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2080 तक 15 जनवरी को मनेगी मकर संक्रांति
गोला गोकर्णनाथ
Updated Tue, 12 Jan 2016 06:55 PM IST
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ज्योतिष शास्त्र में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। सूर्य की परिक्रमा से ही ऋतु, अयन आदि परिवर्तित होते हैं। मकर राशि में सूर्य के प्रवेश करने की दशा भी विशेष महत्व रखती है।
यह बात पं. सुरेश कुमार मिश्र ने बताई। उन्होंने कहा कि सूर्य के उत्तरायण से देवताओं का दिन शुरू होता है। भीष्म पितामह ने सूर्य उत्तरायण होने पर ही अपना शरीर छोड़ा था। सूर्य उत्तरायण से विवाह, यज्ञ मुंडन, गृहप्रवेश इत्यादि शुभ कार्य शुरू हो जाते है। इसलिए 15 जनवरी से 11 मार्च तक विवाह मुहूर्त का संयोग है। दो मई से 30 मई तक शुक्र अस्त होने के कारण शुभ मुहूर्त का अभाव रहेगा। श्रीरामचरित मानस में भी मकर के सूर्य का विशेष महत्व बतलाया गया है इसलिए पौष की पूर्णिमा से माघ की पूर्णिमा तक कल्पवास का विधान है।
उन्होंने बताया कि सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश को मकर संक्रांति कहते हैं। प्रतिवर्ष सूर्य का धनु से मकर राशि में प्रवेश 20 मिनट विलंब से होता है। हर तीन साल के बाद सूर्य एक घंटा बाद मकर राशि में प्रवेश करता है। 72 वर्ष बाद एक दिन की देरी से सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। इस कारण 2080 तक मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी। मकर संक्रांति पर सूर्य उदय से पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में स्नान, दान, पूजा, पाठ आदि का विधान है, जिससे व्यक्ति को यशस्वी जीवन की प्राप्ति होती है।
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यह बात पं. सुरेश कुमार मिश्र ने बताई। उन्होंने कहा कि सूर्य के उत्तरायण से देवताओं का दिन शुरू होता है। भीष्म पितामह ने सूर्य उत्तरायण होने पर ही अपना शरीर छोड़ा था। सूर्य उत्तरायण से विवाह, यज्ञ मुंडन, गृहप्रवेश इत्यादि शुभ कार्य शुरू हो जाते है। इसलिए 15 जनवरी से 11 मार्च तक विवाह मुहूर्त का संयोग है। दो मई से 30 मई तक शुक्र अस्त होने के कारण शुभ मुहूर्त का अभाव रहेगा। श्रीरामचरित मानस में भी मकर के सूर्य का विशेष महत्व बतलाया गया है इसलिए पौष की पूर्णिमा से माघ की पूर्णिमा तक कल्पवास का विधान है।
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उन्होंने बताया कि सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश को मकर संक्रांति कहते हैं। प्रतिवर्ष सूर्य का धनु से मकर राशि में प्रवेश 20 मिनट विलंब से होता है। हर तीन साल के बाद सूर्य एक घंटा बाद मकर राशि में प्रवेश करता है। 72 वर्ष बाद एक दिन की देरी से सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। इस कारण 2080 तक मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी। मकर संक्रांति पर सूर्य उदय से पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में स्नान, दान, पूजा, पाठ आदि का विधान है, जिससे व्यक्ति को यशस्वी जीवन की प्राप्ति होती है।
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