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नोटिस न बांटो..जान प्यारी है तो भाग जाओ
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लखीमपुर खीरी। आवास विकास परिषद द्वारा अधिग्रहित राजापुर आवासीय योजना की जमीन का मुआवजा वितरण से पूर्व गुरुवार को नोटिस बांटने आए अमीन को किसानों के आक्रोश के चलते बैरंग लौटना पड़ा है। पुराने कानून के तहत मुआवजा दरें निर्धारित किए जाने से किसान पहले से नाराज थे, जिससे अमीन को विरोध का सामना करना पड़ा। जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे लोगों ने नोटिस बांटने आए अमीन को डराते हुए कहा कि नोटिस न बांटो, जान प्यारी है तो भाग जाओ। यह सुनकर अमीन ने लौटने में ही भलाई समझी, क्योंकि तहसील प्रशासन ने भी किसानों का आक्रोश देखते हुए उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने से पल्ला झाड़ लिया था।
आवास विकास परिषद द्वारा अवार्ड किए जाने के बाद अब मुआवजा वितरण की कार्रवाई प्रारंभ हो गई है, जो एडीएम (भूमि अधिग्रहण) लखनऊ द्वारा की जा रही है। इस क्रम में किसानों को मुआवजा वितरण के लिए नोटिस बांटी जानी है, जिसके लिए गुरुवार को एडीएम भूमि अधिग्रहण ने एक अमीन समेत दो कर्मियों को नोटिस बांटने के लिए लखीमपुर भेजा था। नोटिस बांटे जाने से पहले अमीन ने स्थानीय तहसील प्रशासन से सुरक्षा कर्मियों की मांग की थी, लेकिन किसानों के आक्रोश को देखते हुए तहसील प्रशासन ने भी नोटिस बांटने आए अमीन को सुरक्षा मुहैया कराने से इनकार कर दिया था। लिहाजा डरे-सहमे अमीन ने गुपचुप तरीके से किसानों को नोटिस बांटने का प्रयास किया, जिससे हाईकोर्ट में वाद दायर करने वाली अंजना खंडेलवाल समेत 17 किसानों ने नोटिस प्राप्त कर ली। अन्य किसानों ने इसकी जानकारी मिलते ही अमीन का विरोध शुरू कर दिया। कुछ किसानों ने उग्र होते हुए अमीन को डराना-धमकाना शुरू कर दिया, जिससे घबराए अमीन ने नोटिस बांटना बंद करके लौटना ही मुनासिब समझा।
हाईवे किनारे कीमती जमीन का रेट 17.91 रुपये प्रति वर्ग फुट..
आवास विकास परिषद ने पीलीभीत-बस्ती हाईवे के किनारे स्थित कीमती जमीनों का मुआवजा कौड़ियों के भाव में यानी 17.91 रुपये प्रति वर्ग फुट निर्धारित किया है, जो सर्किल रेट और बाजार मूल्य बहुत कम है। इससे भड़के किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया और डीएम को ज्ञापन देकर न्याय की गुहार लगाई थी। वर्ष 2010 में 317 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था। जमीन अधिग्रहण के लिए एक जनवरी 2014 से नया भूमि अधिग्रहण एक्ट 2013 प्रभावी है। इसी कानून के मुताबिक ही आवास विकास परिषद ने बहराइच और लखनऊ की योजनाओं में अवार्ड घोषित कर चुका है, लेकिन आरोप है कि लखीमपुर में पुराने कानून के तहत अवार्ड घोषित कर दिया है।
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किसानों को नोटिस बांटने के लिए अमीन को भेजा था, जिससे करीब 17 किसानों ने नोटिस ली है। अन्य किसानों ने विरोध करते हुए अमीन को डरा-धमकाकर भगा दिया हैै। इससे ज्यादातर किसानों को नोटिस नहीं बांटी जा सकी हैं। मुआवजे की दरों से जिसे आपत्ति है वो अर्जन अधिनियम के संदर्भ 18 के तहत नोटिस दे सकते हैं, लेकिन अभी तक किसी नोटिस नहीं दी है। अब आवास विकास परिषद नोटिस का अखबारों में प्रकाशन कराकर किसानों को सूचना देगा।
-रामअरज, अपर जिलाधिकारी (भूमि अधिग्रहण), लखनऊ
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आवास विकास परिषद द्वारा अवार्ड किए जाने के बाद अब मुआवजा वितरण की कार्रवाई प्रारंभ हो गई है, जो एडीएम (भूमि अधिग्रहण) लखनऊ द्वारा की जा रही है। इस क्रम में किसानों को मुआवजा वितरण के लिए नोटिस बांटी जानी है, जिसके लिए गुरुवार को एडीएम भूमि अधिग्रहण ने एक अमीन समेत दो कर्मियों को नोटिस बांटने के लिए लखीमपुर भेजा था। नोटिस बांटे जाने से पहले अमीन ने स्थानीय तहसील प्रशासन से सुरक्षा कर्मियों की मांग की थी, लेकिन किसानों के आक्रोश को देखते हुए तहसील प्रशासन ने भी नोटिस बांटने आए अमीन को सुरक्षा मुहैया कराने से इनकार कर दिया था। लिहाजा डरे-सहमे अमीन ने गुपचुप तरीके से किसानों को नोटिस बांटने का प्रयास किया, जिससे हाईकोर्ट में वाद दायर करने वाली अंजना खंडेलवाल समेत 17 किसानों ने नोटिस प्राप्त कर ली। अन्य किसानों ने इसकी जानकारी मिलते ही अमीन का विरोध शुरू कर दिया। कुछ किसानों ने उग्र होते हुए अमीन को डराना-धमकाना शुरू कर दिया, जिससे घबराए अमीन ने नोटिस बांटना बंद करके लौटना ही मुनासिब समझा।
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हाईवे किनारे कीमती जमीन का रेट 17.91 रुपये प्रति वर्ग फुट..
आवास विकास परिषद ने पीलीभीत-बस्ती हाईवे के किनारे स्थित कीमती जमीनों का मुआवजा कौड़ियों के भाव में यानी 17.91 रुपये प्रति वर्ग फुट निर्धारित किया है, जो सर्किल रेट और बाजार मूल्य बहुत कम है। इससे भड़के किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया और डीएम को ज्ञापन देकर न्याय की गुहार लगाई थी। वर्ष 2010 में 317 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था। जमीन अधिग्रहण के लिए एक जनवरी 2014 से नया भूमि अधिग्रहण एक्ट 2013 प्रभावी है। इसी कानून के मुताबिक ही आवास विकास परिषद ने बहराइच और लखनऊ की योजनाओं में अवार्ड घोषित कर चुका है, लेकिन आरोप है कि लखीमपुर में पुराने कानून के तहत अवार्ड घोषित कर दिया है।
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किसानों को नोटिस बांटने के लिए अमीन को भेजा था, जिससे करीब 17 किसानों ने नोटिस ली है। अन्य किसानों ने विरोध करते हुए अमीन को डरा-धमकाकर भगा दिया हैै। इससे ज्यादातर किसानों को नोटिस नहीं बांटी जा सकी हैं। मुआवजे की दरों से जिसे आपत्ति है वो अर्जन अधिनियम के संदर्भ 18 के तहत नोटिस दे सकते हैं, लेकिन अभी तक किसी नोटिस नहीं दी है। अब आवास विकास परिषद नोटिस का अखबारों में प्रकाशन कराकर किसानों को सूचना देगा।
-रामअरज, अपर जिलाधिकारी (भूमि अधिग्रहण), लखनऊ