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Lakhimpur Kheri News: जमीन के अधिकार के बाद चंदन चौकी में रोजगार की दिशा में बढ़ेंगे कदम

Mon, 13 Apr 2026 11:30 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 13 Apr 2026 11:30 PM IST
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After land rights, steps will be taken towards employment in Chandan Chowki
सूरज राणा।
पलियाकलां। नेपाल सीमा से सटे आदिवासी बहुल क्षेत्र चंदन चौकी में विकास की नई कहानी लिखने की तैयारी शुरू हो गई है। वर्षों तक जमीन के मालिकाना हक से वंचित रहे थारू समुदाय को हाल ही में कानूनी अधिकार मिलने के बाद अब रोजगार सृजन की दिशा में बड़ा कदम उठाने की योजना सामने आई है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया दौरे ने इस क्षेत्र के लिए नई उम्मीदें जगा दी हैं। थारू जनजाति के लोग पीढ़ियों से जंगल और उसके आसपास निवास करते आए हैं, लेकिन जमीन पर अधिकार न होने के कारण वे विकास की मुख्यधारा से दूर रहे। मुख्यमंत्री ने गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट के तहत समुदाय को जमीन का कानूनी स्वामित्व सौंपते हुए केवल अधिकार ही नहीं दिए, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की ठोस रूपरेखा भी प्रस्तुत की।
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कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मंच से विधायक रोमी सहानी के जनसंपर्क और कार्यशैली की सराहना करते हुए उन्हें एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी। उन्होंने सुझाव दिया कि आदिवासी क्षेत्र में टीएचएफ कंपनी की फैक्टरी स्थापित की जाए, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित हों। मुख्यमंत्री का उद्देश्य स्पष्ट है कि रोजगार की कमी के कारण होने वाला पलायन रुके और युवाओं तथा महिलाओं को अपने ही क्षेत्र में सम्मानजनक आजीविका मिल सके। यदि यह योजना धरातल पर उतरती है तो चंदन चौकी आर्थिक रूप से मजबूत औद्योगिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में उभर सकता है। विधायक रोमी सहानी से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का विजन समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का है और इसे पूरी प्रतिबद्धता के साथ लागू किया जाएगा।
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थारू संस्कृति को मिलेगी नई पहचान
इस पहल का सबसे खास पहलू थारू संस्कृति से जुड़ा हुआ है। विधायक रोमी सहानी की टीम इस दिशा में शोध कर रही है कि थारू जनजाति के पारंपरिक व्यंजनों को टीएचएफ के बेकरी और मिष्ठान उत्पादों में शामिल किया जाए। इससे स्थानीय स्वाद को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की योजना है।

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परफेक्ट इकानोमिक मॉडल की ओर कदम
जमीन का अधिकार, उद्योग स्थापना की पहल और पारंपरिक व्यंजनों की ब्रांडिंग ये तीनों पहल मिलकर चंदन चौकी में एक मजबूत आर्थिक मॉडल तैयार कर सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना सफल हुई तो प्रदेश में आदिवासी विकास का रोल मॉडल बन सकती है।

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महिलाओं को मिलेगा सीधा लाभ
थारू समुदाय की महिलाओं के पास पारंपरिक व्यंजन बनाने की विशेष कला है। यदि इन्हें व्यावसायिक स्तर पर तैयार किया गया तो महिलाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा और उनका कौशल आय के स्रोत में बदल सकेगा।

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स्वाद की ब्रांडिंग से सांस्कृतिक संरक्षण
किसी जनजाति के भोजन को बाजार में पहचान मिलने से उसकी संस्कृति भी सुरक्षित रहती है। दुधवा पर्यटन परिसर में ईको समिति के माध्यम से थारू महिलाओं द्वारा पर्यटकों को परोसी जा रही थारू थाली पहले ही अपनी अलग पहचान बना चुकी है।

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ढिकरी बन सकती है नई पहचान
थारू व्यंजनों में ढिकरी खास पहचान रखती है। चावल के आटे से भाप में तैयार होने वाला यह व्यंजन तीखी चटनी, दाल या करी के साथ खाया जाता है। इसके अलावा मिष्ठान के रूप में मीठी बगिया भी लोकप्रिय है। ऐसे कई पारंपरिक व्यंजन हैं जो उचित मंच मिलने पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकते हैं।
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अगर यहां व्यंजन को संसाधन मुहैया होंगे तो रोजगार बढ़ेगा, इससे क्षेत्र आर्थिक तौर पर मजबूत होगा ही साथ ही व्यंजन के तौर पर भी जनजाति क्षेत्र को पहचान मिलेगी।

सूरज राणा, चंदन चौकी


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हमारे थारू क्षेत्र में कई ऐसे व्यंजन हैं जिनको बाजार मिले तो वह अलग छाप छोड़ सकते हैं। अगर मुख्यमंत्री के कहने के मुताबिक इससे संबंधित कोई इकाई स्थापित होती है तो क्षेत्र की तकदीर और चमकेगी।
योगेश राणा, राम नगर
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भूमि के अधिकार पत्र ने आदिवासी समाज को एक नई ताकत दी है। अगर रोजगार के संसाधन यहां आएंगे तो रोजी रोटी की तलाश में होने वाला पलायन रुकेगा और क्षेत्र समृद्ध होगा।
मुकेश कुमार, चंदन चौकी

सूरज राणा।

सूरज राणा।

सूरज राणा।

सूरज राणा।

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