को फोन करके अंकुश से कौशल किशोर शुक्ल की बात कराई। अंकुश द्वारा बातचीत में किसी बंटी का नाम लेने पर पैरोकार कौशल किशोर शुक्ल ने अंकुश से पूछा क्या वह बंटी है जो कंडक्टर हैं। तो अंकुश ने हां में उत्तर दिया। इस पर पैरोकार ने बताया कि बंटी का पड़ोसी विनोद शर्मा है, जो हेल्पर का कार्य करता है और उसी हनुमान मंदिर वाली गली में रहता है। अंकुश के बारे में इतनी जानकारी मिलने पर प्रभारी सचिव/सिविल जज ने अगले दिन पैरोकार के साथ विनोद शर्मा को बुलाया और अंकुश को मुलाकात के लिए अपने विश्राम कक्ष में बुलाया। विनोद शर्मा को देखते ही अंकुश उनसे लिपटकर रोने लगा। पिता-पुत्र दोनों ने एक दूसरे को पहचान लिया और यह तथ्य स्पष्ट हो गया कि विनोद शर्मा ही पांच वर्ष से अपने परिवार से बिछड़े अंकुश के पिता हैं। सभी प्रकार से सुनिश्चित करने के बाद प्रभारी सचिव सीमा सिंह ने बाल गृह के केस वर्कर रोहित को निर्देश दिया कि अंकुश को उसके पिता को नियमानुसार सुपुर्दगी की कार्यवाही के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश कराएं। बाल कल्याण समिति के समक्ष औपचारिकता पूर्ण करने के बाद नौ दिसंबर 2019 को अंकुश को जिला जज शिव शंकर प्रसाद एवं प्रभारी सचिव सिविल जज सीमा सिंह की उपस्थिति में उसके पिता के सुपुर्द कर दिया गया।
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