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राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए बीईओ अनुराग नामित
बिजुआ।
Updated Fri, 31 Jul 2015 03:51 PM IST
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शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए शिक्षाधिकारी को मिलने वाले नेशनल अवार्ड फॉर एनोवेशन इन एजुकेशनल एडमिनिस्ट्रेशन 2015 (राष्ट्रीय पुरस्कार) के लिए राज्य परियोजना निदेशालय यूपी की ओर से बीईओ अनुराग कुमार मिश्रा का नाम दिल्ली भेजा गया है।
अनुराग ने कुछ अलग नहीं बल्कि कुछ नया किया है। ‘पढ़े बिजुआ-बढ़े बिजुआ’ नाम के नवाचार से बिजुआ ब्लाक में स्कूली बच्चों की उपस्थित बढ़ी है, साथ ही अध्यापकों की छुट्टियों में भी पारदर्शिता आई है। शिक्षा के क्षेत्र में गुणावत्मक सुधार को देखते हुए खीरी के बीएसए ने पुरस्कार के लिए उनके नाम की अनुशंसा की थी।
सीतापुर जिले के ब्रहमावली गांव के अनुराग लखनऊ यूनिवर्सिटी से 2003 में बीएड के गोल्ड मेडलिस्ट हैं। पहली नौकरी नवोदय विद्यालय मितौली में मिली, नवोदय की नौकरी छोड़कर चार साल बतौर सहायक अध्यापक सीतापुर बेसिक विभाग में नौकरी की, यहीं से शिक्षकों को होने वाली परेशानी और स्कूलों में सुधार की गुंजाइश को समझ सके। 27 अप्रैल 2011 में बिजुआ ब्लाक का चार्ज मिला।
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इस संबंध में अनुराग मिश्रा का कहना है कि इस सम्मान के लिए नामित होना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है, इस नवाचार की कामयाबी के पीछे डीएम किंजल सिंह, बीएसए डॉ. ओपी राय और धर्मपत्नी अनुग्या का अहम रोल है।
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एक साल पहले शुरू किया ‘पढ़े बिजुआ-बढ़े बिजुआ’
अनुराग मिश्रा ने पिछले सत्र में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाने के लिए एनपीआरसी और एबीआरसी की कई स्तर पर बैठक कीं, साथ ही ब्लाक में तैनात अध्यापकों से स्कूलों में सुधार के लिए सहयोग मांगा। नतीजा भी निकला, पूरे सत्र में बिजुआ ब्लाक की एक भी तहसील दिवस में शिकायत नहीं हुई, वहीं शिकायतें न्यूनतम हो गईं। शिक्षकों की छुट्टियां लेने में पारदर्शिता आई, वहीं स्कूलों में फर्जी नामांकन रद् कर असली छात्र संख्या के सापेक्ष उपस्थित बढ़ी। उन्होंने स्कूलों में बच्चों की जनरल नॉलेज बढ़ाने के लिए पोस्टर छपवाकर लगवाए।
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय तय करता है नाम
नेशनल अवार्ड फॉर एनोवेशन इन एजुकेशनल एडमिनिस्ट्रेशन 2015 पुरस्कार, राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन विश्वविद्यालय की ओर से दिया जाता है। मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की देखरेख में बनने वाली कमेटी इन नामों को तय करती है। पूरे देश में चार जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और आठ बीईओ को ये पुरस्कार दिया जाता है।
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अनुराग ने कुछ अलग नहीं बल्कि कुछ नया किया है। ‘पढ़े बिजुआ-बढ़े बिजुआ’ नाम के नवाचार से बिजुआ ब्लाक में स्कूली बच्चों की उपस्थित बढ़ी है, साथ ही अध्यापकों की छुट्टियों में भी पारदर्शिता आई है। शिक्षा के क्षेत्र में गुणावत्मक सुधार को देखते हुए खीरी के बीएसए ने पुरस्कार के लिए उनके नाम की अनुशंसा की थी।
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सीतापुर जिले के ब्रहमावली गांव के अनुराग लखनऊ यूनिवर्सिटी से 2003 में बीएड के गोल्ड मेडलिस्ट हैं। पहली नौकरी नवोदय विद्यालय मितौली में मिली, नवोदय की नौकरी छोड़कर चार साल बतौर सहायक अध्यापक सीतापुर बेसिक विभाग में नौकरी की, यहीं से शिक्षकों को होने वाली परेशानी और स्कूलों में सुधार की गुंजाइश को समझ सके। 27 अप्रैल 2011 में बिजुआ ब्लाक का चार्ज मिला।
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इस संबंध में अनुराग मिश्रा का कहना है कि इस सम्मान के लिए नामित होना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है, इस नवाचार की कामयाबी के पीछे डीएम किंजल सिंह, बीएसए डॉ. ओपी राय और धर्मपत्नी अनुग्या का अहम रोल है।
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एक साल पहले शुरू किया ‘पढ़े बिजुआ-बढ़े बिजुआ’
अनुराग मिश्रा ने पिछले सत्र में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाने के लिए एनपीआरसी और एबीआरसी की कई स्तर पर बैठक कीं, साथ ही ब्लाक में तैनात अध्यापकों से स्कूलों में सुधार के लिए सहयोग मांगा। नतीजा भी निकला, पूरे सत्र में बिजुआ ब्लाक की एक भी तहसील दिवस में शिकायत नहीं हुई, वहीं शिकायतें न्यूनतम हो गईं। शिक्षकों की छुट्टियां लेने में पारदर्शिता आई, वहीं स्कूलों में फर्जी नामांकन रद् कर असली छात्र संख्या के सापेक्ष उपस्थित बढ़ी। उन्होंने स्कूलों में बच्चों की जनरल नॉलेज बढ़ाने के लिए पोस्टर छपवाकर लगवाए।
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय तय करता है नाम
नेशनल अवार्ड फॉर एनोवेशन इन एजुकेशनल एडमिनिस्ट्रेशन 2015 पुरस्कार, राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन विश्वविद्यालय की ओर से दिया जाता है। मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की देखरेख में बनने वाली कमेटी इन नामों को तय करती है। पूरे देश में चार जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और आठ बीईओ को ये पुरस्कार दिया जाता है।