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कुपोषित और गर्भवती महिलाओं को नहीं बट रहा देशी घी-दही
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Sun, 18 Sep 2016 11:56 PM IST
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हौसला पोषण मिशन
- फोटो : अमर उजाला
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हौसला पोषण मिशन पर हड़ताल का ग्रहण
10 अगस्त को 3403 आंगनबाड़ी केंद्रों पर हुई थी योजना की शुरुआत
दो सितंबर से आंगनबाड़ी वर्कर्स अनिश्चितकालीन हड़ताल पर
प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना हौसला पोषण मिशन अपने शुरुआती दौर में ही दम तोड़ चुकी है। ग्रामीण क्षेत्र के 3403 आंगनबाड़ी केंद्रों 10 अगस्त 2016 को शुरू की गई, इस योजना में अतिकुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन देशी घी एवं दही देने का प्राविधान है। बमुश्किल एक पखवाड़ा संचालन के बाद ही योजना ठप हो गई, क्योंकि आंगनबाड़ी वर्कर्स अपनी मांगों को लेकर दो सितंबर 2016 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। वहीं, हड़ताल के शुरू होने के दूसरे दिन तीन सितंबर से जिला कार्यक्रम अधिकारी अखिलेंद्र दुबे भी अवकाश पर चले गए, जो अभी लौटे नहीं, बल्कि अवकाश को आगे बढ़ा दिया है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रतिदिन अतिकुपोषित बच्चों को 20 ग्राम देशी घी और गर्भवती महिला को 175 मिली दूध या दही दिया जाना है। इसके साथ ही मिड-डे मील की भांति गर्म भोजन और फल भी दिया जाना था। जिले में 57,200 गर्भवती महिलाएं और 37,519 अतिकुपोषित बच्चे पंजीकृत हैं। 10 अगस्त को योजना की शुरुआत करने के बाद दो सितंबर से मांगों को लेकर आंगनबाड़ी वर्कर्स के हड़ताल पर जाने से केंद्रों पर ताले लटके हैं, जिससे कुपोषित बच्चे और गर्भवती महिलाएं लाभ पाने से वंचित हो गई हैं।
52.50 लाख देशी घी और 20.47 लाख दूध पर खर्च
विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो आंगनबाड़ी केंद्रों पर अभी तक कुपोषित बच्चों को 12 हजार 947 लीटर देशी घी पिलाया जा चुका है, जिसके लिए पीसीडीएफ को विभाग ने 52.50 लाख रुपये भुगतान किया है। जबकि गर्म भोजन और फल वितरण के लिए ग्राम प्रधान और आंगनबाड़ी वर्कर के संयुक्त खाते में 94 लाख 26 हजार 455 रुपये भेजे जा चुके हैं। वहीं गर्भवती महिलाओं को 6916 किग्रा दूध/दही बांटा जा चुका है, जिसके लिए पीसीडीएफ को 20 लाख 47 हजार 551 रुपये भुगतान किया गया है। जबकि गर्म भोजन और फल देने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों के खातों में एक करोड़ 57 लाख 14 हजार 260 रुपये भेजे जा चुके हैं।
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केंद्रों पर वितरण ठप, फिर भी विभाग ने भेजी डिमांड
इस योजना में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि सीडीओ अमित सिंह बंसल के सवालों के जवाब में प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी अनिल वर्मा भी आंगनबाड़ी केंद्रों के बंद होने या चालू होने की सूचना नहीं दे सके। वहीं विभाग आंगनबाड़ी केंद्रों पर वितरण के लिए 7396 लीटर दूध और 13293.5 लीटर देशी घी की डिमांड आठ सितंबर 2016 को ही पीसीडीएफ को भेज चुका है।
