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Lakhimpur Kheri News: दुधवा में बारहसिंघा की आबादी बढ़ाने की शुरू हुई मुहिम

Thu, 11 May 2023 11:13 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 11 May 2023 11:13 PM IST
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Campaign to increase the population of reindeer started in Dudhwa
किशनपुर सेंक्चुरी के घास मैदान में बारासिंघा हिरनों का झुंड।
बांकेगंज/लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व में बारहसिंघा प्रजाति के हिरनों की संख्या बढ़ाने की मुहिम तेज होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर इसके लिए एक विशेष कार्य योजना तैयार की गई है। इसके तहत बारहसिंघा प्रजाति के हिरनों की पसंदीदा घास का विस्तार, ग्रासलैंड और वेटलैंड का बेहतर प्रबंधन, दलदली भूमि की स्थिति सुधारने के साथ-साथ झीलों और दूसरे बड़े वेटलैंड में टापू बनाए जाने की योजना है।
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दुधवा नेशनल पार्क की स्थापना वर्ष 1977 में विशेष रूप से बारहसिंघा प्रजाति के हिरनों के संरक्षण के लिए हुई थी। दुधवा में बारहसिंघा प्रजाति के हिरन बहुतायत में पाए जाते हैं। मौजूदा समय में इनकी संख्या करीब तीन हजार है। बारह सींगों के खूबसूरत मुकुट को धारण कर जंगल में कुलाचें भरते बारहसिंघा हिरनों के झुंड सैलानियों को काफी आकर्षित करते हैं। दुधवा के जंगल में बारहसिंघा के अलावा चार अन्य प्रजाति के चीतल, पाढ़ा, सांभर और काकड़ भी पाए जाते हैं।
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पांच प्रजातियों के हिरनों को एक साथ संजोने का गौरव सिर्फ दुधवा टाइगर रिजर्व को हासिल है। अन्य किसी भी जंगल में पांच प्रजातियों के हिरन एक साथ नहीं पाए जाते। बारहसिंघा का प्राकृतवास प्रमुख रूप से वेटलैंड के किनारे दलदली भूमि है। यह मुलायम घास खाना पसंद करते हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व का पूरा जंगल बारहसिंघा प्रजाति के हिरनों के लिए बेहद अनुकूल प्राकृतवास है, लेकिन बारहसिंघा हिरनों की संख्या बढ़ाने के लिए इनके हैबिटेट को और बेहतर बनाने की कार्ययोजना तैयार की गई है। जल्दी ही इस कार्ययोजना को अमल में लाकर काम शुरू कर दिया जाएगा।
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डीटीआर में बारहसिंघा के अनुकूल होगा ग्रासलैंड और वेटलैंड का प्रबंधन
बारहसिंघा के भोजन के लिए जंगल में इनकी पसंदीदा मुलायम घास का विस्तार किया जाएगा। इसके लिए घास के मैदानों का बेहतर प्रबंधन किया जाएगा। वेटलैंड के आसपास दलदली भूमि पर अन्य घासों को हटाकर दूब जैसी मुलायम घास तैयार की जाएगी। वेटलैंड का बेहतर प्रबंधन करके स्वच्छ और शुद्ध पानी उपलब्ध कराने का प्रयास होगा। इनके प्रवास वाले स्थानों पर ऐसी झाड़ियों और लताओं को हटाया जाएगा, जिसमें इनकी सींगों के फंसने का डर हो। डीटीआर की झीलों और दूसरे बड़े वेटलैंड्स पर टापू बनाए जाएंगे। जहां बारहसिंघा आसानी से विचरण कर सकें।


सुरक्षा के होंगे पुख्ता इंतजाम
बारहसिंघा की खूबसूरत सींगें,इनकी खाल और मांस के लिए शिकार होता है। शिकार पर प्रभावी अंकुश लगाने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए सूचनातंत्र को और मजबूत बनाया जाएगा। चारा, पानी की तलाश में बारहसिंघा न निकले इसकी भी कोशिश की जाएगी। क्योंकि जंगल से बाहर निकलने पर ही बारहसिंघा के शिकार का खतरा बढ़ जाता है। बारहसिंघा को चारा पानी जंगल में ही मिले इसका पूरा इंतजाम किया जा रहा है।
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