{"_id":"5debfb1b8ebc3e1b8f2034c8","slug":"civic-amenities-lakhimpur-news-bly3870655154","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहरों की सिल्ट सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहरों की सिल्ट सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखीमपुर खीरी। नहरों की सिल्ट सफाई के नाम पर 1.57 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन इसका फायदा किसानों को मिलता नजर नहीं आ रहा है। जिले में नहरों की लंबाई 865 किमी है, जिसमें से 397 किमी लंबाई में नहरों की सिल्ट सफाई कराई गई है। शासन ने 25 नवंबर तक काम पूरा करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हो सका है।
रबी फसलों में निर्बाध सिंचाई के लिए सिंचाई खंड प्रथम और द्वितीय क्षेत्र की नहरों में एक से 25 नवंबर 2019 तक सिल्ट सफाई का काम पूरा कराया जाना था। इसके बाद 28 नवंबर 2019 से नहरों में पानी छोड़ा जाना था। इससे पहले 27 नवंबर 2019 को सीडीओ अरविंद सिंह ने कई टीमें बनाकर और स्वयं निरीक्षण करके सिल्ट सफाई का सच जाना था। इसमें कई तरह की गड़बड़ियां मिलीं थी। नहरों में कई स्थानों पर सिल्ट सफाई नहीं की गई थी, बल्कि पुलिया के नीचे सिल्ट जमा मिली थी। एक बार पानी छोड़े जाने के बाद अधूरे कार्य को पूरा होते देर नहीं लगती, लेकिन सीडीओ ने पानी छोड़े जाने से ठीक एक दिन पहले निरीक्षण करके ठेकेदारों और अधिकारियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया था। सीडीओ अरविंद सिंह ने सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता को चेतावनी देकर जल्द सिल्ट सफाई का कार्य पूरा कराने के बाद ही पानी चालू करने के निर्देश दिए थे।
बांकेगंज में अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे बड़ी और छोटी नहर के कुलाबे, कागजों पर हो गई सिल्ट सफाई
बांकेगंज। बड़ी और छोटी नहर के कुलाबों में जमा सिल्ट सफाई का कार्य महीनों से चल रहा है, जो महज औपचारिकता बनकर रह गया है। जेसीबी से कोलाबों में जमा सिल्ट की सफाई हुई, लेकिन उनकी हालत जस की तस बनी हुई है। कोलाबों में जमा सिल्ट और खड़ी झाड़ियां किसानों को मुंह चिढ़ा रहीं हैं।
विज्ञापन
बांकेगंज क्षेत्र में किसानों की रबी, खरीफ और गन्ने की फसलों की सिंचाई के लिए खीरी ब्रांच की बड़ी और छोटी दो नहरे हैं लेकिन इन नहरों से किसानों को जरूरत के समय कभी पानी नहीं मिल पाता है। नहरों में पानी होने के बावजूद कोलाबों में जमा सिल्ट और झाड़ियां खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाता। कोलाबों की सफाई में भी महज औपचारिकता निभाई जाती है। विधिवत सफाई न होने के कारण कोलाबों में सिल्ट अब भी जमा है। इससे नहरेें उथली हो गईं हैं। नहरों की पानी धारण क्षमता भी कम हो गई है। कुलाबों में सिल्ट जमा होने के कारण पानी टेल तक नहीं पहुंच रहा है। कोलाबों की सिल्ट सफाई के लिए बांकेगंज क्षेत्र में पिछले एक माह से छोटी और बड़ी नहरें सूखी पड़ी हैं। नहर के पानी पर आश्रित किसानों की गेहूं, गन्ना, लाही, मसूर की फसलें सूख रहीं हैं। इससे किसानों की सांसे हलक में अटकी हुई हैं। बिजली और डीजल की आसमान छूती कीमतों के कारण किसान ट्यूबवेल और पंपिग सेट से फसलों की सिंचाईं करने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं।
