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Lakhimpur Kheri News: स्तनपान कराने से कम होता है स्तन कैंसर का खतरा
Sun, 12 Oct 2025 11:39 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 12 Oct 2025 11:39 PM IST
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लखीमपुर खीरी। महिलाओं में स्तन कैंसर के केस बढ़ रहे हैं। हालांकि ऐसा माना जाता है कि स्तनपान न केवल शिशु के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह महिला के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। जो महिलाएं अपने बच्चों को स्तनपान कराती हैं, उनमें स्तन कैंसर का खतरा काफी कम होता है।
जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अमित कुमार गुप्ता ने बताया कि स्तनपान कराने से महिलाओं के शरीर में हार्मोनल संतुलन बेहतर रहता है। इससे एस्ट्रोजन नामक हार्मोन का स्तर नियंत्रित होता है जो स्तन कैंसर का एक प्रमुख कारण माना जाता है। जो महिलाएं अपने बच्चों को छह महीने या उससे अधिक समय तक स्तनपान कराती हैं, उनमें स्तन कैंसर का खतरा लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक कम देखा गया है।
बताया कि अधिकांश मामलों का पता उन्नत चरणों (स्टेज 3 और 4) में चलता है, जिससे जीवित रहने की संभावना कम हो जाती है। हालांकि समय से पता लगने पर ऑपरेशन, रेडियो थेरेपी, कीमोथेरेपी से सामान्य जीवन व्यतीत किया जा सकता है।
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चिकित्सकों का कहना है कि स्तनपान न केवल मां के लिए बल्कि शिशु के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। इससे शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और उसे संक्रमणों से सुरक्षा मिलती है। वहीं, महिला में गर्भाशय संबंधी संक्रमण, मोटापा और डायबिटीज का खतरा भी घटता है। इसलिए प्रसव के बाद यथासंभव अपने बच्चे को स्तनपान अवश्य कराएं।
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इन कारणों से हो सकता है स्तन कैंसर
-अधिक वजन या मोटापा होने से स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
-नियमित व्यायाम न करने से जोखिम बढ़ सकता है।
-शराब और धूम्रपान के सेवन से स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
-30 साल की उम्र के बाद पहली गर्भावस्था और बच्चों को स्तनपान न कराने से जोखिम बढ़ सकता है।
-पारिवारिक इतिहास या आनुवंशिक उत्परिवर्तन होना
-शारीरिक रूप से सक्रिय न होना शामिल है।
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महिलाएं स्वयं कर सकती हैं इसकी जांच
डॉ. अमित कुमार गुप्ता ने बताया कि महिला इसकी जांच स्वयं कर सकती हैं। उन्हें यदि स्तन में कोई गांठ महसूस हो। त्वचा में नारंगी के छिलके जैसी सिकुड़न दिखाई दे। गांठ कड़ी हो जाए या चेस्ट की दीवार से चिपकी महसूस हो। निप्पल से डिस्चार्ज या खून आता हो तो तुरंत अपने डॉक्टर को दिखाएं और स्तन कैंसर की जांच कराएं।
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जिला अस्पताल में होती है जांच
जिला अस्पताल में पैथोलॉजी के डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि यहां पैथोलॉजी में साइटोलॉजी एफएनएसी (सुई की जांच) से जांच की जाती है। उन्होंने बताया कि 100 जांचों में करीब पांच से छह महिलाओं में स्तन कैंसर के लक्षण सामने आ जाते हैं। बताया कि यह साधारण सी जांच होती है। समस्या लगने पर तुरंत जांच कराएं।
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जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अमित कुमार गुप्ता ने बताया कि स्तनपान कराने से महिलाओं के शरीर में हार्मोनल संतुलन बेहतर रहता है। इससे एस्ट्रोजन नामक हार्मोन का स्तर नियंत्रित होता है जो स्तन कैंसर का एक प्रमुख कारण माना जाता है। जो महिलाएं अपने बच्चों को छह महीने या उससे अधिक समय तक स्तनपान कराती हैं, उनमें स्तन कैंसर का खतरा लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक कम देखा गया है।
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बताया कि अधिकांश मामलों का पता उन्नत चरणों (स्टेज 3 और 4) में चलता है, जिससे जीवित रहने की संभावना कम हो जाती है। हालांकि समय से पता लगने पर ऑपरेशन, रेडियो थेरेपी, कीमोथेरेपी से सामान्य जीवन व्यतीत किया जा सकता है।
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चिकित्सकों का कहना है कि स्तनपान न केवल मां के लिए बल्कि शिशु के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। इससे शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और उसे संक्रमणों से सुरक्षा मिलती है। वहीं, महिला में गर्भाशय संबंधी संक्रमण, मोटापा और डायबिटीज का खतरा भी घटता है। इसलिए प्रसव के बाद यथासंभव अपने बच्चे को स्तनपान अवश्य कराएं।
इन कारणों से हो सकता है स्तन कैंसर
-अधिक वजन या मोटापा होने से स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
-नियमित व्यायाम न करने से जोखिम बढ़ सकता है।
-शराब और धूम्रपान के सेवन से स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
-30 साल की उम्र के बाद पहली गर्भावस्था और बच्चों को स्तनपान न कराने से जोखिम बढ़ सकता है।
-पारिवारिक इतिहास या आनुवंशिक उत्परिवर्तन होना
-शारीरिक रूप से सक्रिय न होना शामिल है।
महिलाएं स्वयं कर सकती हैं इसकी जांच
डॉ. अमित कुमार गुप्ता ने बताया कि महिला इसकी जांच स्वयं कर सकती हैं। उन्हें यदि स्तन में कोई गांठ महसूस हो। त्वचा में नारंगी के छिलके जैसी सिकुड़न दिखाई दे। गांठ कड़ी हो जाए या चेस्ट की दीवार से चिपकी महसूस हो। निप्पल से डिस्चार्ज या खून आता हो तो तुरंत अपने डॉक्टर को दिखाएं और स्तन कैंसर की जांच कराएं।
जिला अस्पताल में होती है जांच
जिला अस्पताल में पैथोलॉजी के डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि यहां पैथोलॉजी में साइटोलॉजी एफएनएसी (सुई की जांच) से जांच की जाती है। उन्होंने बताया कि 100 जांचों में करीब पांच से छह महिलाओं में स्तन कैंसर के लक्षण सामने आ जाते हैं। बताया कि यह साधारण सी जांच होती है। समस्या लगने पर तुरंत जांच कराएं।