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छोटी सी गलती बन सकती है आपके बहरेपन का कारण
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कान के रोगों की जानकारी देते एसीएमओ व ईएनटी सर्जन।
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तंबाकू भी है कम सुनाई देने का एक प्रमुख कारण
लखीमपुर खीरी। विश्व श्रवण दिवस पर बृहस्पतिवार को एएनएम ट्रेनिंग सेंटर सभागार में जागरूकता गोष्ठी हुई। इसमें बहरेपन के लक्षण और कारण के साथ कान की विभिन्न बीमारियों के बारे में लोगों को बताया गया।
ईएनटी सर्जन डॉ. हर्षिता अवस्थी ने बताया कि कान में होने वाली कई बीमारी ऐसी हैं, जिनका समय पर पहचान होने से इलाज भी संभव है। मगर, इसमें लापरवाही और छोटी- छोटी गलतियां बहरेपन का कारण बन सकती हैं। उन्होंने बताया कि कान का मैल न तो स्वयं किसी नुकीली वस्तु से निकालें और न ही किसी अप्रशिक्षित से निकलवाएं। इसमें घरेलू नुस्खों का भी प्रयोग न करें।
कान में किसी भी प्रकार की तकलीफ होने पर प्रशिक्षित डॉक्टर को दिखाएं। कानों को रोज साफ करना जरूरी नहीं है, क्योंकि इसमें जमा होने वाला प्राकृतिक पदार्थ इसकी सुरक्षा करता है। ईएनटी सर्जन ने बताया कि गर्भ में पल रहे बच्चे भी बहरेपन का शिकार हो जाते हैं। इसके लिए जरूरी है कि जन्म के बाद जांच कराएं, जिससे समय पर इलाज मिलने से समस्या दूर हो जाती है।
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नोडल अफसर डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि एनसीडी की ओर से डिफनेस कार्यक्रम चल रहा है। इसके तहत कान के रोगों का निशुल्क इलाज होता है। बहरेपन का एक कारण तंबाकू उत्पादों का सेवन भी है। इसलिए तंबाकू आदि का प्रयोग करने से बचें।
सीएमएस डॉ. मदन लाल ने बताया कि जिला अस्पताल में डिफरेंस कार्यक्रम संचालित है। इसमें ऐसे लोगों का इलाज हो रहा है कि जिन्हें या तो सुनाई नहीं देता या फिर सुनने में तकलीफ है। इलाज के साथ दवाएं भी निशुल्क दी जाती हैं।
जिरियाट्रिक फिजीशियन डॉ. शिखर बाजपेई ने बताया कि बहरेपन का शिकार बुजुर्ग ज्यादा बन रहे हैं, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ नसों में कमजोरी आ जाती है। कुशल डॉक्टर के इलाज से इसका काफी हद तक इलाज संभव है। एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ राकेश गुप्ता, विजय वर्मा, देवनंदन श्रीवास्तव, अनुज श्रीवास्तव, फिजियोथैरेपिस्ट विवेक तिवारी, सरिता वर्मा मौजूद रहीं।
विश्व श्रवण दिवस पर सीएचसी में हुई गोष्ठी
पलियाकलां। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अधीक्षक डॉ. एएन चौहान की अध्यक्षता में विश्व श्रवण दिवस पर गोष्ठी हुई। इस दौरान काउंसलर अंकित दीक्षित ने बताया कि कान का दर्द, मवाद आना, कान में मैल, दुर्घटनाओं से सिर व कान में चोट के कारण बहरापन हो जाता है। इसके अलावा बचपन की बीमारियां जैसे खसरा, कनकैड, मस्तिष्क स्वर, अत्यधिक शोर और हार्न की आवाजों से भी बहरापन होने की आशंका है। इसके उपचार के बारे में भी जानकारियां दी गईं। इस दौरान अधीक्षक डॉ. एएन चौहान, डॉ. अजीत कुमार, डॉ. रामकिशोर वर्मा, डॉ. सुभाष राणा, काउंसलर अंकित दीक्षित, सुप्रिया मौर्या, दलवीर कौर, साधन वर्मा, मीरा, परमजीत, रामदेवी समेत सीएचसी स्टाफ मौजूद रहा। संवाद