सफेद हाथी बने कुलाबे
बांकेगंज कस्बा निवासी किसान प्रेम सिंह ने बताया कि फसलों की सिंचाईं के लिए बने कुलाबे सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। कोलाबों में जमा सिल्ट के चलते खेतों में नहर का पानी नहीं पहुंचता। सिंचाई विभाग की लापरवाही का खमियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है।
बिजली मंहगी, डीजल मंहगा, कुलाबे दे रहे दगा
कोठीपुर गांव निवासी किसान प्रमोद सिंह ने कहा है कि बिजली महंगी, डीजल महंगा और नहर के कुलाबों में जमा सिल्ट किसानों को दगा दे रही हैं। नहर विभाग कोलाबों की सफाई के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च करता है। बावजूद इसके उन्हें फसलों की सिंचाईं के लिए जमा सिल्ट के चलते पानी नहीं मिल पाता है।
जरूरत के समय कुलाबों से नहीं मिलता पानी
गंगापुर निवासी किसान राजकुमार का कहना है रजबहे के कुलाबों में जमा सिल्ट के चलते फसलों की सिंचाईं के लिए जरूरत के समय पर पानी नहीं मिल पाता। जिसके चलते किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ती है। पानी के अभाव में सूखती फसलों की सिंचाई के लिए महंगा डीजल खरीदकर पंपिग सेट चलाना पड़ता है।
बस रस्म अदायगी है कुलाबों की सफाई
श्यामपुर निवासी किसान कौशल किशोर का कहना है कि हाल ही बांकेगंज की बड़ी और छोटी नहरों के कुलाबों की सिल्ट सफाई महज रस्म अदायगी है। सिल्ट जस की तस जमा है। कोलाबों के दोनों ओर खड़ी झाड़ियां सिल्ट सफाई की पोल खोलती नजर आती है। टेल तक पानी न पहुंचने से किसान फसलों की सिंचाईं नहीं कर पाते हैं।
सिल्ट सफाई का काम चार-पांच दिनों में पूरा करा लिया जाएगा। जो कमियां रह गई थीं, उन्हें विशेष तौर पर दुरुस्त कराया जा रहा है। शासन से 15 दिसंबर तक कार्य पूरा करने के लिए समय मिला है, लेकिन इससे पहले सफाई कार्य पूरा कर नहरों में पानी चालू कर दिया जाएगा।
-ओपी वर्मा, अधिशाषी अभियंता, सिंचाई खंड प्रथम
विज्ञापन
रबी फसलों में निर्बाध सिंचाई के लिए सिंचाई खंड प्रथम और द्वितीय क्षेत्र की नहरों में एक से 25 नवंबर 2019 तक सिल्ट सफाई का काम पूरा कराया जाना था। इसके बाद 28 नवंबर 2019 से नहरों में पानी छोड़ा जाना था। इससे पहले 27 नवंबर 2019 को सीडीओ अरविंद सिंह ने कई टीमें बनाकर और स्वयं निरीक्षण करके सिल्ट सफाई का सच जाना था। इसमें कई तरह की गड़बड़ियां मिलीं थी। नहरों में कई स्थानों पर सिल्ट सफाई नहीं की गई थी, बल्कि पुलिया के नीचे सिल्ट जमा मिली थी। एक बार पानी छोड़े जाने के बाद अधूरे कार्य को पूरा होते देर नहीं लगती, लेकिन सीडीओ ने पानी छोड़े जाने से ठीक एक दिन पहले निरीक्षण करके ठेकेदारों और अधिकारियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया था। सीडीओ अरविंद सिंह ने सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता को चेतावनी देकर जल्द सिल्ट सफाई का कार्य पूरा कराने के बाद ही पानी चालू करने के निर्देश दिए थे।
विज्ञापन
बांकेगंज में अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे बड़ी और छोटी नहर के कुलाबे, कागजों पर हो गई सिल्ट सफाई
