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भाजपा की सुनामी के आगे सपा-बसपा के उखड़े पांव
लखीमपुर, ब्यूरो
Updated Sat, 11 Mar 2017 10:05 PM IST
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बाकी सबकी जमानत हुई जब्त, नोटा ने भी किया कमाल
विधानसभा चुनाव 2017 के सभी आठ सीटों के परिणाम अप्रत्याशित होने के साथ ही ऐतिहासिक रहे हैं। लोकसभा की तरह इस बार भी भाजपा की सुनामी में विपक्षी दलों के पांव उखड़ गए हैं। सबसे बड़ा झटका बसपा को लगा है, जिसके सभी प्रत्याशी तीसरे स्थान पर खिसक गए, तो सपा का गढ़ माने जाने वाले इस जिले में उनके मजबूत किले भी ताश के पत्ते की तरह ढह गए। सिर्फ धौरहरा में ही सपा कुछ हद तक संघर्ष कर सकी, लेकिन किसी राउंड में बढ़त नहीं मिली।
वर्ष 2012 के चुनाव परिणामों पर गौर करें तो आठ में से भाजपा को सिर्फ निघासन सीट पर जीत हासिल हुई थी, जिस पर भी वर्ष 2014 उपचुनाव में सपा ने कब्जा जमा लिया था। विधानसभा चुनाव 2017 में प्रचार के दौरान भाजपा सभी सीटों पर मजबूती से लड़ाई में दिख रही थी, लेकिन इस कदर विपक्षी पार्टियों का सूपड़ा साफ होने की उम्मीद किसी को नहीं थी। सपा-कांग्रेस गठबंधन ने जीत का गणित बैठाते हुए टिकट बांटे थे। वहीं बसपा ने भी कई प्रत्याशियों लखीमपुर, गोला, निघासन को बदलकर जीत का गणित अपने पक्ष में करने के भरसक कोशिश की थी। प्रधानमंत्री मोदी के मैजिक को कम करने के लिए बसपा, सपा और कांग्रेस के नेताओं ने कई रैलियां कर लोक-लुभावन वादे किए थे। नतीजन चुनावी विशेषज्ञ भी आठ में से भाजपा को चार से पांच, सपा को दो और बसपा को एक-दो सीट मिलने का अनुमान लगा रहे थे। आधार की बात करें तो बसपा ने अपने कैडर और मुस्लिम मतों के सहारे चुनावी वैतरणी पार करने का मंसूबा पाला था। जबकि सपा अपने मजबूत किलों में शुमार लखीमपुर, गोला, धौरहरा, कस्ता पर जीत सुनिश्चित मानकर चल रही थी।
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केंद्र सरकार की योजनाएं और मोदी जी के प्रति जनता का विश्वास जीत का आधार बना। सपा सरकार की नाकामी से जनता का मोहभंग हुआ। भाजपा कार्यकर्ताओं की मेहनत रंग लाई, जिससे सात सीटों पर भारी अंतर से जीत दर्ज की है। धौरहरा में सिर्फ त्रिकोणीय संघर्ष की वजह से जीत का अंतर कम रहा।
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-शरद वाजपेयी, जिलाध्यक्ष, भाजपा
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अप्रत्याशित जीत के लिए जनता और भाजपा को बधाई देता हूं। जनता ने सपा सरकार का काम नजरअंदाज करके प्रधानमंत्री मोदी के आश्वासन पर भरोसा जताया है। अब पूर्ण बहुमत मिलने के बाद भाजपा को चुनावी वायदे पूरे करने होंगे, जिसके लिए समय-समय पर सपा कार्यकर्ता उन्हें याद दिलाने का काम करेंगे।
-अनुराग पटेल, जिलाध्यक्ष, सपा
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गठबंधन के साथ हम अच्छी तरह चुनाव लड़े हैं। कांगे्रस ने मोहम्मदी और पलिया सीट पर भाजपा को अच्छी टक्कर दी है। इससे माना जा सकता है कि कांग्रेस का जनाधार कम नहीं हुआ है।
- राघवेंद्र बहादुर सिंह, कांग्रेस, जिलाध्यक्ष
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मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर भाजपा की जीत हुई है, जिससे साबित होता है कि ईवीएम में छेड़छाड़ की गई है। हमारे सभी प्रत्याशियों ने मजबूती से चुनाव लड़ा है। मोदी का मैजिक नहीं चला है, बल्कि हिंदू-मुस्लिम को बाटने का काम हुआ है। आगामी लोकसभा चुनाव में पूरे दमखम से मैदान में उतरेंगे।
