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चंपाकली-जयमाला लौटीं, मंझरा पूरब में बाघ की दहशत बरकरार

Thu, 23 Dec 2021 01:15 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 23 Dec 2021 01:15 AM IST
सार

दुधवा : बाघ का मूवमेंट बदलने के लिए लाए गए थे मादा हाथी
 

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Champakali-Jayamala returned, Tiger's terror continues in Manjhara East
demo photo - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

क्षेत्र में बाघ अब तक 13 लोगों की ले चुका है जान
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तिकुनिया। मझरा पूरब और आसपास के इलाके में दहशत का पर्याय बने बाघ का मूवमेंट बदलने आई दो प्रशिक्षित मादा हाथी को कर्तनियाघाट वन्यजीव विहार वापस भेज दिया गया है। उधर, कई दिनों से बाघ की लोकेशन जंगल से बाहर नही मिली है। इस क्षेत्र में बाघ अब तक 13 लोगों की जान ले चुका है।
जंगल से निकलकर खेतों में बसेरा बनाए बाघ ने 27 नवंबर को मंझरा के दुमेड़ा गांव के राममूर्ति को बाघ ने मार डाला था, जिससे गांव के लोग और किसान आक्रोशित थे। ग्रामीणों ने कुछ शर्तों के साथ ही शव को पुलिस के सुपुर्द किया था। वन विभाग ने बढ़ते आक्रोश को देखते हुए कर्तनिया रेंज से छह दिसंबर को दो प्रशिक्षित मादा हाथी जयमाला और चंपाकली को लाकर पेट्रोलिंग की। उद्देश्य था कि बाघ का मूवमेंट जंगल में ही रहे, बाहर न जाए।
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वन विभाग ने बाघ की निगरानी के लिए कैमरे भी लगाए, जिसमे एक बार बाघ की फोटो कैद भी हुई। विभाग ने बाघ को पकड़ने के लिए पिंजड़े भी लगाए गए, लेकिन बाघ जंगल में चला गया। रेंजर विमलेश कुमार ने बताया कि दोनों मादा हाथी कर्तनियाघाट वन्यजीव विहार भेज दिए गए हैं। पिछले कुछ दिनों से बाघ का मूवमेंट जंगल से बाहर नहीं है। बावजूद इसके टीम बराबर गश्त कर रही हैं।
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जंगली जानवर की तलाश में वन कर्मियों ने की कांबिंग
लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की धौरहरा रेंज के चकदहा गांव में जंगली जानवर की तलाश में वन विभाग की टीम ने क्षेत्र में कैंप कर मंगलवार रात भर कांबिंग की, लेकिन किसी जंगली जानवर का सुराग
धौरहरा रेंज के चकदहा गांव में दो दिन के अंदर जंगली जानवर के लगातार दो हमलों में जंगली जीव ने एक बच्ची को मार डाला था। इस घटना को लोग अभी भुला भी नहीं पाए थे कि सोमवार रात छप्पर में सो रहे ग्रामीण पर जंगली जानवर ने हमला कर दिया। जिससे वह बुरी तरह जख्मी हो गया। ग्रामीणों ने वन कर्मियों को सूचना देकर किसी तरह रात काटी। इलाज के बाद ग्रामीण की हालत अब सामान्य बताई जा रही है।
ग्रामीणों की सूचना पर चकदहा गांव पहुंची वन कर्मियों की टीम ने घटनास्थल के आसपास काफी खोजबीन की, लेकिन किसी हिंसक जीव के पगचिन्ह नहीं मिले। जिससे भेड़िए के हमले की आशंका जताई जा रही है। इसकी जानकारी मिलते ही दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक सुंदरेशा ने रेंजर धौरहरा गजेंद्र सिंह से वन कर्मियों की टीम चकदहा गांव भेजकर वहां रात में रुककर कैंप करने के निर्देश दिए। डीडी के निर्देश पर गांव में पहुंची वन कर्मियों की टीम में शामिल फॉरेस्टर सत्यप्रकाश वर्मा, सतीश मिश्रा, विवेक तिवारी, विजय, कैलाश और सोनेलाल ने गांव में कैंप कर हमलावर वन्यजीव की तलाश में रात भर कांबिंग की, लेकिन न सुराग हाथ लगा और न ही कोई जंगली जानवर दिखाई पड़ा।
निगरानी टीमों के मुताबिक, गांव में रात भर कैंप करने के बाद सघन तलाशी अभियान चलाया गया। इस दौरान किसी जंगली जानवर, तेंदुआ और किसी हिंसक वन्यजीव के पगचिन्ह नहीं मिले। फिलहाल कांबिंग अभियान लगातार जारी है।

धौरहरा रेंज के चकदहा गांव में जंगली जानवर के हमले के बाद वन कर्मियों की टीम क्षेत्र में कैंप कर इलाके की कांबिंग कर रही है, लेकिन अभी तक जानवर का सुराग नहीं मिला। साथ ही ग्रामीणों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है।
- सुंदरेशा, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन
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