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नेपाल में कौन कर रहा था नकली नोटों की सप्लाई पुलिस पता नहीं लगा पाई
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लखीमपुर खीरी। देहरादून में दो दिन पहले दो लोगों से 20 लाख के नकली नोट मिलने के बाद खुफिया एजेंसियों ने सक्रियता बढ़ा दी। टेरर फंडिंग का हाल ही में खुलासा होने के कारण इस बार बॉर्डर पर सक्रियता दिख रही है, वरना इस इलाके में भी ऐसे मामले पकड़े गए, मगर पुलिस ने फौरी कार्रवाई करने के अलावा कुछ नहीं किया। डेढ़ साल पहले पांच सौ के नकली नोट पकड़ने के मामले में पुलिस ने यह तक पता लगाने की कोशिश नहीं की थी नेपाल से नकली नोट भेजने वाले आखिर कौन थे।
वर्ष 2018 में छह जुलाई की शाम गांव बसही निवासी विनोद गांव सेमरी स्थित एक दुकान पर पहुंचा था। उसने बिस्कुट के दो पैकेट लिए और दुकानदार को 500 रुपये का नोट दिया। दुकानदार ने भी 20 रुपये काटकर उसे 480 रुपये उसे लौटा दिए थे। शक होने पर दुकानदार ने जब नोट को अच्छी तरह से देखा तो वह नकली पाया। दुकानदार ने विनोद को रोककर इस बारे में बात की तो वह भाग खड़ा हुआ और उसका एक लिफाफे वहीं गिर गया। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची संपूर्णानगर पुलिस ने जब लिफाफा खोले तो उसमें एक ही नंबर के 500 रुपये के 26 नोट निकले। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर तफ्तीश शुरू की।
जांच के दौरान इस मामले में संपूर्णानगर के गांव बमनगर निवासी सुरेश की संलिप्तता मिली। पुलिस ने जब जांच तेज की तो इस बात का खुलासा हुआ था कि सुरेश ने विनोद को नकली नोट बाजार में एक-एक कर चलाने के लिए दिए थे। जांच के दौरान उत्तराखंड के गांव गोथा (सितारगंज) निवासी राजमंगल और ऊधम सिंह नगर निवासी संतोष का नाम सामने आया। जांच में यह बात साफ हुई कि सुरेश की जान पहचान संतोष से थी। वे दोनों एक बार नेपाल गए थे। तब वहां उन्हें खोखे पर कुछ लोग बैठे मिले, जिन्होंने उन्होंने नकली नोट दिए थे। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार करके चार्जशीट तो दाखिल कर दी, लेकिन नेपाल से भारत में सप्लाई करने वाले का नाम पता पुलिस नहीं खोज पाई। नेपाल में यह नकली करेंसी कहां से आई। इसके पीछे किसका हाथ था, पुलिस और खुफिया एजेंसियां इसका भी पता नहीं लगा सकीं।
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वर्ष 2018 में छह जुलाई की शाम गांव बसही निवासी विनोद गांव सेमरी स्थित एक दुकान पर पहुंचा था। उसने बिस्कुट के दो पैकेट लिए और दुकानदार को 500 रुपये का नोट दिया। दुकानदार ने भी 20 रुपये काटकर उसे 480 रुपये उसे लौटा दिए थे। शक होने पर दुकानदार ने जब नोट को अच्छी तरह से देखा तो वह नकली पाया। दुकानदार ने विनोद को रोककर इस बारे में बात की तो वह भाग खड़ा हुआ और उसका एक लिफाफे वहीं गिर गया। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची संपूर्णानगर पुलिस ने जब लिफाफा खोले तो उसमें एक ही नंबर के 500 रुपये के 26 नोट निकले। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर तफ्तीश शुरू की।
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जांच के दौरान इस मामले में संपूर्णानगर के गांव बमनगर निवासी सुरेश की संलिप्तता मिली। पुलिस ने जब जांच तेज की तो इस बात का खुलासा हुआ था कि सुरेश ने विनोद को नकली नोट बाजार में एक-एक कर चलाने के लिए दिए थे। जांच के दौरान उत्तराखंड के गांव गोथा (सितारगंज) निवासी राजमंगल और ऊधम सिंह नगर निवासी संतोष का नाम सामने आया। जांच में यह बात साफ हुई कि सुरेश की जान पहचान संतोष से थी। वे दोनों एक बार नेपाल गए थे। तब वहां उन्हें खोखे पर कुछ लोग बैठे मिले, जिन्होंने उन्होंने नकली नोट दिए थे। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार करके चार्जशीट तो दाखिल कर दी, लेकिन नेपाल से भारत में सप्लाई करने वाले का नाम पता पुलिस नहीं खोज पाई। नेपाल में यह नकली करेंसी कहां से आई। इसके पीछे किसका हाथ था, पुलिस और खुफिया एजेंसियां इसका भी पता नहीं लगा सकीं।
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