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बेमौसम बारिश से 20 फीसदी घटा गेहूं का रकबा

Thu, 16 Jan 2020 09:31 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jan 2020 09:31 PM IST
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agriculture
लखीमपुर खीरी। गेहूं की बुआई के दौरान दिसंबर और जनवरी में हुई बेमौसम बारिश का असर उत्पादन पर पड़ना तय है। खेतों में पानी भर जाने से करीब 20 प्रतिशत एरिया में बीजों का जमाव नहीं हुआ है, जिससे किसानों को खाद-बीज का नुकसान हुआ है। वहीं गेहूं के उत्पादन में कमी आने के आसार बन गए है। इसके अलावा दलहन और तिलहन की फसलों पर भी बारिश का विपरीत असर पड़ा है, जिससे इन फसलों का भी उत्पादन लक्ष्य से घट सकता है।
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कृषि विभाग के मुताबिक रबी फसल वर्ष 2019-20 में गेहूं बुआई का कुल लक्ष्य 1,99,144 हेक्टेयर था, जिसके सापेक्ष किसानों ने 1,99,163.91 हेक्टेयर में बुआई की थी। इसके साथ ही 604 हेक्टेयर क्षेत्रफल में जौ और 291 हेक्टेयर में रबी मक्का की बुवाई की गई है। नवंबर-दिसंबर में इन फसलों के बीजों की बुआई की गई थी, लेकिन दिसंबर में हुई तेज बारिश ने सबसे ज्यादा गेहूं के उन खेतों को नुकसान पहुंचाया, जिसमें बीजों का जमाव होना था। खेतों में पानी भर जाने से करीब 20 प्रतिशत एरिया में गेहूं बीजों का जमाव नहीं हुआ है। इससे लक्ष्य के सापेक्ष गेहूं के एरिया में करीब 35 हजार हेक्टेयर की कमी आई है। बीजों का जमाव न होने से कुछ किसानों ने दोबारा बीजों की बुवाई की, लेकिन बारिश का सिलसिला जारी रहने से बीजों का अच्छा जमाव नहीं हुआ है। इससे किसानों ने खेत परती छोड़ दिए हैं या फिर उसमें गन्ने की बुआई करेंगे।
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मसूर और तोरिया फसलों को भी नुकसान
कृषि विभाग के मुताबिक दलहनी फसलों में मसूर की बुवाई 18464 हेक्टेयर, चना की 251 हेक्टेयर और मटर की 1395 हेक्टेयर में बुआई की गई है। इसी तरह तिलहनी फसलों में प्रमुख रूप से तोरिया की 35274 हेक्टेयर और राई सरसों की 28465 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बुआई की गई है। बेमौसम बारिश होने से मसूर और राई सरसों की फसलों को नुकसान पहुंचा है। फूलों पर बारिश के पानी के असर से फली बनने की प्रक्रिया को नुकसान हुआ हैै। जबकि मसूर की फसल में पानी भरने से पौधे सड़ने लगे हैं। कृषि विभाग इन फसलों को हुए नुकसान का आकलन कराएगा।
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गेहूं की बुआई के दौरान पानी खेतों में भरने से करीब 20 प्रतिशत एरिया में बीजों का जमाव नहीं हुआ है। इससे गेहूं का एरिया कम हुआ है, जिससे उत्पादन में कमी आ सकती हैै। इसके अलावा मसूर और सरसों में फली बनने का समय होने से बारिश ने नुकसान पहुंचाया है।
-सत्येंद्र प्रताप सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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