बांकेगंज। बड़ी और छोटी नहर के कुलाबों में जमा सिल्ट सफाई का कार्य महीनों से चल रहा है, जो महज औपचारिकता बनकर रह गया है। जेसीबी से कोलाबों में जमा सिल्ट की सफाई हुई, लेकिन उनकी हालत जस की तस बनी हुई है। कोलाबों में जमा सिल्ट और खड़ी झाड़ियां किसानों को मुंह चिढ़ा रहीं हैं।
विज्ञापन
बांकेगंज क्षेत्र में किसानों की रबी, खरीफ और गन्ने की फसलों की सिंचाई के लिए खीरी ब्रांच की बड़ी और छोटी दो नहरे हैं लेकिन इन नहरों से किसानों को जरूरत के समय कभी पानी नहीं मिल पाता है। नहरों में पानी होने के बावजूद कोलाबों में जमा सिल्ट और झाड़ियां खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाता। कोलाबों की सफाई में भी महज औपचारिकता निभाई जाती है। विधिवत सफाई न होने के कारण कोलाबों में सिल्ट अब भी जमा है। इससे नहरेें उथली हो गईं हैं। नहरों की पानी धारण क्षमता भी कम हो गई है। कुलाबों में सिल्ट जमा होने के कारण पानी टेल तक नहीं पहुंच रहा है। कोलाबों की सिल्ट सफाई के लिए बांकेगंज क्षेत्र में पिछले एक माह से छोटी और बड़ी नहरें सूखी पड़ी हैं। नहर के पानी पर आश्रित किसानों की गेहूं, गन्ना, लाही, मसूर की फसलें सूख रहीं हैं। इससे किसानों की सांसे हलक में अटकी हुई हैं। बिजली और डीजल की आसमान छूती कीमतों के कारण किसान ट्यूबवेल और पंपिग सेट से फसलों की सिंचाईं करने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं।
सफेद हाथी बने कुलाबे
बांकेगंज कस्बा निवासी किसान प्रेम सिंह ने बताया कि फसलों की सिंचाईं के लिए बने कुलाबे सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। कोलाबों में जमा सिल्ट के चलते खेतों में नहर का पानी नहीं पहुंचता। सिंचाई विभाग की लापरवाही का खमियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है।
बिजली मंहगी, डीजल मंहगा, कुलाबे दे रहे दगा
कोठीपुर गांव निवासी किसान प्रमोद सिंह ने कहा है कि बिजली महंगी, डीजल महंगा और नहर के कुलाबों में जमा सिल्ट किसानों को दगा दे रही हैं। नहर विभाग कोलाबों की सफाई के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च करता है। बावजूद इसके उन्हें फसलों की सिंचाईं के लिए जमा सिल्ट के चलते पानी नहीं मिल पाता है।
जरूरत के समय कुलाबों से नहीं मिलता पानी
गंगापुर निवासी किसान राजकुमार का कहना है रजबहे के कुलाबों में जमा सिल्ट के चलते फसलों की सिंचाईं के लिए जरूरत के समय पर पानी नहीं मिल पाता। जिसके चलते किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ती है। पानी के अभाव में सूखती फसलों की सिंचाई के लिए महंगा डीजल खरीदकर पंपिग सेट चलाना पड़ता है।
बस रस्म अदायगी है कुलाबों की सफाई
श्यामपुर निवासी किसान कौशल किशोर का कहना है कि हाल ही बांकेगंज की बड़ी और छोटी नहरों के कुलाबों की सिल्ट सफाई महज रस्म अदायगी है। सिल्ट जस की तस जमा है। कोलाबों के दोनों ओर खड़ी झाड़ियां सिल्ट सफाई की पोल खोलती नजर आती है। टेल तक पानी न पहुंचने से किसान फसलों की सिंचाईं नहीं कर पाते हैं।
सिल्ट सफाई का काम चार-पांच दिनों में पूरा करा लिया जाएगा। जो कमियां रह गई थीं, उन्हें विशेष तौर पर दुरुस्त कराया जा रहा है। शासन से 15 दिसंबर तक कार्य पूरा करने के लिए समय मिला है, लेकिन इससे पहले सफाई कार्य पूरा कर नहरों में पानी चालू कर दिया जाएगा।
-ओपी वर्मा, अधिशाषी अभियंता, सिंचाई खंड प्रथम