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बांकेगंज के खेतों में पक कर तैयार हो गई स्ट्राबेरी

Fri, 20 Feb 2015 04:36 PM IST
बांकेगंज।
बांकेगंज। Updated Fri, 20 Feb 2015 04:36 PM IST
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bankaigang kai khaiton main pak ker taiyaar ho gai straberi
ट्राबेरी का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। खट्टे-मीठे स्वाद और सेहत के लिए बेहद फायदेमंद स्ट्राबेरी का स्वाद पाने के लिए युवा पीढ़ी दीवानी है। पहाड़ाें की फसल का मैदानी इलाकों में उत्पादन कर क्षेत्रीय प्रगतिशील किसानों ने एक अनूठी मिसाल पेश की है। इस समय खेतों में स्ट्राबेरी पक कर तैयार है।  
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कस्बे के किसान यदुनंदन सिंह पुजारी, धीरेंद्र मौर्य, प्रेम सिंह आदि पिछले कई सालों से स्ट्राबेरी का उत्पादन कर रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश से लाकर लगाई पौध

किसानों ने बताया कि स्ट्राबेरी की पौध वह हिमाचल प्रदेश के सोलन से लाकर लगाते हैं। पौध की रोपाई अक्तूबर में होती है। इसके चार माह बाद फरवरी में फल आने शुरू हो जाते हैं। मार्च के प्रथम सप्ताह में फसल तैयार होकर बाजार में बिक्री के लिए आ जाती है।
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किसानों ने बताया कि एक एकड़ स्ट्राबेरी की फसल में टपक विधि से सिंचाई के बाद लगभग 80 हजार रुपये की लागत आती है। बाजार में बिक्री के बाद छह माह में एक लाख रुपये से अधिक मुनाफा मिल जाता है। उन्होंने बताया कि इसकी बिक्री के लिए वे इसे लखनऊ, दिल्ली और मुंबई के फल व्यापारियों से संपर्क कर डिब्बाें में पैक  कर भेजते हैं।
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