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Lakhimpur Kheri News: फूलने लगी अस्थमा रोगियों की सांस, गले में बढ़ा संक्रमण
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लखीमपुर खीरी। अस्थमा रोगियों पर ठंड भारी पड़ रही है। जिला अस्पताल में 15 से 20 प्रतिशत मरीजों की संख्या बढ़ी है। ठंड में श्वास नली सिकुड़ने से सांस लेने में दिक्कत हो जाती है।
ठंडे से अस्थमा रोगियों की सांस फूलने लगी है। साथ ही गले में संक्रमण भी तेजी से फैलने लगा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में अस्थमा और गले में संक्रमण के रोगियों की संख्या बढ़ी है। फिजिशियन डॉ. रोहित पाठक ने बताया कि अधिक ठंड पड़ने पर लोग तमाम प्रकार की बीमारियों की चपेट में आ जाते है।
सबसे ज्यादा सर्दी, जुकाम, बुखार और खांसी के मामले आते है। डॉ. शशांक तिवारी ने बताया कि सर्दी अस्थमा रोगियों के लिए घातक है। अधिक सर्दी में सांस नली सुकड़ जाती है, जिसकी वजह से मरीजों को सांस लेने की तकलीफ बढ़ जाती है। ऐसे 15 से 20 प्रतिशत मरीजों में इजाफा देखने को मिला है।
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उन्होंने बताया कि अस्थमा रोगी को सांस लेने में दिक्कत होती है। सांस लेने पर सीटी जैसी आवाज सुनाई दे या फिर सीने में घड़घड़ाहट हो तो तत्काल डॉक्टर को दिखाए।
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अस्थमा रोगी ठंड में यह बरतें सावधानी
सांस फूलने पर दवा इनहेल करें।
अस्थमा रोगी मास्क लगाएं, ताकि सीधे ठंडी हवा में सांस न जाए।
गुनगुने पानी का गरारा करते रहें जिससे गले में सूजन न हो।
ज्यादा ठंडे खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल करने से बचें।
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ठंडे से अस्थमा रोगियों की सांस फूलने लगी है। साथ ही गले में संक्रमण भी तेजी से फैलने लगा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में अस्थमा और गले में संक्रमण के रोगियों की संख्या बढ़ी है। फिजिशियन डॉ. रोहित पाठक ने बताया कि अधिक ठंड पड़ने पर लोग तमाम प्रकार की बीमारियों की चपेट में आ जाते है।
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सबसे ज्यादा सर्दी, जुकाम, बुखार और खांसी के मामले आते है। डॉ. शशांक तिवारी ने बताया कि सर्दी अस्थमा रोगियों के लिए घातक है। अधिक सर्दी में सांस नली सुकड़ जाती है, जिसकी वजह से मरीजों को सांस लेने की तकलीफ बढ़ जाती है। ऐसे 15 से 20 प्रतिशत मरीजों में इजाफा देखने को मिला है।
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उन्होंने बताया कि अस्थमा रोगी को सांस लेने में दिक्कत होती है। सांस लेने पर सीटी जैसी आवाज सुनाई दे या फिर सीने में घड़घड़ाहट हो तो तत्काल डॉक्टर को दिखाए।
अस्थमा रोगी ठंड में यह बरतें सावधानी
सांस फूलने पर दवा इनहेल करें।
अस्थमा रोगी मास्क लगाएं, ताकि सीधे ठंडी हवा में सांस न जाए।
गुनगुने पानी का गरारा करते रहें जिससे गले में सूजन न हो।
ज्यादा ठंडे खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल करने से बचें।