आंगनबाड़ी वर्कर की हड़ताल से कितने केंद्र बंद हैं और कहां-कहां पोषाहार का उठान नहीं हुआ है। इसकी रिपोर्ट प्रभारी डीपीओ से मांगी गई है। हौसला पोषण मिशन की समीक्षा की जा रही है। यदि गड़बड़ी मिलती है, तो दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
- अमित सिंह बंसल, सीडीओ
10 अगस्त को 3403 आंगनबाड़ी केंद्रों पर हुई थी योजना की शुरुआत
दो सितंबर से आंगनबाड़ी वर्कर्स अनिश्चितकालीन हड़ताल पर
प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना हौसला पोषण मिशन अपने शुरुआती दौर में ही दम तोड़ चुकी है। ग्रामीण क्षेत्र के 3403 आंगनबाड़ी केंद्रों 10 अगस्त 2016 को शुरू की गई, इस योजना में अतिकुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन देशी घी एवं दही देने का प्राविधान है। बमुश्किल एक पखवाड़ा संचालन के बाद ही योजना ठप हो गई, क्योंकि आंगनबाड़ी वर्कर्स अपनी मांगों को लेकर दो सितंबर 2016 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। वहीं, हड़ताल के शुरू होने के दूसरे दिन तीन सितंबर से जिला कार्यक्रम अधिकारी अखिलेंद्र दुबे भी अवकाश पर चले गए, जो अभी लौटे नहीं, बल्कि अवकाश को आगे बढ़ा दिया है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रतिदिन अतिकुपोषित बच्चों को 20 ग्राम देशी घी और गर्भवती महिला को 175 मिली दूध या दही दिया जाना है। इसके साथ ही मिड-डे मील की भांति गर्म भोजन और फल भी दिया जाना था। जिले में 57,200 गर्भवती महिलाएं और 37,519 अतिकुपोषित बच्चे पंजीकृत हैं। 10 अगस्त को योजना की शुरुआत करने के बाद दो सितंबर से मांगों को लेकर आंगनबाड़ी वर्कर्स के हड़ताल पर जाने से केंद्रों पर ताले लटके हैं, जिससे कुपोषित बच्चे और गर्भवती महिलाएं लाभ पाने से वंचित हो गई हैं।
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52.50 लाख देशी घी और 20.47 लाख दूध पर खर्च
विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो आंगनबाड़ी केंद्रों पर अभी तक कुपोषित बच्चों को 12 हजार 947 लीटर देशी घी पिलाया जा चुका है, जिसके लिए पीसीडीएफ को विभाग ने 52.50 लाख रुपये भुगतान किया है। जबकि गर्म भोजन और फल वितरण के लिए ग्राम प्रधान और आंगनबाड़ी वर्कर के संयुक्त खाते में 94 लाख 26 हजार 455 रुपये भेजे जा चुके हैं। वहीं गर्भवती महिलाओं को 6916 किग्रा दूध/दही बांटा जा चुका है, जिसके लिए पीसीडीएफ को 20 लाख 47 हजार 551 रुपये भुगतान किया गया है। जबकि गर्म भोजन और फल देने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों के खातों में एक करोड़ 57 लाख 14 हजार 260 रुपये भेजे जा चुके हैं।
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केंद्रों पर वितरण ठप, फिर भी विभाग ने भेजी डिमांड
इस योजना में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि सीडीओ अमित सिंह बंसल के सवालों के जवाब में प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी अनिल वर्मा भी आंगनबाड़ी केंद्रों के बंद होने या चालू होने की सूचना नहीं दे सके। वहीं विभाग आंगनबाड़ी केंद्रों पर वितरण के लिए 7396 लीटर दूध और 13293.5 लीटर देशी घी की डिमांड आठ सितंबर 2016 को ही पीसीडीएफ को भेज चुका है।
आंगनबाड़ी वर्कर की हड़ताल से कितने केंद्र बंद हैं और कहां-कहां पोषाहार का उठान नहीं हुआ है। इसकी रिपोर्ट प्रभारी डीपीओ से मांगी गई है। हौसला पोषण मिशन की समीक्षा की जा रही है। यदि गड़बड़ी मिलती है, तो दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
- अमित सिंह बंसल, सीडीओ