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निदेशक ने पूछे सवाल तो बगले झांकने लगे अधिकारी
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Thu, 08 Sep 2016 11:19 PM IST
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निरीक्षण
- फोटो : अमर उजाला
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- राष्ट्रीय कृषि बाजार (एनएएम) में मिली कम सैंपलिंग
- निर्माण कार्य धीमा होने पर ईई/जेई को दी चेतावनी
मंडी परिषद के निदेशक राजशेखर ने गुरुवार को राजापुर मंडी का निरीक्षण किया, जहां उन्होंने किसानों को देशभर में आनलाइन उपज बेचने की सुविधा के लिए शुरू की गई राष्ट्रीय कृषि बाजार (एनएएम) की व्यवस्थाओं को गहनता से देखा। प्रतिदिन की होने वाली आवक की लाटों (औसतन 40) के सापेक्ष सैंपलिंग (पांच) काफी कम पाई गई, जिस पर निदेशक ने संबंधित अधिकारियों से सवाल किए। इसके जवाब देने में अधिकारियों के पसीने छूट गए। स्टाफ की कमी और लैब न बनने का कारण बताकर अधिकारियों ने किसी तरह बचाव किया। निदेशक ने निर्माण इकाई के अधिशाषी अभियंता और जेई को गुणवत्ता के साथ तेज गति से कार्य करने के निर्देश दिए।
राजापुर मंडी परिसर में सबसे पहले निदेशक राजशेखर ने आढ़तियों के फड़ पर जाकर नीलामी प्रक्रिया को देखा। किसानों के लिहाज से मंडी में मौजूद सुविधाओं का जायजा लिया। इसके बाद वह सीधे प्रयोगशाला पहुंचे, जहां उन्होंने किसानों की उपज का सैंपल की जांच करने के बारे में जानकारी ली। क्वालिटी चेक रजिस्टर को देखा, जिस पर उन्होंने तकनीकी स्टाफ से मानकों के बारे में पूछा। किसानों को जागरूक करने के लिए मंडी द्वारा उठाए गए कदमों के बारे सवाल पूछे, तो अधिकारी निरुत्तर रहे। किसानों की उपज को आनलाइन नीलामी के जरिये उचित मूल्य दिलाने की कोशिशों पर निदेशक ने कहा कि प्रतिदिन मंडी में आने वाली सभी लाटों का सैंपल लेकर चेक करना अनिवार्य है, लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा है। निदेशक ने सभी सैंपलों को ई-आक्सन (आनलाइन नीलामी) पर डालकर बिड कराने के निर्देश दिए। मंडी सचिव उमेश यादव ने बताया कि जिले में 14 अप्रैल 2016 से योजना का शुभारंभ हुआ है। अभी लैब का निर्माण नहीं हो सका है, जिससे सैंपलिंग की संख्या अभी कम है। लैब निर्माण के लिए निर्माण इकाई को प्रस्ताव कई माह पहले ही दिया जा चुका है। इसके बाद निदेशक ने व्यापारियों के साथ बैठक कर समस्याओं का निराकरण किया। इस दौरान उप निदेशक मंजू मिश्रा, एसडीएम सदर सैमुअल पाल एन, चीफ इंजीनियर हाकिम सिंह मौजूद रहे।
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- निर्माण कार्य धीमा होने पर ईई/जेई को दी चेतावनी
मंडी परिषद के निदेशक राजशेखर ने गुरुवार को राजापुर मंडी का निरीक्षण किया, जहां उन्होंने किसानों को देशभर में आनलाइन उपज बेचने की सुविधा के लिए शुरू की गई राष्ट्रीय कृषि बाजार (एनएएम) की व्यवस्थाओं को गहनता से देखा। प्रतिदिन की होने वाली आवक की लाटों (औसतन 40) के सापेक्ष सैंपलिंग (पांच) काफी कम पाई गई, जिस पर निदेशक ने संबंधित अधिकारियों से सवाल किए। इसके जवाब देने में अधिकारियों के पसीने छूट गए। स्टाफ की कमी और लैब न बनने का कारण बताकर अधिकारियों ने किसी तरह बचाव किया। निदेशक ने निर्माण इकाई के अधिशाषी अभियंता और जेई को गुणवत्ता के साथ तेज गति से कार्य करने के निर्देश दिए।
राजापुर मंडी परिसर में सबसे पहले निदेशक राजशेखर ने आढ़तियों के फड़ पर जाकर नीलामी प्रक्रिया को देखा। किसानों के लिहाज से मंडी में मौजूद सुविधाओं का जायजा लिया। इसके बाद वह सीधे प्रयोगशाला पहुंचे, जहां उन्होंने किसानों की उपज का सैंपल की जांच करने के बारे में जानकारी ली। क्वालिटी चेक रजिस्टर को देखा, जिस पर उन्होंने तकनीकी स्टाफ से मानकों के बारे में पूछा। किसानों को जागरूक करने के लिए मंडी द्वारा उठाए गए कदमों के बारे सवाल पूछे, तो अधिकारी निरुत्तर रहे। किसानों की उपज को आनलाइन नीलामी के जरिये उचित मूल्य दिलाने की कोशिशों पर निदेशक ने कहा कि प्रतिदिन मंडी में आने वाली सभी लाटों का सैंपल लेकर चेक करना अनिवार्य है, लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा है। निदेशक ने सभी सैंपलों को ई-आक्सन (आनलाइन नीलामी) पर डालकर बिड कराने के निर्देश दिए। मंडी सचिव उमेश यादव ने बताया कि जिले में 14 अप्रैल 2016 से योजना का शुभारंभ हुआ है। अभी लैब का निर्माण नहीं हो सका है, जिससे सैंपलिंग की संख्या अभी कम है। लैब निर्माण के लिए निर्माण इकाई को प्रस्ताव कई माह पहले ही दिया जा चुका है। इसके बाद निदेशक ने व्यापारियों के साथ बैठक कर समस्याओं का निराकरण किया। इस दौरान उप निदेशक मंजू मिश्रा, एसडीएम सदर सैमुअल पाल एन, चीफ इंजीनियर हाकिम सिंह मौजूद रहे।
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