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बैंकों की मनमानी से लटक गई मत्स्य पालन योजना
लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 19 Oct 2015 05:52 PM IST
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जिले में शासन से मत्स्य पालकों के हितों को ध्यान में रखकर उनके लिए चलाई जा रही मत्स्य पालन योजना खटाई में पड़ गई है। इस योजना को बैंकों का सहयोग नहीं मिल रहा है। इससे न सिर्फ शासन की योजना प्रभावित हो रही है बल्कि मत्स्य पालकों को इस व्यवसाय से होने वाले फायदे का भी नुकसान हो रहा है।
मत्स्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो विभाग ने वर्ष 2015-16 में कुल 45 मत्स्य पालकों को तालाबों का 10 वर्षीय आवंटन किया है। इन तालाबों में मछली पालन किया जाना है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक तालाबों के रखरखाव और अन्य कार्यों के लिए मत्स्य पालकों को बैंकों से कर्ज की जरूरत है। इसे ध्यान में रखकर मत्स्य विभाग की ओर से सभी मत्स्य पालकों के लिए प्रोजेक्ट की फाइल तैयार कर बैंकों को भेजा भी गया है लेकिन अफसोस कि अब तक मत्स्य विभाग की ओर से भेजी गई लाभार्थियों की सूची में महज दो मत्स्य पालकों के ही कर्ज को स्वीकृति मिल पाई, इनमें करीब 20 मत्स्य पालकों की फाइलों को बिना कोई कारण बताए बैंकों से वापस मत्स्य विभाग को भेज दिया गया है। मत्स्य पालन से जुड़ी शेष लाभार्थियों की फाइल संबंधित बैंकों में धूल फांक रही हैं। मत्स्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो बैंकों के उदासीन रवैये के कारण जिले में मत्स्य पालन योजना खटाई में पड़ती जा रही है। बैंकों का यह रवैया इसी वित्तीय वर्ष का नहीं है, बल्कि 2014-15 में भी तमाम मत्स्य पालकों को बैंकों से निराशा ही हाथ लगी थी। मत्स्य अधिकारी बैंकों के अड़ियल रुख से हैरान और परेशान हैं। उनका कहना है कि इससे शासन की यह योजना प्रभावित हो रही है साथ ही मछली पालन से लाभार्थियों को जो फायदा मिलना चाहिए वह उन्हें नहीं मिल रहा है।
28 सितंबर को हुई एक बैठक में एलडीएम वीके सक्सेना ने यह भरोसा दिलाया था कि जल्द ही मत्स्य पालकों की फाइलों को स्वीकृत कर उन्हें मछली पालन के लिए कर्ज दिया जाएगा, लेकिन इसके बावजूद लगातार फाइलें विभाग को बिना कारण वापस की जा रही हैं। इससे मत्स्य पालन योजना को झटका लग रहा है।
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-अनिल कुमार गुप्ता, सहायक निदेशक मत्स्य
मत्स्य अधिकारी को योजना के संचालन में कोई दिलचस्पी नहीं है। मैंने उनसे कहा था कि जहां पर भी दिक्कत आ रही हो, वहां आप जाइए लेकिन अभी तक वह कहीं गए नहीं हैं। बैंकों में जाने से ही पता चल सकेगा कि क्या दिक्कत आ रही है।
-वीके सक्सेना, एलडीएम
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मत्स्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो विभाग ने वर्ष 2015-16 में कुल 45 मत्स्य पालकों को तालाबों का 10 वर्षीय आवंटन किया है। इन तालाबों में मछली पालन किया जाना है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक तालाबों के रखरखाव और अन्य कार्यों के लिए मत्स्य पालकों को बैंकों से कर्ज की जरूरत है। इसे ध्यान में रखकर मत्स्य विभाग की ओर से सभी मत्स्य पालकों के लिए प्रोजेक्ट की फाइल तैयार कर बैंकों को भेजा भी गया है लेकिन अफसोस कि अब तक मत्स्य विभाग की ओर से भेजी गई लाभार्थियों की सूची में महज दो मत्स्य पालकों के ही कर्ज को स्वीकृति मिल पाई, इनमें करीब 20 मत्स्य पालकों की फाइलों को बिना कोई कारण बताए बैंकों से वापस मत्स्य विभाग को भेज दिया गया है। मत्स्य पालन से जुड़ी शेष लाभार्थियों की फाइल संबंधित बैंकों में धूल फांक रही हैं। मत्स्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो बैंकों के उदासीन रवैये के कारण जिले में मत्स्य पालन योजना खटाई में पड़ती जा रही है। बैंकों का यह रवैया इसी वित्तीय वर्ष का नहीं है, बल्कि 2014-15 में भी तमाम मत्स्य पालकों को बैंकों से निराशा ही हाथ लगी थी। मत्स्य अधिकारी बैंकों के अड़ियल रुख से हैरान और परेशान हैं। उनका कहना है कि इससे शासन की यह योजना प्रभावित हो रही है साथ ही मछली पालन से लाभार्थियों को जो फायदा मिलना चाहिए वह उन्हें नहीं मिल रहा है।
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28 सितंबर को हुई एक बैठक में एलडीएम वीके सक्सेना ने यह भरोसा दिलाया था कि जल्द ही मत्स्य पालकों की फाइलों को स्वीकृत कर उन्हें मछली पालन के लिए कर्ज दिया जाएगा, लेकिन इसके बावजूद लगातार फाइलें विभाग को बिना कारण वापस की जा रही हैं। इससे मत्स्य पालन योजना को झटका लग रहा है।
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-अनिल कुमार गुप्ता, सहायक निदेशक मत्स्य
मत्स्य अधिकारी को योजना के संचालन में कोई दिलचस्पी नहीं है। मैंने उनसे कहा था कि जहां पर भी दिक्कत आ रही हो, वहां आप जाइए लेकिन अभी तक वह कहीं गए नहीं हैं। बैंकों में जाने से ही पता चल सकेगा कि क्या दिक्कत आ रही है।
-वीके सक्सेना, एलडीएम