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तराई एलीफैंट रिजर्व की स्थापना को केंद्र सरकार ने दी मंजूरी
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हाथियों का झुंड
इसकी स्थापना से हाथियों को मिलेगा विशेष संरक्षण
इसमें शामिल होंगे दुधवा टाइगर रिजर्व, पीलीभीत टाइगर रिजर्व और दक्षिण खीरी वन प्रभाग
लखीमपुर खीरी। तराई के जंगल में तराई एलीफैंट रिजर्व स्थापित करने की मंजूरी केंद्र सरकार ने दे दी है। तराई एलीफैंट रिजर्व में दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर), पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) और दक्षिण खीरी वन प्रभाग के जंगल शामिल होंगे। यह प्रदेश का दूसरा एलीफैंट टाइगर रिजर्व होगा। इसके जरिए जंगली और पालतू हाथियों की बेहतर ढंग से देखरेख हो सकेगी। हाथियों का बेहतर संरक्षण और संवद्घन किया जा सकेगा।
तराई एलीफैंट रिजर्व का प्रस्ताव करीब तीन साल पहले दुधवा टाइगर रिजर्व के तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर रमेश पांडेय ने भेजा था। इस प्रस्ताव पर गहन मंथन के बाद हाल ही में केंद्र सरकार ने मौजूदा फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक द्वारा प्रोजेक्ट के प्रजेंटेशन के बाद अपनी सैद्घांतिक मंजूरी दे दी है। जल्द ही इस पर काम शुरू हो जाएगा।
तराई एलीफैंट रिजर्व में दुधवा टाइगर रिजर्व का 2200 वर्ग किलोमीटर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व का 730 वर्ग किलोमीटर और दक्षिण खीरी वन प्रभाग का 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल जंगल शामिल होगा।
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डीटीआर में प्रदेश के सबसे ज्यादा हाथी
तराई एलीफैंट रिजर्व सूबे का दूसरा एलीफैंट रिजर्व होगा। इससे पहले सहारनपुर के शिवालिक में एलीफैंट रिजर्व स्थापित हुआ था। वह क्षेत्रफल में प्रस्तावित तराई एलीफैंट रिजर्व से काफी छोटा है। वर्ष 2019 में हुई गणना के मुताबिक, प्रदेश में कुल 352 हाथी हैं, जबकि अकेले दुधवा में 149 हाथी पाए गए थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 205 हो गई है। इनके अलावा दुधवा टाइगर रिजर्व में कुल 25 पालतू हाथी भी हैं जो सैलानियों को जंगल भ्रमण कराने के साथ ही पेट्रोलिंग कर जंगल की निगरानी करते हैं। यही नहीं दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगल नेपाली हाथियों का भी पसंदीदा ठिकाना हैं, जिसके चलते हर साल हाथियों के बड़े समूह यहां आकर महीनों प्रवास करते हैं।
तराई एलीफैंट रिजर्व बनने से होंगे यह फायदे
करीब 2830 वर्ग किलोमीटर में बनने वाले तराई एलीफैंट रिजर्व की स्थापना और संचालन में प्रोजेक्ट एलीफैंट वित्त पोषण करेगा। इससे जंगली और पालतू हाथियों की बेहतर देखभाल, रखरखाव और संरक्षण हो सकेगा। हाथियों के मूवमेंट के लिए एलीफैंट कॉरीडोर विकसित किए जाएंगे। पुराने कॉरीडोर का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। साथ ही हाथियों के इलाज के लिए डॉक्टरों की नियुक्ति होगी ताकि उन्हें समय पर इलाज उपलब्ध कराया जा सकेे। हाथियों के हमले में यदि किसी इंसान की मौत हो जाती है तो उसे इसी धनराशि से मुआवजा दिया जाएगा। वित्त पोषण में 60 फीसदी हिस्सेदारी केंद्र सरकार की और 40 फीसदी हिस्सेदारी राज्य सरकार की होगी।
तराई एलीफैंट रिजर्व के लिए केंद्र सरकार की सैद्घांतिक मंजूरी मिल गई है। बजट मिलते ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। एलीफैंट रिजर्व बनने से जंगली और पालतू हाथियों के बेहतर संरक्षण में मदद मिलेगी। दुनिया भर मे एशियन हाथियों की घटती संख्या को देखते हुए इनके संरक्षण के मद्देनजर तराई एलीफैंट रिजर्व की स्थापना का निर्णय लिया गया है।
- संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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इसमें शामिल होंगे दुधवा टाइगर रिजर्व, पीलीभीत टाइगर रिजर्व और दक्षिण खीरी वन प्रभाग
लखीमपुर खीरी। तराई के जंगल में तराई एलीफैंट रिजर्व स्थापित करने की मंजूरी केंद्र सरकार ने दे दी है। तराई एलीफैंट रिजर्व में दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर), पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) और दक्षिण खीरी वन प्रभाग के जंगल शामिल होंगे। यह प्रदेश का दूसरा एलीफैंट टाइगर रिजर्व होगा। इसके जरिए जंगली और पालतू हाथियों की बेहतर ढंग से देखरेख हो सकेगी। हाथियों का बेहतर संरक्षण और संवद्घन किया जा सकेगा।
तराई एलीफैंट रिजर्व का प्रस्ताव करीब तीन साल पहले दुधवा टाइगर रिजर्व के तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर रमेश पांडेय ने भेजा था। इस प्रस्ताव पर गहन मंथन के बाद हाल ही में केंद्र सरकार ने मौजूदा फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक द्वारा प्रोजेक्ट के प्रजेंटेशन के बाद अपनी सैद्घांतिक मंजूरी दे दी है। जल्द ही इस पर काम शुरू हो जाएगा।
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तराई एलीफैंट रिजर्व में दुधवा टाइगर रिजर्व का 2200 वर्ग किलोमीटर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व का 730 वर्ग किलोमीटर और दक्षिण खीरी वन प्रभाग का 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल जंगल शामिल होगा।
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डीटीआर में प्रदेश के सबसे ज्यादा हाथी
तराई एलीफैंट रिजर्व सूबे का दूसरा एलीफैंट रिजर्व होगा। इससे पहले सहारनपुर के शिवालिक में एलीफैंट रिजर्व स्थापित हुआ था। वह क्षेत्रफल में प्रस्तावित तराई एलीफैंट रिजर्व से काफी छोटा है। वर्ष 2019 में हुई गणना के मुताबिक, प्रदेश में कुल 352 हाथी हैं, जबकि अकेले दुधवा में 149 हाथी पाए गए थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 205 हो गई है। इनके अलावा दुधवा टाइगर रिजर्व में कुल 25 पालतू हाथी भी हैं जो सैलानियों को जंगल भ्रमण कराने के साथ ही पेट्रोलिंग कर जंगल की निगरानी करते हैं। यही नहीं दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगल नेपाली हाथियों का भी पसंदीदा ठिकाना हैं, जिसके चलते हर साल हाथियों के बड़े समूह यहां आकर महीनों प्रवास करते हैं।
तराई एलीफैंट रिजर्व बनने से होंगे यह फायदे
करीब 2830 वर्ग किलोमीटर में बनने वाले तराई एलीफैंट रिजर्व की स्थापना और संचालन में प्रोजेक्ट एलीफैंट वित्त पोषण करेगा। इससे जंगली और पालतू हाथियों की बेहतर देखभाल, रखरखाव और संरक्षण हो सकेगा। हाथियों के मूवमेंट के लिए एलीफैंट कॉरीडोर विकसित किए जाएंगे। पुराने कॉरीडोर का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। साथ ही हाथियों के इलाज के लिए डॉक्टरों की नियुक्ति होगी ताकि उन्हें समय पर इलाज उपलब्ध कराया जा सकेे। हाथियों के हमले में यदि किसी इंसान की मौत हो जाती है तो उसे इसी धनराशि से मुआवजा दिया जाएगा। वित्त पोषण में 60 फीसदी हिस्सेदारी केंद्र सरकार की और 40 फीसदी हिस्सेदारी राज्य सरकार की होगी।
तराई एलीफैंट रिजर्व के लिए केंद्र सरकार की सैद्घांतिक मंजूरी मिल गई है। बजट मिलते ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। एलीफैंट रिजर्व बनने से जंगली और पालतू हाथियों के बेहतर संरक्षण में मदद मिलेगी। दुनिया भर मे एशियन हाथियों की घटती संख्या को देखते हुए इनके संरक्षण के मद्देनजर तराई एलीफैंट रिजर्व की स्थापना का निर्णय लिया गया है।
- संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व