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Lakhimpur Kheri News: कौड़ियों के भाव बिक रहा केला, लागत भी नहीं निकल रही

Thu, 11 Sep 2025 12:52 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 11 Sep 2025 12:52 AM IST
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Bananas are being sold at very low prices, not even recovering the cost
लौखनिया गांव के खेत में लगी केले की पकी फसल। संवाद - फोटो : mathura
धौरहरा। किसानों ने गन्ने के अलावा नकदी फसल के रूप में केले की खेती शुरू की हुई है। दो सालों तक तो अच्छा लाभ हुआ, लेकिन इस साल बहुतायत होने से रेट काफी कम हो गया है। नतीजतन किसानों को उसकी लागत भी नहीं निकल रही। मजबूरन किसान कौड़ियों के भाव केला बेचने को मजबूर हैं।
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धौरहरा तहसील क्षेत्र कभी गन्ने की खेती के लिए जाना जाता था, ऐसे में इसको चीनी का कटोरा भी गया गया। गन्ना भुगतान और उन्नत किस्म का बीज न मिलने से ज्यादातर किसानों ने केले की खेती अपनाई। केले में लागत से काफी अधिक मुनाफा मिलने से किसानों ने क्षेत्र में बहुतायत में केले की खेती शुरू की। दो वर्षों में केले का 2200 से 2500 तक प्रति क्विंटल रेट मिला। नतीजतन, छोटे किसानों ने भी इसकी खेती शुरू कर दी।
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इस बार केले के रेट धड़ाम हो गए। जो केला 25 सौ रुपये प्रति क्विंटल बिकता था, वह आज 600 से 700 रुपये प्रति क्विंटल में भी नहीं बिक पा रहा। किसानों ने बताया कि केला उत्पादन के बाद बिक्री के लिए कोई स्थायी मंडी जिले में नहीं है। न ही सरकार से रेट ही निर्धारित किए गए हैं। बाहरी व्यापारी आते हैं जो बिचौलियों के माध्यम से केले की खरीद-फरोख्त मनमाने रेट पर करते हैं। (संवाद)
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बाहर के नहीं आ रहे व्यापारी, प्रदेश में ही खपाई जा रही फसल
केला व्यापारी बड़े पैमाने पर खरीद कर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, के अलावा उत्तराखण्ड ले जाते रहे हैं। इन दिनों प्रदेशों में काफी बाढ़ होने से केला नहीं जा पा रहा। इसकी चलते केला उत्तर प्रदेश के जिलों में ही खपाया जा रहा है। इसकी वजह से व्यापारी भी कम आ रहे हैं, जिससे किसानों को सही रेट नहीं मिल रहा।

----घाटे से उबरने के लिए करें सहफसली----

किसानों को चाहिए कि वह एक फसल पर निर्भर न रहें। सहफसली भी करें, ताकि घाटे से उबरा जा सके। अब केले के रेट काफी गिर गए हैं, जिससे लागत नहीं निकल रही। इससे सीख लें। -धर्मपाल मौर्या, प्रगतिशील किसान लखनपुरवा



व्यापारी छह सौ रुपये प्रति क्विंटल के भाव से केला मांग रहे हैं, जबकि इसकी लागत ही आठ सौ रुपये प्रति क्विंटल आती है। ऐसे में अब केले की खेती कर पाना संभव नहीं। -अखिलेश वर्मा, लौखनिया


केले के घटे रेट ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बड़े किसानों को तो काफी बड़ा झटका है। सरकार को चाहिए अन्य फसलों की तरह केले का भी मूल्य निर्धारण करे। -देवाशीष त्रिवेदी, प्रगतिशील किसान




दो साल अच्छा रेट मिला, लेकिन इस बार काफी घाटा हो रहा है। छह सौ रुपये प्रति क्विंटल में केला बेचने से लागत निकलना भी मुश्किल है। सरकार को इस पर कोई नीति बनानी चाहिए। - विजय जायसवाल, प्रगतिशील किसान धौरहरा

लौखनिया गांव के खेत में लगी केले की पकी फसल। संवाद

लौखनिया गांव के खेत में लगी केले की पकी फसल। संवाद- फोटो : mathura

लौखनिया गांव के खेत में लगी केले की पकी फसल। संवाद

लौखनिया गांव के खेत में लगी केले की पकी फसल। संवाद- फोटो : mathura

लौखनिया गांव के खेत में लगी केले की पकी फसल। संवाद

लौखनिया गांव के खेत में लगी केले की पकी फसल। संवाद- फोटो : mathura

लौखनिया गांव के खेत में लगी केले की पकी फसल। संवाद

लौखनिया गांव के खेत में लगी केले की पकी फसल। संवाद- फोटो : mathura

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