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जैव विविधता से दुधवा मालामाल पर खतरों की भरमार

Mon, 05 Oct 2020 01:18 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 05 Oct 2020 01:18 AM IST
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bio diversity week special
महुरेना बफरजोन जंगल से गुजरी गोला-खुटार हाईवे रोड। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व अपनी जैव विविधता के लिए न केवल भारतवर्ष बल्कि पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है। भारत-नेपाल की सीमा पर एक विस्तृत क्षेत्र में फैला दुधवा टाइगर रिजर्व का जंगल दुर्लभ वन्य प्राणियों से जितना मालामाल है उतनी ही इसकी सुरक्षा को लेकर चुनौतियां भी हैं। जंगल के कोरजोन से गुजरती रेल लाइन जंगल की सड़कों पर तेज रफ्तार से फर्राटा भरते वाहन हर साल बेजुबान जानवरों की जान ले रहे हैं। कहीं शिकार का खतरा तो कहीं मानव-वन्यजीव संघर्ष में बाघ समेत दुर्लभ प्राणियों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व जैव विविधता के लिहाज से पूरी दुनिया में बेजोड़ है। यहां की शीतोष्ण जलवायु दुनिया में पाए जाने वाले अधिकांश जीवों, वनस्पतियों को फलने-फूलने और बढ़ने के प्रति अनुकूल है। इसके साथ ही इन वन्य प्राणियों के लिए अनेकों खतरे वन विभाग के लिए चुनौती हैं। जंगल के अंदर से गुजरने वाले रास्ते न केवल दुर्घटनाओं का सबब बनते हैं बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिवास में भी खलल डालते हैं।
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दुधवा टाइगर रिजर्व जंगल के अंदर से कई प्रमुख रास्ते गुजरते हैं। इन पर छोटे से लेकर भारी वाहनों का भी आवागमन होता है। मैलानी-भीरा, पलिया-गौरीफंटा, पलिया-चंदनचौकी ऐसी सड़कें हैं जो डीटीआर के कोरजोन जंगल से होकर निकली हैं। इसके अलावा बफरजोन में गोला-खुटार, भीरा-कुकरा, कुकरा-गोला रोड जैसी व्यस्त सड़कें हैं। वन विभाग ने जंगल के इन रास्तों पर चलने वाले वाहनों की अधिकतम गति सीमा 30 किलोमीटर प्रतिघंटा निर्धारित कर रखी है। जबकि वाहन चालक इस गति सीमा का उल्लंघन करते हुए फर्राटा भरते हैं। रात के समय इन रास्तों पर आवागमन प्रतिबंधित है। फिर भी पूरी रात इन सड़कों पर आवागमन रहता है। इससे वन्यजीवों के लिए हर समय खतरा मंडराता रहता है।
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अब तक बाघ-तेंदुओ समेत कई वन्यजीव हो चुके हादसों का शिकार
जंगल के रास्तों पर तेज रफ्तार में चलते वाहनों की चपेट में आकर पिछले दस साल के अंदर सात बाघ और एक तेंदुआ काल के गाल में समा चुके है। साथ ही बड़ी संख्या में हिरन, बंदर भी दुर्घटनाओं में मारे गए।

वन्यजीवों के मरने की प्रमुख घटनाएं
1997-किशनपुर सेंक्चुरी में सड़क पार करते समय वाहन की चपेट में आकर बाघ की मौत।
2011- पुवायां रेंज में सड़क हादसे में बाघ की मौत।
2011- भीरा-पलिया रोड पर सड़क हादसे में बाघ की मौत, शव कई दिनों बाद मिला।
2011- भीरा-खुटार रोड पर वाहन की चपेट में आकर बाघ की मौत।
2012- मैलानी रेंज के महुरेना जंगल में सड़क हादसे में बाघ की मौत, शव कई दिनों बाद मिला।
2012- किशनपुर सेंक्चुरी की मैलानी- भीरा रोड पर जुलाई में टाटा 407 की टक्कर से बाघिन की मौत।
18 जनवरी 2015- किशनपुर सेंक्चुरी में मैलानी-भीरा रोड पर कुरियानी गांव के पास वाहन की चपेट में आकर नर तेंदुए की मौत।
18 अगस्त 2017 कतर्निया घाट में गोंडा-मैलानी रेल लाइन पर ट्रेन की चपेट में आकर बाघिन की मौत।
24 जनवरी 2018- किशनपुर सेंक्चुरी की मैलानी-भीरा रोड पर वाहन की चपेट में आकर चीतल की मौत।
09 मई 2018- इसी रेंज की मैलानी-भीरा रोड पर वाहन की चपेट में आकर बंदर की मौत।
02 दिसंबर- 2018- इसी रेंज में मैलानी- भीरा रोड पर वाहन की चपेट में आकर चीतल की मौत।
25 फरवरी 2020- दुधवा में वाहन की चपेट में आकर बंदर की मौत।
10 जुलाई 2020- दुधवा में वाहन की चपेट में आकर चीतल की मौत।
30 सितंबर 2020- मैलानी -भीरा रोड पर टूरिस्ट बस की चपेट में आकर बंदर की मौत।
जंगल के रास्तों पर गुजरने वाले वाहनों की अधिकतम गति सीमा 30 किलोमीटर प्रतिघंटा निर्धारित है। इससे अधिक रफ्तार में वाहन चलाने पर कार्रवाई की जाती है। यदि किसी वाहन से वन्यजीव दुर्घटनाग्रस्त होता है तो उसके लिए कठोर दंड का प्रावधान है।
- संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व।
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