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टिड्डी दल की बुंदेलखंड में दस्तक के बाद लखीमपुर में किसानों के लिए अलर्ट जारी
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लखीमपुर खीरी। कोरोना महामारी के बीच टिड्डियों का दल किसानों की फसल निगलना चाह रहा है, जो बुंदेलखंड क्षेत्र में दस्तक दे चुका है। इससे बचाव को लेकर कृषि विभाग ने किसानों के लिए अलर्ट जारी किया है कि अपनी फसलों को टिड्डी दल के हमले से बचाने के लिए सतर्क हो जाएं। कृषि विभाग ने टिड्डी दल का प्रकोप होने पर टिन के खाली डिब्बे या थाली बजाते हुए शोर मचाने की सलाह दी है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ इंद्रेषु कुमार गौतम ने बताया है कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के विभिन्न क्षेत्रों से होते हुए टिड्डी दल उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है। टिड्डी दल के आक्रमण की निगरानी के लिए सभी किसान जागरूक रहें, जिससे समय रहते नियंत्रण किया जा सकता है। टिड्डी दल के नियंत्रण के लिए ग्राम प्रधान, प्राविधिक सहायकों, लेखपालों और ग्राम विकास अधिकारियों के माध्यम से जिला प्रशासन तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि यदि किसी खेत पर टिड्डी दल आक्रमण करता है, तो उसे भगाने के लिए टिन के डिब्बे या थाली बजाने के साथ ही शोर मचाएं, जिससे टिड्डी दल खेतों में आक्रमण नहीं कर पाए। उन्होंने किसानों को खाली खेत में जुताई करके पानी भरवाने की सलाह भी दी है, जिससे टिड्डी दल के अंडे देने की संभावना खत्म की जा सके। उन्होंने बताया कि टिड्डी दल का प्रकोप होने पर क्लोरपाइरीफास 50 प्रतिशत ईसी 480 मिलीलीटर या डाईफयूबेनजूरान 25 प्रतिशत डब्ल्यूपी 125 ग्राम या बेडिंयोकार्ब 80 प्रतिशत 125 ग्राम या मैलाथियान पांच प्रतिशत डब्ल्यूपी 25 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
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जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ इंद्रेषु कुमार गौतम ने बताया है कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के विभिन्न क्षेत्रों से होते हुए टिड्डी दल उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है। टिड्डी दल के आक्रमण की निगरानी के लिए सभी किसान जागरूक रहें, जिससे समय रहते नियंत्रण किया जा सकता है। टिड्डी दल के नियंत्रण के लिए ग्राम प्रधान, प्राविधिक सहायकों, लेखपालों और ग्राम विकास अधिकारियों के माध्यम से जिला प्रशासन तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि यदि किसी खेत पर टिड्डी दल आक्रमण करता है, तो उसे भगाने के लिए टिन के डिब्बे या थाली बजाने के साथ ही शोर मचाएं, जिससे टिड्डी दल खेतों में आक्रमण नहीं कर पाए। उन्होंने किसानों को खाली खेत में जुताई करके पानी भरवाने की सलाह भी दी है, जिससे टिड्डी दल के अंडे देने की संभावना खत्म की जा सके। उन्होंने बताया कि टिड्डी दल का प्रकोप होने पर क्लोरपाइरीफास 50 प्रतिशत ईसी 480 मिलीलीटर या डाईफयूबेनजूरान 25 प्रतिशत डब्ल्यूपी 125 ग्राम या बेडिंयोकार्ब 80 प्रतिशत 125 ग्राम या मैलाथियान पांच प्रतिशत डब्ल्यूपी 25 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
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