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बीएड प्रशिक्षुओं के शिक्षण का समापन
लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 04 Feb 2015 06:48 PM IST
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युवराजदत्त महाविद्यालय में बीएड प्रशिक्षुओं का शिक्षण अभ्यास का समापन हो गया। इस मौके पर गांधी विद्यालय इंटर कॉलेज में एक कार्यक्रम हुआ। जिसका शुभारंभ इसी विद्यालय के प्रधानाचार्य नारायण सिंह चौहान ने किया। अंतिमा वर्मा, सीमा, प्रज्ञा शुक्ला ने मां सरस्वती की वंदना, अंतिमा और लक्ष्मी नाग ने ईश वंदना प्रस्तुत की। किरन, नीलम, कविता आदि छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में सचिन, वैभव मिश्र, अजीत कुमार और प्रतिभा कश्यप ने शिक्षण के दौरान मिले अनुभवों को एक दूसरे मेें बांटते हुए शिक्षण अभ्यास को उपयोगी बताया। छात्राध्यापक अजीत कुमार ने काव्य पाठ किया। इस मौके पर शिक्षा विभाग के वरिष्ठ प्रवक्ता सत्यनाम और डॉ. मनोज मिश्र ने प्रायोगिक शिक्षण अभ्यास की व्यावहारिक शिक्षण में उपयोगिता और महत्व को रेखांकित किया। गांधी विद्यालय इंटर कॉलेज के शिक्षकों रामजी, रामेंद्र गुप्ता ने छात्रों को उनके भावी शैक्षिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण टिप्स दिए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नारायण सिंह चौहान ने विभिन्न उदाहरणों से शिक्षक के कर्तव्यों की व्याख्या की। छात्राध्यापकों को भविष्य में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं के संभावित समाधानों के लिए मार्गदर्शन भी दिया। अपने अध्यक्षीय भाषण में विभागाध्यक्ष विशाल द्विवेदी ने प्रधानाचार्य और सभी शिक्षकों का आभार व्यक्त करने के साथ ही एक सफल शिक्षक के लिए इंद्रीय प्रशिक्षण की व्याख्या भागवत गीता में उल्लखित निर्देशों के अनुसार की और इसे अपने जीवन में अपनाने पर बल दिया। विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल द्विवेदी ने प्रधानाचार्य नारायण सिंह चौहान को स्मृति चिह्न प्रदान किया। संचालन शालिनी शर्मा ने किया।
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कार्यक्रम में सचिन, वैभव मिश्र, अजीत कुमार और प्रतिभा कश्यप ने शिक्षण के दौरान मिले अनुभवों को एक दूसरे मेें बांटते हुए शिक्षण अभ्यास को उपयोगी बताया। छात्राध्यापक अजीत कुमार ने काव्य पाठ किया। इस मौके पर शिक्षा विभाग के वरिष्ठ प्रवक्ता सत्यनाम और डॉ. मनोज मिश्र ने प्रायोगिक शिक्षण अभ्यास की व्यावहारिक शिक्षण में उपयोगिता और महत्व को रेखांकित किया। गांधी विद्यालय इंटर कॉलेज के शिक्षकों रामजी, रामेंद्र गुप्ता ने छात्रों को उनके भावी शैक्षिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण टिप्स दिए।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नारायण सिंह चौहान ने विभिन्न उदाहरणों से शिक्षक के कर्तव्यों की व्याख्या की। छात्राध्यापकों को भविष्य में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं के संभावित समाधानों के लिए मार्गदर्शन भी दिया। अपने अध्यक्षीय भाषण में विभागाध्यक्ष विशाल द्विवेदी ने प्रधानाचार्य और सभी शिक्षकों का आभार व्यक्त करने के साथ ही एक सफल शिक्षक के लिए इंद्रीय प्रशिक्षण की व्याख्या भागवत गीता में उल्लखित निर्देशों के अनुसार की और इसे अपने जीवन में अपनाने पर बल दिया। विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल द्विवेदी ने प्रधानाचार्य नारायण सिंह चौहान को स्मृति चिह्न प्रदान किया। संचालन शालिनी शर्मा ने किया।
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