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फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए नया कानून लागू होने से किसानों की बल्ले-बल्ले
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लखीमपुर खीरी। केंद्र सरकार ने किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए नया कानून लागू कर दिया है, जिससे किसानों के उत्पादों का उचित मूल्य दिलाने की दशकों से चली आ रही समस्या का हल हो सकता है। किसानों का उत्पाद खरीदने के लिए व्यापारियों/कंपनियों में होड़ मच सकती है, क्योंकि मंडी शुल्क के हटते ही लाइसेंस व्यवस्था भी खत्म हो गई हैै। इससे खुले बाजार पर नियंत्रण करने के लिए बड़ी कंपनियां निवेश करेंगी। वहीं छोटे व्यापारियों और बिचौलियों को धंधे का दूसरा विकल्प चुनना पड़ेगा, क्योंकि मंडियों में आवक एकदम कम हो जाएगी। क्योंकि सरकार ने सभी क्रय केंद्रों के प्रभारियों को किसानों के घर, खेत और खलिहान से गेहूं खरीदने के निर्देश कई दिन पहले दे दिए थे।
मिनिस्ट्री ऑफ लॉ एंड जस्टिस ने द फार्मर्स प्रोड्यूस ट्रेड एंड कामर्स (प्रोमोशन एंड फैसिलिएशन) ऑर्डिनेंस 2020 पारित करकेे किसानों और ट्रेडर्स के बीच सीधा व्यापार जोड़ने की तैयारी कर ली है। मंडी शुल्क समाप्त होने से किसानों के सभी प्रकार के उत्पादों का बाजार सभी के लिए खुल गया है। इससे गन्ना, गेहूं, चावल, दालें, दूध, इडिबल ऑयल, सब्जियां, फल, मसाले, मछली, बकरी, पोल्ट्री फार्म को नए कानून में किसानों का उत्पाद बताया गया है। किसानों और ट्रेडर्स (कंपनियां/संस्थाएं) के बीच इकोसिस्टम का माहौल बनाया जाएगा, जिससे किसान अपने उत्पादों की उचित कीमत का आकलन करके अपना मूल्य प्राप्त कर सकेगा। मंडी मामलों के जानकार बताते हैं कि नए कानून से कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव आएंगे। अभी लोगों को इसका अंदाजा नहीं है, लेकिन जिस तरह सरकार ने किसानों के उत्पादों को सभी प्रकार के टैक्स से छूट दे दी है। वहीं जब बड़ी कंपनियां किसानों के उत्पादों को खरीदने के लिए इलेक्ट्रानिक प्लेटफार्म चालू करेंगी, उस दिन से बदलाव नजर आने लगेगा। इसकी अब तक कल्पना लंबे समय से चली आ रही थी।
सरकारी दखल भी होगा खत्म
किसानों को अपने उत्पादों को बेचने के लिए मंडी तक नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि किसानों के घर, खेत, खलिहान से खरीदना सभी की जिम्मेदारी बन जाएगी। इससे किसानों को अपना उत्पाद कहीं भी ले जाने में दिक्कत नहीं आएगी, क्योंकि अब कोई सरकारी कर्मचारी या अधिकारी उनसे कोई कागज नहीं मांग सकेगा।
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किसानों को माफिया के काकस से मिलेगा छुटकारा
नए कानून से मंडी में कारोबार करने वाले आढ़तियों, बिचौलियों और गांव के छोटे व्यापारियों को झटका लगना तय माना जा रहा है, क्योंकि नई व्यवस्था के अमल में आते ही इनका नेटवर्क टूट जाएगा। गांवों के छोटे व्यापारियों और बिचौलियों को किसानों से औने-पौने दामों में गेहूं-धान खरीदना मुश्किल हो जाएगा।
मंडी परिसर में शुल्क को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। नए कानून से किसानों को फायदा होगा, तो वहीं छोटे व्यापारियों का वजूद खत्म हो जाएगा। मंडी में आवक बंद होने से आढ़तियों को भी नई चुनौतियों से जूझना पड़ेगा।
