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भुगतान की जगह चीनी दे रही है बजाज मिल
ब्यूरो गोला गोकर्णनाथ।
Updated Sun, 17 Apr 2016 10:13 PM IST
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चीनी
- फोटो : अमर उजाला
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किसान को 3600 में तो बाजार में मिल रही 3500 में चीनी
बजाज हिंदुस्थान शुगर लि मुकदमा दर्ज होने के बावजूद गन्ना किसानों को बकाये गन्ने का भुगतान तो नहीं कर रही है किंतु किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर बाजार से 100 रुपये महंगी चीनी दी जा रही है।
गन्ना किसानों को भुगतान न कर धोखाधड़ी करने के आरोप में सहकारी गन्ना विकास समिति लिमिटेड के सचिव भूपेश कुमार राय ने 10 अप्रैल की रात कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बावजूद चीनी मिल ने गन्ना किसानों का तो एक पैसे का भी भुगतान उनके खातों में नहीं भेजा है। इस चीनी मिल पर गन्ना किसानों का एक अरब 66 करोड़ 82 हजार रुपया बकाया है। चीनी मिल ने 23 नवंबर को पेराई सत्र शुरू किया किंतु बजाज चीनी मिल ने किसानों को पहली किस्त का 230 रुपये क्विंटल की दर से सिर्फ 20 दिसंबर तक का ही भुगतान किया है। किसानों को इस समय शादी, ब्याह, बच्चों की फीस जमा करने, किताबे लेने और घर का खर्च चलाने के लिए धन की आवश्यकता है, उनकी इस मजबूरी का फायदा उठाकर चीनी मिल उन्हें 29 फरवरी तक खरीदे गन्ने पर चीनी उपलब्ध करा रही है। वह भी बाजार से 100 रुपये अधिक कीमत पर दी जा रही है। 17 अप्रैल रविवार को चीनी मिल में अवकाश होने के कारण चीनी का वितरण नहीं किया गया। जबकि 16 अप्रैल शनिवार को किसानों को 3600 रुपये प्रति कुुंतल की दर से चीनी की पर्चियां दी गईं जबकि बाजार में थोक व्यापारियों के यहां शनिवार को चीनी का भाव 3500 रुपये कुंतल था। गन्ना किसानों को चीनी की कोई बिक्री का पर्चा या गेटपास भी नहीं दिया जाता है।
चीनी मिल में ही गन्ना किसानों की बेबसी का फायदा उठाने के लिए दरी डाल कर बैठते हैं और किसानों की चीनी की पर्चियां बाजार भाव 100 रुपये से 150 रुपये प्रति कुंटल कम में खरीद कर नकद भुगतान देते हैं। इस खरीद फरोख्त में जहां किसान ठगा जा रहा है, वही केंद्र और प्रदेश सरकार को अब तक लाखों रुपये के आय और व्यापार कर की क्षति पहुंचाई जा चुकी है।
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चीनी मिल मालिकों की गोद में बैठी है सरकार
गोला गोकर्णनाथ में राष्ट्रीय किसान मजदूर संग्ठन के राष्ट्रीय संयोजक और सुप्रीम कोर्ट के वकील वीएम सिंह ने अमर उजाला को फोन पर बताया कि सरकार चीनी मिल मालिकों की गोद में बैठी है इस कारण गन्ना किसानों का भुगतान नहीं करवाया जा रहा है। जिले की बजाज चीनी मिलों पर एफआईआर सिर्फ सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में पक्ष रखने के लिए सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों ने दिखावे के लिए कायम करवा दिया है। इस कारण ही दर्ज मुकदमे में कुशाग्र बजाज को मुल्जिम न बनाकर सिर्फ अध्याशियों को नामजद किया गया है। कहा कि बजाज मिलें किसानों को उनकी मांग पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चीनी तो उपलब्ध करा रही हैं, किंतु गन्ने का भुगतान नहीं दे रही हैं।
बजाज हिंदुस्थान शुगर लि मुकदमा दर्ज होने के बावजूद गन्ना किसानों को बकाये गन्ने का भुगतान तो नहीं कर रही है किंतु किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर बाजार से 100 रुपये महंगी चीनी दी जा रही है।
गन्ना किसानों को भुगतान न कर धोखाधड़ी करने के आरोप में सहकारी गन्ना विकास समिति लिमिटेड के सचिव भूपेश कुमार राय ने 10 अप्रैल की रात कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बावजूद चीनी मिल ने गन्ना किसानों का तो एक पैसे का भी भुगतान उनके खातों में नहीं भेजा है। इस चीनी मिल पर गन्ना किसानों का एक अरब 66 करोड़ 82 हजार रुपया बकाया है। चीनी मिल ने 23 नवंबर को पेराई सत्र शुरू किया किंतु बजाज चीनी मिल ने किसानों को पहली किस्त का 230 रुपये क्विंटल की दर से सिर्फ 20 दिसंबर तक का ही भुगतान किया है। किसानों को इस समय शादी, ब्याह, बच्चों की फीस जमा करने, किताबे लेने और घर का खर्च चलाने के लिए धन की आवश्यकता है, उनकी इस मजबूरी का फायदा उठाकर चीनी मिल उन्हें 29 फरवरी तक खरीदे गन्ने पर चीनी उपलब्ध करा रही है। वह भी बाजार से 100 रुपये अधिक कीमत पर दी जा रही है। 17 अप्रैल रविवार को चीनी मिल में अवकाश होने के कारण चीनी का वितरण नहीं किया गया। जबकि 16 अप्रैल शनिवार को किसानों को 3600 रुपये प्रति कुुंतल की दर से चीनी की पर्चियां दी गईं जबकि बाजार में थोक व्यापारियों के यहां शनिवार को चीनी का भाव 3500 रुपये कुंतल था। गन्ना किसानों को चीनी की कोई बिक्री का पर्चा या गेटपास भी नहीं दिया जाता है।
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चीनी मिल में ही गन्ना किसानों की बेबसी का फायदा उठाने के लिए दरी डाल कर बैठते हैं और किसानों की चीनी की पर्चियां बाजार भाव 100 रुपये से 150 रुपये प्रति कुंटल कम में खरीद कर नकद भुगतान देते हैं। इस खरीद फरोख्त में जहां किसान ठगा जा रहा है, वही केंद्र और प्रदेश सरकार को अब तक लाखों रुपये के आय और व्यापार कर की क्षति पहुंचाई जा चुकी है।
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चीनी मिल मालिकों की गोद में बैठी है सरकार
गोला गोकर्णनाथ में राष्ट्रीय किसान मजदूर संग्ठन के राष्ट्रीय संयोजक और सुप्रीम कोर्ट के वकील वीएम सिंह ने अमर उजाला को फोन पर बताया कि सरकार चीनी मिल मालिकों की गोद में बैठी है इस कारण गन्ना किसानों का भुगतान नहीं करवाया जा रहा है। जिले की बजाज चीनी मिलों पर एफआईआर सिर्फ सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में पक्ष रखने के लिए सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों ने दिखावे के लिए कायम करवा दिया है। इस कारण ही दर्ज मुकदमे में कुशाग्र बजाज को मुल्जिम न बनाकर सिर्फ अध्याशियों को नामजद किया गया है। कहा कि बजाज मिलें किसानों को उनकी मांग पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चीनी तो उपलब्ध करा रही हैं, किंतु गन्ने का भुगतान नहीं दे रही हैं।