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Lakhimpur Kheri Violence: वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए आशीष मिश्र, मामले में दाखिल नहीं हुई सरकार की आपत्ति

Tue, 07 Jun 2022 08:03 PM IST
आकाश दुबे संवाद न्यूज़ एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज़ एजेंसी, लखीमपुर खीरी Published by: आकाश दुबे Updated Tue, 07 Jun 2022 08:03 PM IST
सार

सुनवाई के दौरान सीनियर वकील सुरेश कुमार सिंह की ओर से स्थगन अर्जी देते हुए डिस्चार्ज प्रार्थना पत्रों पर सरकार के पक्ष से आपत्ति न तैयार हो पाने की बात कहते हुए अदालत से समय मांगा गया है। अदालत ने शासकीय पक्ष रखने के लिए 22 जून की तारीख निश्चित की है।

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Ashish Mishra appeared in court through video conferencing in hearing of Tikunia violence case
आशीष मिश्र वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में हुए पेश - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

लखीमपुर खीरी के तिकुनिया हिंसा मामले में मंगलवार को भी आरोप पर सुनवाई नहीं हो सकी। जिला शासकीय अधिवक्ता की ओर से डिस्चार्ज एप्लीकेशन पर जवाब देने के लिए समय दिए जाने की मांग की गई, जिस पर अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 22 जून की तारीख मुकर्रर की है।

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तिकुनिया कांड मामले में मंगलवार को अदालती सुनवाई शुरू हुई तो डीजीसी अरविंद त्रिपाठी और वादी जगजीत सिंह की ओर से नियुक्त किए गए सीनियर वकील सुरेश कुमार सिंह की ओर से स्थगन अर्जी देते हुए डिस्चार्ज प्रार्थना पत्रों पर सरकार के पक्ष से आपत्ति न तैयार हो पाने की बात कहते हुए अदालत से समय मांगा गया। प्रभारी जिला जज रामेंद्र कुमार ने जिला अध्यक्ष मुकेश मिश्र के ग्रीष्मकालीन अवकाश पर होने का हवाला देते हुए अगली सुनवाई के लिए 22 जून की तारीख मुकर्रर कर दी है। वहीं वीरेंद्र शुक्ल की ओर से उनके अधिवक्ता अनिल त्रिवेदी ने हाजिरी माफी प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया और बताया कि आवश्यक कार्य होने के कारण वह कोर्ट नहीं आए हैं।

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जेल में बंद बाकी अभियुक्त आशीष मिश्र मोनू, आशीष पांडे, लवकुश राणा, सुमित जायसवाल, धर्मेंद्र बंजारा वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेश हुए। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह गौड़ की ओर से प्रस्तुत किए गए अंकित दास, लतीफ उर्फ काले, सत्यम त्रिपाठी व नंदन सिंह बिष्ट सहित पांच आरोपियों के खिलाफ डिस्चार्ज प्रार्थना पत्रों पर शासकीय पक्ष से अभी आपत्ति नहीं दाखिल की है।  बल्कि संयुक्त रुप से डीजीसी अरविंद त्रिपाठी और सुरेश सिंह मुन्ना ने आपत्ति दाखिल करने के लिए समय दिए जाने की मांग की है। जिस पर अदालत ने शासकीय पक्ष रखने के लिए 22 जून की तारीख निश्चित की है।

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