-हुकुम चंद्र अग्रवाल, आढ़ती, राजापुर मंडी
इस कानून से किसानों को बहुत बड़ा फायदा होने की उम्मीद है तो दूसरी ओर आढ़ती और गांवों के छोटे व्यापारियों का धंधा चौपट हो जाएगा। हालांकि मुख्यमंत्री ने मंडियों को एक्सपोर्ट हब बनाने की बात कही है, जिससे कुछ राहत मिलेगी।
-ज्ञानस्वरूप शुक्ला, अध्यक्ष, व्यापार मंडल राजापुर मंडी
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मिनिस्ट्री ऑफ लॉ एंड जस्टिस ने द फार्मर्स प्रोड्यूस ट्रेड एंड कामर्स (प्रोमोशन एंड फैसिलिएशन) ऑर्डिनेंस 2020 पारित करकेे किसानों और ट्रेडर्स के बीच सीधा व्यापार जोड़ने की तैयारी कर ली है। मंडी शुल्क समाप्त होने से किसानों के सभी प्रकार के उत्पादों का बाजार सभी के लिए खुल गया है। इससे गन्ना, गेहूं, चावल, दालें, दूध, इडिबल ऑयल, सब्जियां, फल, मसाले, मछली, बकरी, पोल्ट्री फार्म को नए कानून में किसानों का उत्पाद बताया गया है। किसानों और ट्रेडर्स (कंपनियां/संस्थाएं) के बीच इकोसिस्टम का माहौल बनाया जाएगा, जिससे किसान अपने उत्पादों की उचित कीमत का आकलन करके अपना मूल्य प्राप्त कर सकेगा। मंडी मामलों के जानकार बताते हैं कि नए कानून से कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव आएंगे। अभी लोगों को इसका अंदाजा नहीं है, लेकिन जिस तरह सरकार ने किसानों के उत्पादों को सभी प्रकार के टैक्स से छूट दे दी है। वहीं जब बड़ी कंपनियां किसानों के उत्पादों को खरीदने के लिए इलेक्ट्रानिक प्लेटफार्म चालू करेंगी, उस दिन से बदलाव नजर आने लगेगा। इसकी अब तक कल्पना लंबे समय से चली आ रही थी।
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सरकारी दखल भी होगा खत्म
किसानों को अपने उत्पादों को बेचने के लिए मंडी तक नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि किसानों के घर, खेत, खलिहान से खरीदना सभी की जिम्मेदारी बन जाएगी। इससे किसानों को अपना उत्पाद कहीं भी ले जाने में दिक्कत नहीं आएगी, क्योंकि अब कोई सरकारी कर्मचारी या अधिकारी उनसे कोई कागज नहीं मांग सकेगा।
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किसानों को माफिया के काकस से मिलेगा छुटकारा
नए कानून से मंडी में कारोबार करने वाले आढ़तियों, बिचौलियों और गांव के छोटे व्यापारियों को झटका लगना तय माना जा रहा है, क्योंकि नई व्यवस्था के अमल में आते ही इनका नेटवर्क टूट जाएगा। गांवों के छोटे व्यापारियों और बिचौलियों को किसानों से औने-पौने दामों में गेहूं-धान खरीदना मुश्किल हो जाएगा।
मंडी परिसर में शुल्क को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। नए कानून से किसानों को फायदा होगा, तो वहीं छोटे व्यापारियों का वजूद खत्म हो जाएगा। मंडी में आवक बंद होने से आढ़तियों को भी नई चुनौतियों से जूझना पड़ेगा।
-हुकुम चंद्र अग्रवाल, आढ़ती, राजापुर मंडी
इस कानून से किसानों को बहुत बड़ा फायदा होने की उम्मीद है तो दूसरी ओर आढ़ती और गांवों के छोटे व्यापारियों का धंधा चौपट हो जाएगा। हालांकि मुख्यमंत्री ने मंडियों को एक्सपोर्ट हब बनाने की बात कही है, जिससे कुछ राहत मिलेगी।
-ज्ञानस्वरूप शुक्ला, अध्यक्ष, व्यापार मंडल राजापुर मंडी