-अजय चौधरी, बसपा, जिलाध्यक्ष
विधानसभा चुनाव 2017 के सभी आठ सीटों के परिणाम अप्रत्याशित होने के साथ ही ऐतिहासिक रहे हैं। लोकसभा की तरह इस बार भी भाजपा की सुनामी में विपक्षी दलों के पांव उखड़ गए हैं। सबसे बड़ा झटका बसपा को लगा है, जिसके सभी प्रत्याशी तीसरे स्थान पर खिसक गए, तो सपा का गढ़ माने जाने वाले इस जिले में उनके मजबूत किले भी ताश के पत्ते की तरह ढह गए। सिर्फ धौरहरा में ही सपा कुछ हद तक संघर्ष कर सकी, लेकिन किसी राउंड में बढ़त नहीं मिली।
वर्ष 2012 के चुनाव परिणामों पर गौर करें तो आठ में से भाजपा को सिर्फ निघासन सीट पर जीत हासिल हुई थी, जिस पर भी वर्ष 2014 उपचुनाव में सपा ने कब्जा जमा लिया था। विधानसभा चुनाव 2017 में प्रचार के दौरान भाजपा सभी सीटों पर मजबूती से लड़ाई में दिख रही थी, लेकिन इस कदर विपक्षी पार्टियों का सूपड़ा साफ होने की उम्मीद किसी को नहीं थी। सपा-कांग्रेस गठबंधन ने जीत का गणित बैठाते हुए टिकट बांटे थे। वहीं बसपा ने भी कई प्रत्याशियों लखीमपुर, गोला, निघासन को बदलकर जीत का गणित अपने पक्ष में करने के भरसक कोशिश की थी। प्रधानमंत्री मोदी के मैजिक को कम करने के लिए बसपा, सपा और कांग्रेस के नेताओं ने कई रैलियां कर लोक-लुभावन वादे किए थे। नतीजन चुनावी विशेषज्ञ भी आठ में से भाजपा को चार से पांच, सपा को दो और बसपा को एक-दो सीट मिलने का अनुमान लगा रहे थे। आधार की बात करें तो बसपा ने अपने कैडर और मुस्लिम मतों के सहारे चुनावी वैतरणी पार करने का मंसूबा पाला था। जबकि सपा अपने मजबूत किलों में शुमार लखीमपुर, गोला, धौरहरा, कस्ता पर जीत सुनिश्चित मानकर चल रही थी।
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केंद्र सरकार की योजनाएं और मोदी जी के प्रति जनता का विश्वास जीत का आधार बना। सपा सरकार की नाकामी से जनता का मोहभंग हुआ। भाजपा कार्यकर्ताओं की मेहनत रंग लाई, जिससे सात सीटों पर भारी अंतर से जीत दर्ज की है। धौरहरा में सिर्फ त्रिकोणीय संघर्ष की वजह से जीत का अंतर कम रहा।
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-शरद वाजपेयी, जिलाध्यक्ष, भाजपा
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अप्रत्याशित जीत के लिए जनता और भाजपा को बधाई देता हूं। जनता ने सपा सरकार का काम नजरअंदाज करके प्रधानमंत्री मोदी के आश्वासन पर भरोसा जताया है। अब पूर्ण बहुमत मिलने के बाद भाजपा को चुनावी वायदे पूरे करने होंगे, जिसके लिए समय-समय पर सपा कार्यकर्ता उन्हें याद दिलाने का काम करेंगे।
-अनुराग पटेल, जिलाध्यक्ष, सपा
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गठबंधन के साथ हम अच्छी तरह चुनाव लड़े हैं। कांगे्रस ने मोहम्मदी और पलिया सीट पर भाजपा को अच्छी टक्कर दी है। इससे माना जा सकता है कि कांग्रेस का जनाधार कम नहीं हुआ है।
- राघवेंद्र बहादुर सिंह, कांग्रेस, जिलाध्यक्ष
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मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर भाजपा की जीत हुई है, जिससे साबित होता है कि ईवीएम में छेड़छाड़ की गई है। हमारे सभी प्रत्याशियों ने मजबूती से चुनाव लड़ा है। मोदी का मैजिक नहीं चला है, बल्कि हिंदू-मुस्लिम को बाटने का काम हुआ है। आगामी लोकसभा चुनाव में पूरे दमखम से मैदान में उतरेंगे।
-अजय चौधरी, बसपा, जिलाध्यक्ष