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केमिकल रंग कहीं बे रंग न कर दें होली
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Tue, 22 Mar 2016 10:56 PM IST
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हाोली
- फोटो : अमर उजाला
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- सावधान रहकर खेलें होली में रंग
होली रंगाें का त्योहार है, लोग एक दूसरे को रंगों से सराबोर करेंगे, लेकिन इसमें सावधानी रखने की आवश्यकता है, कहीं यह रंग आप और आप के चहेतों के लिये मुश्किलें ना खड़ी कर दे। इसलिए रंगों की खरीद में सावधानी बरतें।
जिला अस्पताल के ईएमओ डा. अमित सिंह ने बताया कि बाजार में बिकने वाले सस्ते रंगों में कई तरह के हानिकारक केमिकल का प्रयोग होता है जो स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होते है, काले रंग में लेड ऑक्साइड का प्रयोग होता है, यह अगर पेट में चला जाए तो गुर्दे को नुकसान पहुंचा सकता है हरे रंग में कॉपर सल्फेट का प्रयोग होता है जिससे आँखों में एलर्जी हो सकती है। लाल रंग में मरकरी सल्फेट का इस्तेमाल होता है, जिससे त्वचा का कैंसर होने का खतरा रहता है, नीले रंग में प्रूसियन ब्लू का इस्तेमाल होता है जिससे त्वचा की सूजन, डर्माटाइटिस होने का खतरा रहता है। बैंगनी रंग में खरोमियम आयोडाइड का इस्तेमाल होता है जिससे अस्थमा, दमा और त्वचा की एलर्जी हो सकती है, सिल्वर रंग में एल्युमीनियम ब्रोमाइड का इस्तेमाल होता है इससे कैंसर होने का खतरा रहता है। इसलिए बाजार में रंगों की खरीद में खास सावधानी बरतें।
क्या बरते सावधानी
डा. अमित सिंह ने बताया कि बेहतर होगा की आम रंगों की जगह शुद्ध और सूखे हर्बल रंगों का इस्तेमाल किया जाए, रंग खेलने से पहले पूरी त्वचा पर बॉडीलोशन, क्रीम या मलाई लगा ले, रंग खेलने के बाद त्वचा को खुरचे नहीं, बल्कि बेसन या आटे के उबटन से धीरे-धीरे शरीर से रंग छुड़ाए, जिन लोगों को दमा और एलर्जी की परेशानी है वे रंगो से दूर ही रहें।
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परेशानी होने पर क्या करें
यदि किसी को रंगों की वजह से श्वांस लेने में दिक्कत होती है या त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली या आंखों में जलन होती है या आंखों से पानी आने की शिकायत होती है तो तत्काल पास के डॉक्टर को या अस्पताल में दिखाएं स्वयं कोई इलाज ना करें। - डा.अरुण कुमार, सीएमओ खीरी
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होली रंगाें का त्योहार है, लोग एक दूसरे को रंगों से सराबोर करेंगे, लेकिन इसमें सावधानी रखने की आवश्यकता है, कहीं यह रंग आप और आप के चहेतों के लिये मुश्किलें ना खड़ी कर दे। इसलिए रंगों की खरीद में सावधानी बरतें।
जिला अस्पताल के ईएमओ डा. अमित सिंह ने बताया कि बाजार में बिकने वाले सस्ते रंगों में कई तरह के हानिकारक केमिकल का प्रयोग होता है जो स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होते है, काले रंग में लेड ऑक्साइड का प्रयोग होता है, यह अगर पेट में चला जाए तो गुर्दे को नुकसान पहुंचा सकता है हरे रंग में कॉपर सल्फेट का प्रयोग होता है जिससे आँखों में एलर्जी हो सकती है। लाल रंग में मरकरी सल्फेट का इस्तेमाल होता है, जिससे त्वचा का कैंसर होने का खतरा रहता है, नीले रंग में प्रूसियन ब्लू का इस्तेमाल होता है जिससे त्वचा की सूजन, डर्माटाइटिस होने का खतरा रहता है। बैंगनी रंग में खरोमियम आयोडाइड का इस्तेमाल होता है जिससे अस्थमा, दमा और त्वचा की एलर्जी हो सकती है, सिल्वर रंग में एल्युमीनियम ब्रोमाइड का इस्तेमाल होता है इससे कैंसर होने का खतरा रहता है। इसलिए बाजार में रंगों की खरीद में खास सावधानी बरतें।
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क्या बरते सावधानी
डा. अमित सिंह ने बताया कि बेहतर होगा की आम रंगों की जगह शुद्ध और सूखे हर्बल रंगों का इस्तेमाल किया जाए, रंग खेलने से पहले पूरी त्वचा पर बॉडीलोशन, क्रीम या मलाई लगा ले, रंग खेलने के बाद त्वचा को खुरचे नहीं, बल्कि बेसन या आटे के उबटन से धीरे-धीरे शरीर से रंग छुड़ाए, जिन लोगों को दमा और एलर्जी की परेशानी है वे रंगो से दूर ही रहें।
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परेशानी होने पर क्या करें
यदि किसी को रंगों की वजह से श्वांस लेने में दिक्कत होती है या त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली या आंखों में जलन होती है या आंखों से पानी आने की शिकायत होती है तो तत्काल पास के डॉक्टर को या अस्पताल में दिखाएं स्वयं कोई इलाज ना करें। - डा.अरुण कुमार, सीएमओ खीरी