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डॉक्टर साहब, कुछ तो करिए, नहीं तो घर बैठिए

Sun, 07 Jul 2019 02:45 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 07 Jul 2019 02:45 AM IST
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chief secretry stirred on hospital administraion on mismangment
ज:ला अस्पताल में मरीजों से हाल पूछते प्रमुख सचिव डॉ. रजनीश दुबे। - फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। नोडल अधिकारी डॉ. रजनीश दुबे तय कार्यक्रम के तहत शनिवार सुबह सवा नौ बजे ही जिला अस्पताल पहुंच गए। बारिश के कारण अस्पताल में भरे पानी को देखकर वह कई बार हतप्रभ हुए। मरीजों से बात करते हुए उन्हें पता लगा कि उनका सही से इलाज नहीं हो रहा है। तीन दिन से दुर्घटना के घायल मरीज का एक्स-रे तक न होने और कोई जांच न कराए जाने की बात पता करने पर वह भड़क गए। पास खड़े सीएमएस डॉ. आरके वर्मा से कहा कि डॉक्टर साहब, कुछ तो करिए, नहीं तो घर बैठिए। इस पर सीएमएस सकते में आ गए।
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करीब एक घंटे के निरीक्षण में अस्पताल का स्टाफ पसीना पसीना होता रहा। इस दौरान इमरजेंसी एवं और सर्जिकल वार्ड पुरुष सहित आईसीयू वार्ड का हाल देखा। वहीं सीएमएस ऑफिस में मासिक रिपोर्ट की समीक्षा के दौरान संविदा ईएनटी सर्जन डॉ. प्रियंका शर्मा द्वारा एक भी ऑपरेशन न करने एवं आर्थों सर्जन डॉ. सीएस सिंह द्वारा कम किए जाने पर नाराजगी जताते हुए ऑपेरशन करते रहने की नसीहत दी। वहीं 78 ऑपरेशन करने पर सर्जन डॉ. सतीश वर्मा एवं 33 ऑपरेशन करने पर नेत्र सर्जन डॉ. पूनम वर्मा की प्रशंसा की और उनके द्वारा बताए गए उपकरण मुहैया कराने के लिए डीएम को निर्देशित किया। इसके बाद इमरजेंसी पहुंचे। वहां ईएमओ डॉ. विवेक कुमार से बीमारियों के लक्षण के बाबत जानकारी ली। वहीं इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों से दवाएं, खाना एवं दूध मिलने के बाबत पूछा। पुरुष सर्जिकल वार्ड में भर्ती मरीजों का हाल देख उनका मूड खराब हो गया। चार जुलाई की रात सड़क हादसे में घायल हुए नीमगांव के सुतेहरा गांव निवासी 25 वर्षीय आनंद कुमार की 36 घंटे बाद भी जांच न कराए जाने पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए इलाज कर रहे सर्जन डॉ. हर्ष देव भारती से स्पष्टीकरण तलब करने को कहा। वहीं बेड नंबर 25 पर भर्ती 40 वर्षीय विशंभर पुत्र श्रीधर निवासी पहड़ियापुर से दवाएं और खाना मिलने की जानकारी ली। ईएनटी सर्जन डॉ. हर्षिता अवस्थी द्वारा निरंतर लिए जा रहे अवकाश का हिसाब मांगा। वहीं स्टोर प्रभारी फार्मासिस्ट आरके गुप्ता से दवाओं के स्टाक की जानकारी की, जिस पर उन्होंने कारपोरेशन से पर्याप्त दवाएं न मिलने एवं वर्तमान में एनएस, डीएनएस आदि फ्लूड का न होना बताया। इस दौरान सीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल, एसीएमओ डॉ. बलबीर सिंह, अखिलेश शर्मा, विमल श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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आईसीयू की हालत देख जताई नाराजगी
प्रमुख सचिव इमरजेंसी से आईसीयू वार्ड पहुंचे। यहां एक भी बच्चा भर्ती न मिलने पर उन्होंने डॉ. राजेश कुमार से जब इसकी जानकारी ली तो उन्होंने सिर्फ जापानी इंसेफ्लाइटिस एवं एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम से पीड़ित बच्चे ही भर्ती किए जाना बताया। इस पर प्रमुख सचिव ने मेडिकल कॉलेज से आईसीयू वार्ड का प्रोटोकॉल मंगाकर पढ़ने की नसीहत देते हुए गंभीर पीड़ित बच्चों को भी भर्ती करने को कहा।
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