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लखीमपुर खीरी। विश्व श्रवण दिवस पर बृहस्पतिवार को एएनएम ट्रेनिंग सेंटर सभागार में जागरूकता गोष्ठी हुई। इसमें बहरेपन के लक्षण और कारण के साथ कान की विभिन्न बीमारियों के बारे में लोगों को बताया गया।
ईएनटी सर्जन डॉ. हर्षिता अवस्थी ने बताया कि कान में होने वाली कई बीमारी ऐसी हैं, जिनका समय पर पहचान होने से इलाज भी संभव है। मगर, इसमें लापरवाही और छोटी- छोटी गलतियां बहरेपन का कारण बन सकती हैं। उन्होंने बताया कि कान का मैल न तो स्वयं किसी नुकीली वस्तु से निकालें और न ही किसी अप्रशिक्षित से निकलवाएं। इसमें घरेलू नुस्खों का भी प्रयोग न करें।
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कान में किसी भी प्रकार की तकलीफ होने पर प्रशिक्षित डॉक्टर को दिखाएं। कानों को रोज साफ करना जरूरी नहीं है, क्योंकि इसमें जमा होने वाला प्राकृतिक पदार्थ इसकी सुरक्षा करता है। ईएनटी सर्जन ने बताया कि गर्भ में पल रहे बच्चे भी बहरेपन का शिकार हो जाते हैं। इसके लिए जरूरी है कि जन्म के बाद जांच कराएं, जिससे समय पर इलाज मिलने से समस्या दूर हो जाती है।
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नोडल अफसर डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि एनसीडी की ओर से डिफनेस कार्यक्रम चल रहा है। इसके तहत कान के रोगों का निशुल्क इलाज होता है। बहरेपन का एक कारण तंबाकू उत्पादों का सेवन भी है। इसलिए तंबाकू आदि का प्रयोग करने से बचें।
सीएमएस डॉ. मदन लाल ने बताया कि जिला अस्पताल में डिफरेंस कार्यक्रम संचालित है। इसमें ऐसे लोगों का इलाज हो रहा है कि जिन्हें या तो सुनाई नहीं देता या फिर सुनने में तकलीफ है। इलाज के साथ दवाएं भी निशुल्क दी जाती हैं।
जिरियाट्रिक फिजीशियन डॉ. शिखर बाजपेई ने बताया कि बहरेपन का शिकार बुजुर्ग ज्यादा बन रहे हैं, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ नसों में कमजोरी आ जाती है। कुशल डॉक्टर के इलाज से इसका काफी हद तक इलाज संभव है। एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ राकेश गुप्ता, विजय वर्मा, देवनंदन श्रीवास्तव, अनुज श्रीवास्तव, फिजियोथैरेपिस्ट विवेक तिवारी, सरिता वर्मा मौजूद रहीं।
विश्व श्रवण दिवस पर सीएचसी में हुई गोष्ठी
पलियाकलां। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अधीक्षक डॉ. एएन चौहान की अध्यक्षता में विश्व श्रवण दिवस पर गोष्ठी हुई। इस दौरान काउंसलर अंकित दीक्षित ने बताया कि कान का दर्द, मवाद आना, कान में मैल, दुर्घटनाओं से सिर व कान में चोट के कारण बहरापन हो जाता है। इसके अलावा बचपन की बीमारियां जैसे खसरा, कनकैड, मस्तिष्क स्वर, अत्यधिक शोर और हार्न की आवाजों से भी बहरापन होने की आशंका है। इसके उपचार के बारे में भी जानकारियां दी गईं। इस दौरान अधीक्षक डॉ. एएन चौहान, डॉ. अजीत कुमार, डॉ. रामकिशोर वर्मा, डॉ. सुभाष राणा, काउंसलर अंकित दीक्षित, सुप्रिया मौर्या, दलवीर कौर, साधन वर्मा, मीरा, परमजीत, रामदेवी समेत सीएचसी स्टाफ मौजूद रहा। संवाद