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एक सप्ताह तक मौसम रहेगा साफ.. 15 दिसंबर तक गेहूं की बुआई के लिए वरदान
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लखीमपुर में नौरंगाबाद रोड पर कोहरे में निकलते वाहन। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। मौसम के उतार-चढ़ाव के बीच किसानों को बेहद सावधानी रखनी होगी। खासकर जिन्होंने अब तक गेहूं की बुआई नहीं की है, तो वे किसान 15 दिसंबर 2020 तक गेहूं की बुआई जरूर कर लें।
जिला कृषि अधिकारी सत्येंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि गेहूं बुआई के लिए 15 नवंबर से 15 दिसंबर तक समय आदर्श रहता है। इस बार मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, लेकिन तापमान अनुकूल है। गेहूं के बढ़िया जमाव के लिए 12 से 25 डिग्री सेल्सियस तक तापमान रहना चाहिए, जो अभी किसानों का साथ दे रहा है। उन्होंने बताया कि 20 दिन पहले गेहूं की बुआई कर चुके किसान खेत में पहली सिंचाई कर दें।
कोरोना काल में मौसम भी नए अंदाज दिखा रहा है। ठंड का असर सुबह-शाम रहता है, लेकिन दिन में धूप निकलने से तापमान बढ़कर सामान्य तक पहुंच जाता है। दिसंबर की शुरुआत में भी तापमान स्थिर बना हुआ है। कोहरा पड़ने की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन यह भी कभी-कभार दिखाई देता है। इससे ठंडक का असर सुबह-शाम तक ही सीमित है। गुरुवार को सुबह कोहरा गिरा, जिससे लोगों को आवगमन के दौरान वाहनों की लाइट जलानी पड़ी। हालांकि कुछ देर बाद कोहरा छट गया और धूप खिल गई। गुरुवार को अधिकतम तापमान 26.1 डिग्री और न्यूनतम 10.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य तापमान के ही करीब है। मौसम विभाग के मुताबिक एक सप्ताह तक मौसम साफ रहेगा और बारिश की कोई संभावना नहीं है। मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के निदेशक जेपी गुप्ता ने बताया कि इस सप्ताह मौसम साफ रहेगा और बारिश की भी संभावना नहीं है। हवा चलने का रुख जरूर बदल सकता है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार, शनिवार, रविवार को पूरब दिशा से हवा चलेगी। सोमवार को दक्षिण की ओर से हवा चलेगी।
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जिला कृषि अधिकारी सत्येंद्र प्रताप सिंह ने फसलों के लिहाज से मौसम के प्रभाव के बारे में बताया है कि रबी सीजन में प्रमुख रूप से गेहूं की बुआई का समय चल रहा है, जिसके लिए मौसम अनुकूल है। इसलिए किसान 15 दिसंबर तक अपने खेतों में गेहूं की बुआई जरूर कर लें, क्योंकि इसके बाद तापमान में गिरावट आएगी। उन्होंने बताया कि तापमान कम होने से गेहूं के बीजों का जमाव कम होगा, जिससे उत्पादन प्रभावित होगा। उन्होंने बताया कि सरसों की बुआई करने के बाद जिन खेतों में पौधे सात इंच के हो गए हैं, तो उसमें थिनिंग का कार्य कर लें। जहां पर घने पौधे हैं, तो उन्हें हटाकर थोड़ी दूरी बना दें। क्योंकि ज्यादा घने होने पर पौधे कमजोर रह जाते हैं, जिससे उत्पादन कम रह सकता है।
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घर के गेहूं की बुआई करने से पहले करें उपचारित
लखीमपुर खीरी। कोरोना काल में पैसों की कमी से परेशान किसान बाजार या बीज भंडार से बीज न लेकर घर के गेहूं की बुआई कर रहे हैं। ऐसा कृषि विभाग के सर्वे के दौरान जानकारी में आया है। दूसरा कारण बीज के रेट के अंतर का भी बताया जा रहा है। क्योंकि बाजार में गेहूं बीज 2500 से 3400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रहा है, जबकि घरों में खाने वाले गेहूं का बाजार मूल्य करीब 1500 रुपये क्विंटल है। ऐसे में किसान खाने वाले गेहूं को बीज के रूप में प्रयोग करके बुआई कर रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी सत्येंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि ऐसे में बीजजनित रोग करनाल बंट का प्रकोप हो सकता है, जिससे बचाव के लिए किसानों को सलाह है कि रसायन थीरम या कार्बाडांजेम या ट्राइकोडर्मा से गेहूं बीज को उपचारित करने के बाद ही बुवाई करें।
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गेहूं बीज वितरण में लापरवाही करने पर 30 कर्मचारियों को नोटिस
लखीमपुर खीरी। रबी सीजन में गेहूं बुआई का समय चल रहा है, जिसको लेकर ब्लॉक स्थित राजकीय कृषि बीज गोदामों पर किसानों के लिए अनुदान पर गेहूं बीज उपलब्ध कराया गया है। बीज वितरण में रुचि न लेने वाले 30 प्राविधिक सहायकों को जिला कृषि अधिकारी सत्येंद्र प्रताप सिंह ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जिले में 1,96,404 हेक्टेअर क्षेत्रफल में गेहूं बुआई का लक्ष्य है, जिसके सापेक्ष अब तक 1.08 लाख हेक्टेयर गेहूं की बुआई हो चुकी है। बुआई के लिए 86500 क्विंटल गेहूं बीज वितरण का लक्ष्य है, जिसके सापेक्ष 50 फीसद बीज नहीं बिक पाया है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि प्राविधिक सहायक गेहूं बीज का किसानों में वितरण कराने में रुचि नहीं ले रहे हैं, जिससे 30 कर्मचारियों को नोटिस देकर जवाब मांगा है। संतोषजनक जवाब न देने वाले कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक या अन्य जनपद में तबादले की कार्रवाई की जाएगी। संवाद
