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Lakhimpur Kheri News: नजूल की भूमि के लिए कैबिनेट में मंजूरी का इंतजार
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गोला गोकर्णनाथ। छोटी काशी कॉरिडोर के निर्माण को लेकर अभी नजूल की भूमि की कैबिनेट से मंजूरी नहीं मिल पाई है। फिलहाल गोकर्ण तीर्थ के घाटों और परिक्षेत्र के मार्गों का निर्माण शुरू कर दिया गया है।
रेलवे स्टेशन मार्ग स्थित पीलीभीत धर्मशाला के सामने से पौराणिक शिव मंदिर के पीछे 80 मीटर मार्ग और दोनों ओर नाली निर्माण शुरू कर दिया गया है। यह निर्माण कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल के अंतर्गत नारायण एसोसिएट कंपनी से कराया जा रहा है। निर्माण कर रहे इंजीनियर अच्छे आनंद सिंह ने बताया कि मार्गों की सतह लाल बलुआ पत्थर से तैयार की जाएगी।
घाटों पर भी यही पत्थर लगाया जाएगा। कॉरिडोर निर्माण में सबसे पहले मंदिर जाने वाले प्रमुख मार्ग, पीलीभीत और कानपुर धर्मशाला में कैंटीन, शौचालय के साथ घाट का निर्माण और सुंदरीकरण कराया जाएगा।
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निर्माण की रूपरेखा
पौराणिक शिव मंदिर का मुख्य मार्ग एवं द्वार स्टेशन रोड स्थित अंगद धर्मशाला के स्थान पर बनवाया जाएगा।
दूसरा द्वार मालियों के पास लगे पीपल के पेड़ के पास और तीसरा द्वार मंदिर के पास बनाया जाएगा।
डायवर्जन मार्ग की तरफ से वीआईपी द्वार बनाया जाएगा।
गोकर्ण तीर्थ के दक्षिण सत्संग स्थल बनाया जाएगा।
गोकर्ण तीर्थ को लाइटों, म्यूजिक वाटर शो से सजाया जाएगा।
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धर्मशालाओं के सर्वराकारों में असंतोष
कॉरिडोर परिक्षेत्र में आने वाले धर्मशालाओं के सर्वराकारों ने असंतोष व्यक्त किया है। पीलीभीत धर्मशाला के केयरटेकर सुशील पांडेय ने बताया कि धर्मशाला का निर्माण 1901 में हुआ था, जो वास्तुकला का एक उदाहरण है। बिना एनओसी के मनमाने ढंग से काम शुरू कर दिया गया। न तो कोई मुआवजे की बात की जा रही है, न ही स्पष्ट नक्शा दिखाया जा रहा है। नगर पालिका द्वारा टैक्स लिया जाता है। सुविधा के नाम पर न तो साफ सफाई की व्यवस्था कराई जाती है और ने पेयजल के लिए टंकी लगाई गई। शहर में 56 धर्मशाला थे और मंदिर परिसर में करीब 26। मंदिर परिसर के धर्मशालाओं पर या तो पूर्ण रूप से कब्जा हो चुका है या उनके स्थान पर आलीशान मकान बने हैं।
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मार्गों और घाटों का निर्माण शुरू हो गया है। नजूल की भूमि की मंजूरी कैबिनेट से मिलनी है। धर्मशालाओं से संबंधित पक्षकारों से सहमति और स्पष्ट वार्ता हुई है। किसी से कोई बात छिपाई नहीं गई।
विनोद कुमार गुप्ता, एसडीएम गोला
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रेलवे स्टेशन मार्ग स्थित पीलीभीत धर्मशाला के सामने से पौराणिक शिव मंदिर के पीछे 80 मीटर मार्ग और दोनों ओर नाली निर्माण शुरू कर दिया गया है। यह निर्माण कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल के अंतर्गत नारायण एसोसिएट कंपनी से कराया जा रहा है। निर्माण कर रहे इंजीनियर अच्छे आनंद सिंह ने बताया कि मार्गों की सतह लाल बलुआ पत्थर से तैयार की जाएगी।
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घाटों पर भी यही पत्थर लगाया जाएगा। कॉरिडोर निर्माण में सबसे पहले मंदिर जाने वाले प्रमुख मार्ग, पीलीभीत और कानपुर धर्मशाला में कैंटीन, शौचालय के साथ घाट का निर्माण और सुंदरीकरण कराया जाएगा।
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निर्माण की रूपरेखा
पौराणिक शिव मंदिर का मुख्य मार्ग एवं द्वार स्टेशन रोड स्थित अंगद धर्मशाला के स्थान पर बनवाया जाएगा।
दूसरा द्वार मालियों के पास लगे पीपल के पेड़ के पास और तीसरा द्वार मंदिर के पास बनाया जाएगा।
डायवर्जन मार्ग की तरफ से वीआईपी द्वार बनाया जाएगा।
गोकर्ण तीर्थ के दक्षिण सत्संग स्थल बनाया जाएगा।
गोकर्ण तीर्थ को लाइटों, म्यूजिक वाटर शो से सजाया जाएगा।
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धर्मशालाओं के सर्वराकारों में असंतोष
कॉरिडोर परिक्षेत्र में आने वाले धर्मशालाओं के सर्वराकारों ने असंतोष व्यक्त किया है। पीलीभीत धर्मशाला के केयरटेकर सुशील पांडेय ने बताया कि धर्मशाला का निर्माण 1901 में हुआ था, जो वास्तुकला का एक उदाहरण है। बिना एनओसी के मनमाने ढंग से काम शुरू कर दिया गया। न तो कोई मुआवजे की बात की जा रही है, न ही स्पष्ट नक्शा दिखाया जा रहा है। नगर पालिका द्वारा टैक्स लिया जाता है। सुविधा के नाम पर न तो साफ सफाई की व्यवस्था कराई जाती है और ने पेयजल के लिए टंकी लगाई गई। शहर में 56 धर्मशाला थे और मंदिर परिसर में करीब 26। मंदिर परिसर के धर्मशालाओं पर या तो पूर्ण रूप से कब्जा हो चुका है या उनके स्थान पर आलीशान मकान बने हैं।
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मार्गों और घाटों का निर्माण शुरू हो गया है। नजूल की भूमि की मंजूरी कैबिनेट से मिलनी है। धर्मशालाओं से संबंधित पक्षकारों से सहमति और स्पष्ट वार्ता हुई है। किसी से कोई बात छिपाई नहीं गई।
विनोद कुमार गुप्ता, एसडीएम गोला