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पहले रेलवे, फिर नोटबंदी से शराब के लाइसेंसी हलकान
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Tue, 06 Dec 2016 10:06 PM IST
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शराब
- फोटो : अमर उजाला
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देशी दुकानों का रिन्यूवल कराने से कतरा रहे कारोबारी
विधानसभा चुनावों के मद्देनजर शासन ने इस बार निश्चित समय से दो माह पहले ही शराब दुकानों का व्यवस्थापन शुरू कर दिया है। पहले चरण में सभी 432 शराब लाइसेंसों का रिन्यूवल होना है, जिसके लिए आठ दिसंबर 2016 तक फार्म बिक्री और जमा किए जाएंगे। इसके बाद रिन्यूवल से छूटी हुई दुकानों का लाटरी सिस्टम से आवंटन किया जाएगा। तीन दिनों में सिर्फ 92 दुकानों के रिन्यूवल फार्म बिक सके। देशी शराब की दुकानों का रिन्यूवल कराने से कई कारोबारी कन्नी काट रहे हैं।
अंग्रेजी शराब के रेट कम होने से देशी शराब की बिक्री में भी कमी आई थी, जिसके बाद रेलवे बंद होने का असर भी पड़ा है। इसके बाद नोटबंदी ने देशी शराब कारोबारियों की कमर ही तोड़ दी है। जिले में कुल 432 शराब दुकानें संचालित हैं, जिनमें 264 देशी, 98 अंग्रेजी और 68 बीयर की दुकानें हैं। जबकि दो मॉडल शॉप हैं। रिन्यूवल के पहले दिन चार दिसंबर को एक भी लाइसेंसी ने फार्म नहीं खरीदा था, जिसके बाद छह दिसंबर तक 35 देशी, 21 अंग्रेजी और 36 बीयर दुकानों के फार्म बिके हैं।
सूत्रों की माने तो देशी शराब की कई दुकानें रिन्यूवल में छूट रहीं हैं, जिससे आबकारी विभाग के सामने चुनौती आनी तय है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि तीन कारणों से देशी शराब की बिक्री कम हुई है। मसलन 15 अक्तूबर से ट्रेनों का संचालन बंद होने से शराब की बिक्री पर असर पड़ा था, जिसके बाद अब नोटबंदी का तगड़ा असर हुआ है। वहीं अंग्रेजी और देशी शराब के रेट में अंतर कम होना भी एक वजह मानी जा रही है।
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अंग्रेजी और बीयर दुकानों के रिन्यूवल में अभी कोई दिक्कत नहीं नजर आ रही है, लेकिन देशी शराब की कई दुकानें रिन्यूवल न होने से छूट सकती है। छूटी हुई दुकानों का व्यवस्थापन लाटरी सिस्टम से किया जाएगा, जिसके लिए विज्ञप्ति जारी की जाएगी।
अतुल प्रकाश श्रीवास्तव, जिला आबकारी अधिकारी
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विधानसभा चुनावों के मद्देनजर शासन ने इस बार निश्चित समय से दो माह पहले ही शराब दुकानों का व्यवस्थापन शुरू कर दिया है। पहले चरण में सभी 432 शराब लाइसेंसों का रिन्यूवल होना है, जिसके लिए आठ दिसंबर 2016 तक फार्म बिक्री और जमा किए जाएंगे। इसके बाद रिन्यूवल से छूटी हुई दुकानों का लाटरी सिस्टम से आवंटन किया जाएगा। तीन दिनों में सिर्फ 92 दुकानों के रिन्यूवल फार्म बिक सके। देशी शराब की दुकानों का रिन्यूवल कराने से कई कारोबारी कन्नी काट रहे हैं।
अंग्रेजी शराब के रेट कम होने से देशी शराब की बिक्री में भी कमी आई थी, जिसके बाद रेलवे बंद होने का असर भी पड़ा है। इसके बाद नोटबंदी ने देशी शराब कारोबारियों की कमर ही तोड़ दी है। जिले में कुल 432 शराब दुकानें संचालित हैं, जिनमें 264 देशी, 98 अंग्रेजी और 68 बीयर की दुकानें हैं। जबकि दो मॉडल शॉप हैं। रिन्यूवल के पहले दिन चार दिसंबर को एक भी लाइसेंसी ने फार्म नहीं खरीदा था, जिसके बाद छह दिसंबर तक 35 देशी, 21 अंग्रेजी और 36 बीयर दुकानों के फार्म बिके हैं।
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सूत्रों की माने तो देशी शराब की कई दुकानें रिन्यूवल में छूट रहीं हैं, जिससे आबकारी विभाग के सामने चुनौती आनी तय है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि तीन कारणों से देशी शराब की बिक्री कम हुई है। मसलन 15 अक्तूबर से ट्रेनों का संचालन बंद होने से शराब की बिक्री पर असर पड़ा था, जिसके बाद अब नोटबंदी का तगड़ा असर हुआ है। वहीं अंग्रेजी और देशी शराब के रेट में अंतर कम होना भी एक वजह मानी जा रही है।
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अंग्रेजी और बीयर दुकानों के रिन्यूवल में अभी कोई दिक्कत नहीं नजर आ रही है, लेकिन देशी शराब की कई दुकानें रिन्यूवल न होने से छूट सकती है। छूटी हुई दुकानों का व्यवस्थापन लाटरी सिस्टम से किया जाएगा, जिसके लिए विज्ञप्ति जारी की जाएगी।
अतुल प्रकाश श्रीवास्तव, जिला आबकारी अधिकारी