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जिला कृषि अधिकारी सत्येंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि गेहूं बुआई के लिए 15 नवंबर से 15 दिसंबर तक समय आदर्श रहता है। इस बार मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, लेकिन तापमान अनुकूल है। गेहूं के बढ़िया जमाव के लिए 12 से 25 डिग्री सेल्सियस तक तापमान रहना चाहिए, जो अभी किसानों का साथ दे रहा है। उन्होंने बताया कि 20 दिन पहले गेहूं की बुआई कर चुके किसान खेत में पहली सिंचाई कर दें।
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कोरोना काल में मौसम भी नए अंदाज दिखा रहा है। ठंड का असर सुबह-शाम रहता है, लेकिन दिन में धूप निकलने से तापमान बढ़कर सामान्य तक पहुंच जाता है। दिसंबर की शुरुआत में भी तापमान स्थिर बना हुआ है। कोहरा पड़ने की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन यह भी कभी-कभार दिखाई देता है। इससे ठंडक का असर सुबह-शाम तक ही सीमित है। गुरुवार को सुबह कोहरा गिरा, जिससे लोगों को आवगमन के दौरान वाहनों की लाइट जलानी पड़ी। हालांकि कुछ देर बाद कोहरा छट गया और धूप खिल गई। गुरुवार को अधिकतम तापमान 26.1 डिग्री और न्यूनतम 10.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य तापमान के ही करीब है। मौसम विभाग के मुताबिक एक सप्ताह तक मौसम साफ रहेगा और बारिश की कोई संभावना नहीं है। मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के निदेशक जेपी गुप्ता ने बताया कि इस सप्ताह मौसम साफ रहेगा और बारिश की भी संभावना नहीं है। हवा चलने का रुख जरूर बदल सकता है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार, शनिवार, रविवार को पूरब दिशा से हवा चलेगी। सोमवार को दक्षिण की ओर से हवा चलेगी।
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जिला कृषि अधिकारी सत्येंद्र प्रताप सिंह ने फसलों के लिहाज से मौसम के प्रभाव के बारे में बताया है कि रबी सीजन में प्रमुख रूप से गेहूं की बुआई का समय चल रहा है, जिसके लिए मौसम अनुकूल है। इसलिए किसान 15 दिसंबर तक अपने खेतों में गेहूं की बुआई जरूर कर लें, क्योंकि इसके बाद तापमान में गिरावट आएगी। उन्होंने बताया कि तापमान कम होने से गेहूं के बीजों का जमाव कम होगा, जिससे उत्पादन प्रभावित होगा। उन्होंने बताया कि सरसों की बुआई करने के बाद जिन खेतों में पौधे सात इंच के हो गए हैं, तो उसमें थिनिंग का कार्य कर लें। जहां पर घने पौधे हैं, तो उन्हें हटाकर थोड़ी दूरी बना दें। क्योंकि ज्यादा घने होने पर पौधे कमजोर रह जाते हैं, जिससे उत्पादन कम रह सकता है।
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घर के गेहूं की बुआई करने से पहले करें उपचारित
लखीमपुर खीरी। कोरोना काल में पैसों की कमी से परेशान किसान बाजार या बीज भंडार से बीज न लेकर घर के गेहूं की बुआई कर रहे हैं। ऐसा कृषि विभाग के सर्वे के दौरान जानकारी में आया है। दूसरा कारण बीज के रेट के अंतर का भी बताया जा रहा है। क्योंकि बाजार में गेहूं बीज 2500 से 3400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रहा है, जबकि घरों में खाने वाले गेहूं का बाजार मूल्य करीब 1500 रुपये क्विंटल है। ऐसे में किसान खाने वाले गेहूं को बीज के रूप में प्रयोग करके बुआई कर रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी सत्येंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि ऐसे में बीजजनित रोग करनाल बंट का प्रकोप हो सकता है, जिससे बचाव के लिए किसानों को सलाह है कि रसायन थीरम या कार्बाडांजेम या ट्राइकोडर्मा से गेहूं बीज को उपचारित करने के बाद ही बुवाई करें।
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गेहूं बीज वितरण में लापरवाही करने पर 30 कर्मचारियों को नोटिस
लखीमपुर खीरी। रबी सीजन में गेहूं बुआई का समय चल रहा है, जिसको लेकर ब्लॉक स्थित राजकीय कृषि बीज गोदामों पर किसानों के लिए अनुदान पर गेहूं बीज उपलब्ध कराया गया है। बीज वितरण में रुचि न लेने वाले 30 प्राविधिक सहायकों को जिला कृषि अधिकारी सत्येंद्र प्रताप सिंह ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जिले में 1,96,404 हेक्टेअर क्षेत्रफल में गेहूं बुआई का लक्ष्य है, जिसके सापेक्ष अब तक 1.08 लाख हेक्टेयर गेहूं की बुआई हो चुकी है। बुआई के लिए 86500 क्विंटल गेहूं बीज वितरण का लक्ष्य है, जिसके सापेक्ष 50 फीसद बीज नहीं बिक पाया है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि प्राविधिक सहायक गेहूं बीज का किसानों में वितरण कराने में रुचि नहीं ले रहे हैं, जिससे 30 कर्मचारियों को नोटिस देकर जवाब मांगा है। संतोषजनक जवाब न देने वाले कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक या अन्य जनपद में तबादले की कार्रवाई की जाएगी। संवाद