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नहीं निपटा एंबुलेंस स्टाफ का विवाद, परेशान घूम रहे मरीज और तीमारदार

Fri, 30 Jul 2021 12:37 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 30 Jul 2021 12:37 AM IST
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Ambulance staff dispute not settled, troubled patients and attendants
लखीमपुर खीरी। मांगों को लेकर पिछले सात दिन से हड़ताल पर डटे एंबुलेंस चालक और ईएमटी स्टाफ प्रशासन के जबरन चाबी लेने के बाद बृहस्पतिवार की सुबह लखनऊ रवाना हो गए। वहीं प्रशासन ने निजी चालकों से एंबुलेंस का संचालन तो शुरू करा दिया है, लेकिन इससे मरीजों की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हड़ताल के चलते बीते करीब तीन दिनों से मरीज और तीमारदारों को सरकारी एंबुलेंस सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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विभिन्न मांगों को लेकर पिछले सात दिन से एंबुलेंस चालक और ईएमटी धरना दे रहे थे। मांगें न माने जाने से आहत एंबुलेंस के स्टाफ ने रविवार की रात से एंबुलेंस के पहिए थाम दिए। प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर चालकों ने सभी एंबुलेंस नसरुद्दीन मौजी मैदान में खड़ीकर प्रदर्शन शुरू किया था। बुधवार को मरीजों को हो रही दिक्कतों को देखते हुए शासन के निर्देश पर सदर एसडीएम डॉ. अरुण कुमार सिंह, सीओ सिटी अरविंद कुमार वर्मा, एसीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार ने चालकों से चाबियां लेकर एंबुलेंस पुलिस लाइन में खड़ी करा लीं। जीवनदायिनी 108 व 102 एंबुलेंस सेवा के जिलाध्यक्ष पवन शुक्ला ने बताया कि प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर समस्त स्टाफ लखनऊ धरना स्थल के लिए रवाना हो गए हैं।
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नहीं मिला कमरा, एंबुलेंस में सोने के लिए मजबूर हुए निजी चालक
मितौली। एंबुलेंस कर्मचारियों की जारी हड़ताल के बीच प्रशासन ने निजी कर्मचारियों को एंबुलेंस सौंपकर सीएचसी पर भेज दिया है, लेकिन हालात अभी सुधरे नहीं हैं। मितौली में जहां पहले छह एंबुलेंस थीं, वहीं अब चार एंबुलेंस ही सीएचसी पहुंची हैं, जिसमें दो 108 और दो 102 एंबुलेंस हैं।
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एंबुलेंस सीएचसी पर पहुंच तो गई हैं, लेकिन अभी भी लोगों को पूरी तरह से सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। लोग अब भी अपने प्राइवेट वाहनों से मरीज लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। वहीं एंबुलेंस के नए चालकों को रहने के लिए कमरा तक नहीं मिल पा रहा है।
चालक बताते हैं कि उनको पुराने चालक धमकाते हैं। उन्होंने अपना कमरा तक नहीं छोड़ा है। ऐसे में नए एंबुलेंस चालक भी काफी परेशान हैं। वहीं, मामले में सीएचसी अधीक्षक डॉ. एएन चौहान ने बताया कि एंबुलेंस अस्पताल आ गई हैं और उनका संचालन शुरू हो गया है। चालकों के रहने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।
सीतापुर के रहने वाले चंदन मिश्रा बताते हैं कि वो इससे पहले प्राइवेट स्कूल में गाड़ी चलाते थे। उन्हें ऐसे ही एंबुलेंस चलाने के लिए भेज दिया गया है। अब तक कोई नियुक्ति पत्र भी नहीं मिला है। न सैलरी ही बताई गई है। उनका कहना है कि एंबुलेंस में ही उन्हें सोना पड़ रहा है। बृहस्पतिवार को वह एंबुलेंस से दो लोगों को अस्पताल लेकर गए।
सिंगाही के रहने वाले अजय कुमार ट्रांसपोर्ट कंपनी में गाड़ी चलाते थे। उनका कहना है कि न तो नियुक्ति पत्र मिला और न ही सैलरी ही बताई गई है। वह अपने भविष्य को लेकर भी डरे हुए हैं। उनका कहना है कि पुराने एंबुलेंस के कर्मचारी उन्हें धमकाते हैं। उन्होंने बताया कि एक मरीज अस्पताल लेकर आए हैं।

तीन दिन से परेशान घूम रहे हैं मरीज और तीमारदार
पलियाकलां। तीन दिनों से एंबुलेंसकर्मी हड़ताल पर हैं। पलिया सीएचसी में भी चालकों और परिचालकों ने एंबुलेंस खड़ी कर दी हैं, जिससे सरकारी एंबुलेंस का लाभ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आने वाले मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। मरीजों का कहना है कि अगर एंबुलेंस की हड़ताल है तो प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए या फिर एंबुलेंस कर्मियों की मांगों को मान लेना चाहिए, जिससे मरीजों को तो दिक्कतें न उठानी पड़ें। इस बाबत सीएचसी अधीक्षक डॉ. हरेंद्र नाथ वरुण ने बताया कि हड़ताल चल रही है, सीएचसी पर ही ज्यादातर मरीजों को इलाज दे दिया जाता है। एक आध गंभीर मरीज आ जाते हैं तो वह अपना वाहन कर जिला अस्पताल ले जाते हैं। संवाद
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